आईपीएल 2026 के 59वें मुकाबले में Lucknow Super Giants ने Chennai Super Kings को 7 विकेट से हराकर पॉइंट्स टेबल में बड़ा उलटफेर कर दिया। इस हार के बाद चेन्नई सुपर किंग्स को प्लेऑफ की रेस में बड़ा झटका लगा है और टीम पांचवें से फिसलकर छठे स्थान पर पहुंच गई है।
लखनऊ की टीम भले ही प्लेऑफ की दौड़ से पहले ही बाहर हो चुकी हो, लेकिन इस जीत ने बाकी टीमों की गणित जरूर बिगाड़ दी है। अब चेन्नई के लिए आगे का रास्ता बेहद मुश्किल हो गया है। टीम को प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए अपने बचे हुए दोनों मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे।
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BRSABV Ekana Cricket Stadium में खेले गए इस मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 187 रन बनाए।
चेन्नई की ओर से कार्तिक शर्मा ने शानदार 71 रन की पारी खेली। वहीं शिवम दुबे ने नाबाद 32 रन बनाए। डेवाल्ड ब्रेविस ने 25 और संजू सैमसन ने 20 रन का योगदान दिया। लखनऊ के लिए आकाश सिंह सबसे सफल गेंदबाज रहे और उन्होंने 3 विकेट झटके।
188 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी लखनऊ की टीम ने बेहद आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। मिचेल मार्श ने 90 रन की विस्फोटक पारी खेलकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। जोश इंग्लिस ने 35 रन बनाए, जबकि निकोलस पूरन 32 रन बनाकर नाबाद लौटे। लखनऊ ने मुकाबला सिर्फ 16.4 ओवर में जीत लिया।
अब प्लेऑफ की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है। Rajasthan Royals और Chennai Super Kings के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। नेट रन रेट भी अब अहम भूमिका निभाने वाला है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मियामी, एजेंसियां। अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर Lionel Messi ने फीफा विश्व कप 2026 में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। केप वर्डे के खिलाफ नॉकआउट मुकाबले में गोल दागते ही मेसी इस विश्व कप में सात गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही उन्होंने विश्व कप इतिहास में एक नया रिकॉर्ड भी कायम कर दिया। दो अलग-अलग विश्व कप में सात गोल करने वाले पहले खिलाड़ी केप वर्डे के खिलाफ मैच के 29वें मिनट में गोल करने के साथ ही मेसी विश्व कप के दो अलग-अलग संस्करणों में सात या उससे अधिक गोल करने वाले पहले फुटबॉलर बन गए। इससे पहले उन्होंने 2022 विश्व कप में भी सात गोल किए थे। यह उपलब्धि उनके शानदार और लगातार बने हुए प्रदर्शन को दर्शाती है। गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे सात गोल के साथ मेसी फिलहाल 2026 फीफा विश्व कप के गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं, इस गोल के साथ उन्होंने लगातार आठ विश्व कप मैचों में गोल करने का विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। अर्जेंटीना की टीम ने यह मुकाबला जीतकर अगले दौर में जगह बना ली है। रिकॉर्ड्स की झड़ी जारी 39 वर्षीय मेसी पहले ही पुरुष विश्व कप इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं। अब उनके खाते में 20 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं और वह लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा फॉर्म को देखते हुए मेसी इस विश्व कप में कई और रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
बेंगलुरु ,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज राहुल द्रविड़ के बेटे समित द्रविड़ ने महाराजा ट्रॉफी KSCA टी20 2026 में अपनी आक्रामक और 360 डिग्री बल्लेबाजी से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कल्याणी बेंगलुरु ब्लास्टर्स की ओर से खेलते हुए समित ने हुबली टाइगर्स के खिलाफ सिर्फ 23 गेंदों में 32 रन बनाए। उनकी पारी में 6 शानदार चौके शामिल रहे। मैदान के चारों ओर लगाए आकर्षक शॉट समित ने अपनी पारी के दौरान कवर ड्राइव, बैकफुट कट, पुल और लॉफ्टेड शॉट्स समेत मैदान के लगभग हर हिस्से में रन बटोरे। उनकी 360 डिग्री बल्लेबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और क्रिकेट प्रशंसक उनकी तकनीक व आत्मविश्वास की जमकर तारीफ कर रहे हैं। बेंगलुरु ब्लास्टर्स ने रोमांचक मुकाबला जीता इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए कल्याणी बेंगलुरु ब्लास्टर्स ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 203 रन बनाए। जवाब में हुबली टाइगर्स की टीम निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 201 रन ही बना सकी। इस तरह बेंगलुरु ब्लास्टर्स ने 2 रन से रोमांचक जीत दर्ज की। 'राहुल द्रविड़ 2.0' और 'जूनियर वॉल' बता रहे फैंस समित की बल्लेबाजी देखने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस उन्हें 'राहुल द्रविड़ 2.0' और 'जूनियर वॉल' कहकर बुला रहे हैं। कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने भी उनकी तकनीक और शॉट चयन की सराहना की है। भारतीय क्रिकेट का उभरता सितारा समित द्रविड़ हाल के महीनों में लगातार घरेलू क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनका यही प्रदर्शन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में वे भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
नई दिल्ली: फुटबॉल में पेनाल्टी शूटआउट अक्सर किसी बड़े मैच की जीत और हार तय करता है। कुछ ही सेकंड में एक खिलाड़ी करोड़ों प्रशंसकों की उम्मीदों का केंद्र बन जाता है। ऐसे में अब केवल तकनीकी कौशल या अनुभव ही नहीं, बल्कि खिलाड़ी की मानसिक क्षमता भी चयन का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान कई टीमें पेनाल्टी शूटआउट के लिए सबसे उपयुक्त खिलाड़ियों की पहचान करने में न्यूरोसाइंस का सहारा ले रही हैं। अमेरिकी पुरुष फुटबॉल टीम ने जर्मनी की न्यूरोसाइंस कंपनी Neuro11 के साथ साझेदारी की है। इस तकनीक का उद्देश्य यह समझना है कि कौन-सा खिलाड़ी दबाव की स्थिति में सबसे अधिक शांत, केंद्रित और आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बड़े मुकाबलों में जीत केवल शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती से भी तय होती है। दिमाग की गतिविधियों का किया जा रहा वैज्ञानिक विश्लेषण इस शोध में खिलाड़ियों को विशेष ईईजी (Electroencephalography - EEG) उपकरण पहनाए जाते हैं, जो मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं। अभ्यास के दौरान जब खिलाड़ी पेनाल्टी, फ्री-किक या कॉर्नर जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं, तब उनके दिमाग की प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। वैज्ञानिक इस दौरान यह देखते हैं कि खिलाड़ी दबाव में कितना शांत रहता है, उसका ध्यान कितनी देर तक केंद्रित रहता है और निर्णय लेने की उसकी क्षमता कैसी बनी रहती है। इन आंकड़ों के आधार पर यह समझने की कोशिश की जाती है कि कौन खिलाड़ी मैच के सबसे तनावपूर्ण क्षण में भी अपनी सामान्य क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर सकता है। मानसिक दबाव और प्रदर्शन का सीधा संबंध विशेषज्ञों के अनुसार, तनावपूर्ण परिस्थितियों में खिलाड़ियों के मस्तिष्क का वह हिस्सा अधिक सक्रिय हो जाता है जो भविष्य की चिंता, परिणाम और निर्णय लेने से जुड़ा होता है। इसके विपरीत, सफल खिलाड़ियों में शरीर की गतिविधियों और संतुलन को नियंत्रित करने वाले हिस्से अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक केवल यह नहीं देखते कि खिलाड़ी कितना अच्छा शॉट लगाता है, बल्कि यह भी विश्लेषण करते हैं कि दबाव की स्थिति में उसका मानसिक संतुलन कितना मजबूत रहता है। माना जा रहा है कि यही मानसिक अंतर कई बार जीत और हार के बीच निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे तैयार होती है पेनाल्टी विशेषज्ञों की सूची न्यूरोसाइंस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर टीम प्रबंधन उन खिलाड़ियों की पहचान करता है जो तनावपूर्ण माहौल में भी शांत रहकर बेहतर निर्णय लेते हैं। जिन खिलाड़ियों का ध्यान आसानी से नहीं भटकता और जिनकी मानसिक स्थिरता अधिक होती है, उन्हें पेनाल्टी शूटआउट के लिए प्राथमिकता दी जाती है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल बेहतर पेनाल्टी लेने वाले खिलाड़ी चुनना ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी को भी मजबूत बनाना है, ताकि वे बड़े मुकाबलों में दबाव को बेहतर तरीके से संभाल सकें। क्लब फुटबॉल में पहले ही मिल चुकी है सफलता न्यूरोसाइंस आधारित यह तकनीक क्लब फुटबॉल में पहले भी प्रभावी साबित हो चुकी है। इंग्लैंड के दिग्गज क्लब लिवरपूल ने भी Neuro11 के साथ मिलकर खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी पर काम किया था। क्लब के पूर्व मैनेजर युर्गेन क्लॉप ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि इस प्रणाली ने खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्टों के अनुसार, एक बड़े कप फाइनल में लिवरपूल के खिलाड़ियों ने लगातार 11 पेनाल्टी सफलतापूर्वक गोल में बदली थीं, जिसे इस वैज्ञानिक तैयारी की बड़ी उपलब्धि माना गया। फुटबॉल में बढ़ती जा रही है तकनीक की भूमिका आधुनिक फुटबॉल तेजी से तकनीक आधारित खेल बनता जा रहा है। पहले जहां फिटनेस ट्रैकिंग, वीडियो एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ा, वहीं अब न्यूरोसाइंस भी टीमों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में खिलाड़ियों की मानसिक क्षमता का विश्लेषण टीम चयन, मैच रणनीति और प्रदर्शन सुधार का अहम आधार बनेगा। इससे न केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत तैयारी मजबूत होगी, बल्कि टीमों को बड़े मुकाबलों में बेहतर निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।