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भारत-इंग्लैंड टी20 सीरीज का पहला मुकाबला आज, हार का सिलसिला तोड़ने उतरेगी टीम इंडिया

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
India vs England T20
India vs England T20

चेस्टर-ले-स्ट्रीट, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला आज 1 जुलाई को इंग्लैंड के रिवरसाइड ग्राउंड, चेस्टर-ले-स्ट्रीट में खेला जाएगा। भारतीय समयानुसार मैच रात 10:00 बजे शुरू होगा।

 

टीम इंडिया हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में 0-2 से मिली हार को पीछे छोड़ते हुए नए जोश के साथ मैदान में उतरेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने की चुनौती होगी। दूसरी ओर हैरी ब्रूक की अगुआई वाली इंग्लैंड टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की पूरी कोशिश करेगी।

 

वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर नजर 

 

इस मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के संभावित अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर सभी की नजर रहेगी। आयरलैंड दौरे पर टीम में शामिल होने के बावजूद उन्हें दोनों मैचों में खेलने का मौका नहीं मिला था, ऐसे में क्रिकेट प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें आज इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम एकादश में जगह मिल सकती है।

 

पिच रिपोर्ट के अनुसार रिवरसाइड ग्राउंड की सतह बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों के लिए मददगार मानी जाती है। शुरुआती ओवरों में गेंद स्विंग कर सकती है, जबकि बाद में बल्लेबाज बड़े शॉट खेलने में सफल हो सकते हैं। मौसम भी मैच के दौरान अहम भूमिका निभा सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 में नीदरलैंड्स के अभियान का अंत टीम के लिए दोहरी निराशा लेकर आया। राउंड ऑफ 32 में मोरक्को से मिली हार के बाद जहां टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई, वहीं मुख्य कोच Ronald Koeman ने भी अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया। इस फैसले के साथ डच राष्ट्रीय टीम के साथ उनका दूसरा कार्यकाल भी समाप्त हो गया।   हार के बाद लिया बड़ा फैसला मोरक्को के खिलाफ मिली हार के बाद कोमैन ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि उन्होंने डच राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पूरी टीम का सपना विश्व कप में इतिहास रचने का था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने हार की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय टीम का कोच होने के नाते यह जिम्मेदारी उनकी भी थी।   दो कार्यकाल में कई उपलब्धियां कोमैन ने पहली बार 2018 में नीदरलैंड्स की कमान संभाली थी और 2020 तक टीम का नेतृत्व किया। इसके बाद 2023 में उन्होंने दोबारा राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच का पद संभाला। उनकी कोचिंग में नीदरलैंड्स ने UEFA Euro 2024 के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इसके अलावा टीम ने यूरो 2021, यूरो 2024 और फीफा विश्व कप 2026 के लिए भी क्वालीफाई किया। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने टीम को 2019 में UEFA Nations League Final तक पहुंचाया था।   परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा कोमैन ने अपने बयान में कहा कि विश्व कप अभियान का इतनी जल्दी समाप्त होना बेहद निराशाजनक है। हालांकि, जब वह पीछे मुड़कर देखेंगे तो उन्हें टीम के साथ बिताए गए शानदार पल और सहयोग हमेशा याद रहेंगे। उन्होंने सभी खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और प्रशंसकों का आभार जताते हुए कहा कि अब वह अपनी पत्नी, बच्चों और पोते-पोतियों के साथ अधिक समय बिताना चाहते हैं। वहीं Royal Dutch Football Association ने भी पुष्टि की कि कोमैन अपना मौजूदा अनुबंध समाप्त होने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ाएंगे।

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डरहम, एजेंसियां। भारत के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मैच के लिए इंग्लैंड ने अपनी प्लेइंग XI का ऐलान कर दिया है। भारतीय समय के अनुसार बुधवार रात 10 बजे डरहम के चेस्टर-ले-स्ट्रीट में खेले जाने वाले इस मैच में इंग्लैंड की प्लेइंग-11 में दो बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।    कप्तान हैरी ब्रूक ने क्या कहा? इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने सीरीज के पहले मैच से पहले कहा कि इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करना ही उनकी एकमात्र प्राथमिकता है। ब्रूक ने कहा, 'मैंने पूरी तरह से इंग्लैंड क्रिकेट के प्रति खुद को समर्पित कर दिया है। मैंने कहा है कि मैं 'द हंड्रेड' के अलावा कोई भी फ्रेंचाइजी क्रिकेट नहीं खेलना चाहता। मैं जो कुछ भी करता हूं, वह इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलने के मकसद से करता हूं। मैदान के अंदर और बाहर मैं जो कुछ भी करता हूं, उसका मकसद इंग्लैंड के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। इसीलिए मैं IPL, PSL या किसी अन्य लीग प्रतियोगिता में नहीं खेलता।'   ब्रूक ने आगे कहा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट न खेलने का मतलब है कि मेरे कैलेंडर में ऐसे समय होते हैं जब मैं कोई मैच नहीं खेल रहा होता. मैं अपनी फिटनेस पर ध्यान देता हूं और तीनों फॉर्मेट में खेलने के लिए तैयार होता हूं, जो बचपन से ही मेरा सपना रहा है। ब्रूक ने टेस्ट कप्तानी को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर कहा कि चाहे मैं टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड का कप्तान बनूं या न बनूं, मुझे बस इंग्लैंड के लिए खेलते रहने में ही खुशी मिलेगी।

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लंदन, एजेंसियां। इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान Ben Stokes ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। उन्होंने बताया कि न्यूज़ीलैंड के खिलाफ तीसरा टेस्ट उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था। इस फैसले से क्रिकेट जगत में हैरानी है और इंग्लैंड क्रिकेट के लिए इसे एक बड़े युग का अंत माना जा रहा है।   कप्तानी का दबाव और लगातार चोटें बनीं वजह   स्टोक्स ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार चोटों, कप्तानी की जिम्मेदारियों और मानसिक-शारीरिक दबाव का उनके करियर पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगता है कि अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने का यही सही समय है।   मैक्कलम ने रोकने की कोशिश की   इंग्लैंड के मुख्य कोच Brendon McCullum ने खुलासा किया कि उन्होंने स्टोक्स को अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन स्टोक्स अपने निर्णय पर अडिग रहे। उन्होंने कहा कि स्टोक्स ने इंग्लैंड क्रिकेट को नई दिशा दी और उनकी कमी टीम को लंबे समय तक महसूस होगी।   हैरी ब्रूक बन सकते हैं नए कप्तान   संन्यास की घोषणा के साथ ही स्टोक्स ने Harry Brook को टेस्ट टीम की कप्तानी के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बताया। हालांकि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने अभी नए कप्तान की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।   शानदार रहा अंतरराष्ट्रीय करियर   बेन स्टोक्स ने अपने करियर में इंग्लैंड को कई यादगार जीत दिलाईं। वे टेस्ट क्रिकेट में 7,000 से अधिक रन और 250 से ज्यादा विकेट लेने वाले दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडरों में शामिल हैं। 2019 विश्व कप फाइनल और कई ऐतिहासिक टेस्ट जीतों में उनकी भूमिका हमेशा इंग्लैंड के लिए याद रखी जाएगी।

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