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Sangram Singh: First Indian MMA Winner in Argentina

संग्राम सिंह ने रचा इतिहास: अर्जेंटीना में MMA जीत दर्ज करने वाले पहले भारतीय बने

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Sangram Singh celebrates historic MMA victory in Buenos Aires against Florian Coudiere.
Sangram Singh MMA Victory Argentina 2026

भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) जगत के दिग्गज संग्राम सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए इतिहास रच दिया है। उन्होंने ब्यूनस आयर्स में आयोजित मुकाबले में जीत दर्ज कर अर्जेंटीना की धरती पर प्रोफेशनल MMA फाइट जीतने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया।

1 मिनट 45 सेकंड में खत्म की फाइट

संग्राम सिंह ने फ्रांस के फाइटर फ्लोरियन कौडियर के खिलाफ यह मुकाबला बेहद शानदार अंदाज में जीता।

  • मुकाबला: टाइग्रे स्पोर्ट्स क्लब, ब्यूनस आयर्स
  • समय: मात्र 1 मिनट 45 सेकंड
  • परिणाम: चोकहोल्ड के जरिए जीत

फाइट की शुरुआत में फ्लोरियन ने आक्रामक रुख अपनाया और तेज किक से दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।

कुश्ती के दांव से पलटा मुकाबला

जैसे ही फ्लोरियन ने किक लगाई, संग्राम सिंह ने शानदार फुर्ती दिखाते हुए हवा में ही उसका पैर पकड़ लिया और तुरंत उन्हें जमीन पर गिरा दिया।

इसके बाद संग्राम ने अपनी कुश्ती की बेहतरीन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए:

  • प्रतिद्वंद्वी को कंट्रोल किया
  • मजबूत पकड़ बनाते हुए चोकहोल्ड लगाया
  • फ्लोरियन को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया

रेफरी के कई बार जांचने के बाद अंततः फ्रांसीसी फाइटर को हार माननी पड़ी।

लगातार तीसरी अंतरराष्ट्रीय जीत

यह जीत संग्राम सिंह की लगातार तीसरी अंतरराष्ट्रीय सफलता है। इससे पहले भी वे:

  • त्बिलिसी
  • एम्स्टर्डम

में जीत दर्ज कर चुके हैं। यह उपलब्धि उनके बढ़ते कद और अंतरराष्ट्रीय MMA में भारत की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है।

भारत के लिए गर्व का क्षण

संग्राम सिंह की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय फाइटर्स अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी ताकत और तकनीक का लोहा मनवा रहे हैं।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में एक बेहद रोमांचक मुकाबले में Lucknow Super Giants ने शानदार वापसी करते हुए Sunrisers Hyderabad को हराकर सीजन की पहली जीत दर्ज की। इस जीत के हीरो रहे कप्तान Rishabh Pant, जिन्होंने आखिरी ओवर में शानदार बल्लेबाजी कर टीम को जीत तक पहुंचाया। आखिरी ओवर का रोमांच और पंत का धमाका 157 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए LSG की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए, लेकिन कप्तान पंत एक छोर पर डटे रहे। आखिरी ओवर में जब जीत के लिए रन चाहिए थे, तब पंत ने गेंदबाज जयदेव उनादकट पर लगातार तीन चौके जड़कर मैच खत्म कर दिया। उन्होंने 52 गेंदों में नाबाद 68 रन की पारी खेली, जो दबाव में खेली गई एक कप्तानी पारी थी। भावुक हो गए संजीव गोयनका जैसे ही पंत ने विनिंग शॉट लगाया, कैमरे Sanjiv Goenka की ओर मुड़ गए। टीम के मालिक गोयनका इस जीत से इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने अपने सीने पर हाथ रखा और भावनाओं को छिपा नहीं सके। मैच खत्म होने के बाद वह मैदान पर पहुंचे और पंत को गले लगाकर उनकी शानदार पारी के लिए बधाई दी। आलोचनाओं के बीच जवाब इस मैच से पहले दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ हार के बाद गोयनका और पंत के बीच बातचीत को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं। हालांकि, टीम ने बाद में साफ किया कि वह सिर्फ एक सामान्य बातचीत थी और सब कुछ ठीक है। इस शानदार जीत के साथ LSG ने यह साबित कर दिया कि टीम दबाव में भी वापसी करना जानती है और कप्तान पंत एक बार फिर मैच विनर बनकर उभरे हैं।  

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धोनी के बाहर होते ही CSK का ऐतिहासिक फैसला: IPL के 19 साल में पहली बार ऐसा प्रयोग

Indian Premier League 2026 सीजन में Chennai Super Kings ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। MS Dhoni के टीम से बाहर होते ही चेन्नई ने अपनी प्लेइंग इलेवन में बड़ा बदलाव करते हुए इतिहास रच दिया। पहली बार सिर्फ 2 विदेशी खिलाड़ियों के साथ उतरी CSK पंजाब के खिलाफ मुकाबले में CSK ने अपनी प्लेइंग इलेवन में केवल दो विदेशी खिलाड़ियों को शामिल किया। IPL इतिहास में यह पहला मौका है जब चेन्नई ने इतनी कम विदेशी खिलाड़ियों के साथ मैदान में कदम रखा। 19 सीजन और 1154 से अधिक मैचों के इतिहास में यह सिर्फ सातवीं बार हुआ है जब किसी टीम ने दो या उससे कम विदेशी खिलाड़ियों को खिलाया हो। इस मामले में Mumbai Indians ही एकमात्र टीम रही है जिसने ऐसा एक से ज्यादा बार किया है। रुतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में बड़ा प्रयोग Ruturaj Gaikwad की कप्तानी में CSK ने टीम कॉम्बिनेशन में बड़ा बदलाव किया। प्रशांत वीर को मौका दिया गया Rahul Chahar को फ्रेंचाइजी डेब्यू मिला विदेशी खिलाड़ियों की जगह भारतीय युवाओं पर भरोसा दिखाया गया इस फैसले के साथ CSK ने 9 भारतीय खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतरकर एक नई रणनीति अपनाई। युवाओं पर दांव, अनुभव की कमी इस मैच में CSK की प्लेइंग इलेवन में 21 साल से कम उम्र के चार खिलाड़ी शामिल थे जो अपने आप में एक दुर्लभ स्थिति है। यह दिखाता है कि टीम भविष्य को ध्यान में रखते हुए युवा खिलाड़ियों को मौके दे रही है। धोनी और रैना दोनों बाहर-दूसरी बार बना संयोग यह IPL इतिहास का सिर्फ दूसरा मौका है जब MS Dhoni और Suresh Raina दोनों प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। इससे पहले ऐसा केवल एक बार हुआ था। बदलाव की वजह क्या? CSK के इस बड़े फैसले के पीछे चोटें सबसे बड़ी वजह हैं। धोनी फिटनेस के कारण बाहर डेवाल्ड ब्रेविस साइड स्ट्रेन से जूझ रहे नाथन एलिस टूर्नामेंट से बाहर स्पेंसर जॉनसन भी चोटिल इन परिस्थितियों में टीम को मजबूरी में नए कॉम्बिनेशन के साथ उतरना पड़ा। क्या यह रणनीति सफल होगी? हालांकि यह फैसला ऐतिहासिक जरूर है, लेकिन लगातार हार के चलते टीम पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि युवा खिलाड़ियों पर लगाया गया यह दांव CSK को जीत दिला पाता है या नहीं।  

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