टेक्नोलॉजी

Vivo T5 Pro 5G India Sale Begins

9020mAh बैटरी के साथ Vivo T5 Pro 5G की सेल शुरू, ₹3000 तक सस्ता मिल रहा दमदार स्मार्टफोन

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Vivo T5 Pro 5G smartphone with large display and massive 9020mAh battery showcased in store
Vivo T5 Pro 5G Launch Smartphone

नई दिल्ली: Vivo ने अपने लेटेस्ट स्मार्टफोन Vivo T5 Pro 5G की भारत में पहली सेल शुरू कर दी है। कंपनी के T-सीरीज के इस नए डिवाइस को बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और पावरफुल परफॉर्मेंस के साथ पेश किया गया है। पहली सेल में ग्राहकों को ₹3000 तक का डिस्काउंट भी मिल रहा है।

कीमत और ऑफर्स

Vivo T5 Pro 5G तीन वेरिएंट में उपलब्ध है:

  • 8GB + 128GB: ₹29,999
  • 8GB + 256GB: ₹33,999
  • 12GB + 256GB: ₹39,999

HDFC, SBI और Axis बैंक कार्ड्स के साथ:

  • बेस वेरिएंट पर ₹2000 तक की छूट
  • अन्य वेरिएंट्स पर ₹3000 तक का डिस्काउंट

फोन की बिक्री Flipkart, Vivo की आधिकारिक वेबसाइट और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू हो चुकी है।

डिस्प्ले और डिजाइन

  • 6.8-इंच 1.5K AMOLED डिस्प्ले
  • 144Hz रिफ्रेश रेट
  • 5000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस
  • स्लिम डिजाइन, वजन 213 ग्राम

यह सेटअप गेमिंग और वीडियो देखने के अनुभव को स्मूद बनाता है।

कैमरा फीचर्स

  • 50MP प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट)
  • 2MP पोर्ट्रेट सेंसर
  • 32MP फ्रंट कैमरा
  • फ्रंट और रियर दोनों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग

परफॉर्मेंस

  • Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर
  • 12GB तक RAM और 256GB स्टोरेज
  • वेपर कूलिंग सिस्टम

यह फोन मल्टीटास्किंग और हैवी गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

बैटरी और चार्जिंग

इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9020mAh बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है।

  • 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट
  • बेहतर बैटरी हेल्थ मैनेजमेंट

सॉफ्टवेयर

  • Android 16 पर आधारित सिस्टम
  • लंबे समय तक सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग डिवाइस नहीं, बल्कि हमारी बैंकिंग, सोशल मीडिया और निजी जिंदगी का पूरा केंद्र बन चुका है। लेकिन अगर आपका फोन लंबे समय से अपडेट नहीं हुआ है, तो यह आपकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। क्या होता है “Expired Smartphone”? जब किसी फोन को कंपनी सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट देना बंद कर देती है, तो उसे “Expired” माना जाता है। फोन चलता रहता है, लेकिन उसकी सुरक्षा धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है। क्यों है खतरनाक? बिना अपडेट वाले फोन में सिक्योरिटी खामियां बनी रहती हैं हैकर्स इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर फोन में घुस सकते हैं आपका डेटा, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी जोखिम में आ जाती है हैकर्स कैसे करते हैं हमला? एक बार फोन में सेंध लगने के बाद हैकर्स: सोशल मीडिया अकाउंट एक्सेस कर सकते हैं कैमरा और माइक्रोफोन कंट्रोल कर सकते हैं OTP पढ़कर बैंक अकाउंट खाली कर सकते हैं सबसे खतरनाक बात–आपको पता भी नहीं चलता और नुकसान हो जाता है। किसे ज्यादा खतरा? 3–4 साल पुराने फोन यूज करने वाले लोग जिनके फोन में लंबे समय से अपडेट नहीं आया बजट और मिड-रेंज डिवाइस यूजर्स कैसे बचें इस खतरे से? फोन का सॉफ्टवेयर नियमित अपडेट करें अगर अपडेट बंद हो गया है, तो नया फोन लेने पर विचार करें सिर्फ भरोसेमंद ऐप्स इंस्टॉल करें अनजान लिंक और फाइल्स से दूर रहें सिक्योरिटी ऐप या एंटीवायरस का इस्तेमाल करें

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चीन की दिग्गज टेक कंपनी Xiaomi ने अपने स्मार्ट होम पोर्टफोलियो को और मजबूत करते हुए नया प्रीमियम रेफ्रिजरेटर Xiaomi Mijia Refrigerator Pro Premium Cross-Door 508L लॉन्च किया है। यह फ्रिज एडवांस टेक्नोलॉजी, बड़ी स्टोरेज और स्मार्ट फीचर्स के साथ आता है, जिसे खासतौर पर मॉडर्न किचन जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। कीमत और उपलब्धता कंपनी ने इस फ्रिज की कीमत करीब 9999 युआन (लगभग 1.3–1.4 लाख रुपये) रखी है। फिलहाल इसे चीन में लॉन्च किया गया है और यह Ice Crystal White, Star Silver और Apricot Glass जैसे प्रीमियम कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। 508 लीटर की बड़ी स्टोरेज इस फ्रिज में कुल 508 लीटर कैपेसिटी मिलती है, जिसमें: 297L फ्रिज सेक्शन 35L वैरिएबल टेम्परेचर जोन 176L फ्रीजर अलग-अलग स्टोरेज जोन होने से खाने-पीने की चीजों को व्यवस्थित तरीके से रखना आसान हो जाता है।  डुअल कूलिंग सिस्टम इसमें डुअल कूलिंग टेक्नोलॉजी दी गई है, जिसमें फ्रिज और फ्रीजर के लिए अलग-अलग सिस्टम काम करते हैं। स्मेल मिक्स नहीं होती टेम्परेचर ज्यादा स्थिर रहता है खाने की फ्रेशनेस लंबे समय तक बनी रहती है  एडवांस हाइजीन और प्योरिफिकेशन फ्रिज में Ion Purification 4.0 टेक्नोलॉजी दी गई है, जो: बदबू को तेजी से खत्म करती है बैक्टीरिया, फंगस और वायरस को खत्म करने में मदद करती है सिल्वर आयन एंटीबैक्टीरियल प्रोटेक्शन भी मिलता है  55 मिनट में आइस मेकिंग इसमें ऑटोमैटिक आइस मेकिंग सिस्टम दिया गया है, जो: लगभग 55 मिनट में बर्फ तैयार करता है पानी और आइस स्टोरेज के लिए स्मार्ट अलर्ट देता है  स्मार्ट फीचर्स और कनेक्टिविटी HyperOS Connect सपोर्ट इनबिल्ट स्मार्ट डिस्प्ले मोबाइल के जरिए कंट्रोल की सुविधा केवल 31dB नॉइज लेवल, यानी बेहद शांत ऑपरेशन

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  OTT ऐप्स सपोर्ट और स्मार्ट फीचर्स के साथ बजट में बड़ा एंटरटेनमेंट नई दिल्ली: BoAt ने भारतीय बाजार में अपने पहले मिनी प्रोजेक्टर लॉन्च कर दिए हैं। कंपनी ने CineHead M1 और CineHead E1 नाम से दो नए मॉडल पेश किए हैं, जो कम कीमत में बड़े स्क्रीन का अनुभव देने का दावा करते हैं। इन प्रोजेक्टर की खासियत यह है कि ये घर की दीवार को 150 इंच तक के स्मार्ट स्क्रीन में बदल सकते हैं, जिससे यूजर्स को घर बैठे थिएटर जैसा अनुभव मिलेगा। स्मार्ट फीचर्स से लैस दोनों मॉडल CineHead M1 और CineHead E1 दोनों ही एंड्रॉयड बेस्ड स्मार्ट इंटरफेस पर काम करते हैं। इनमें Netflix, Prime Video और YouTube जैसे लोकप्रिय OTT ऐप्स पहले से ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा Wi-Fi, Bluetooth और HDMI जैसे जरूरी कनेक्टिविटी ऑप्शन भी दिए गए हैं, जिससे यूजर्स आसानी से अपने फोन या लैपटॉप को कनेक्ट कर सकते हैं। मॉडल्स के फीचर्स में क्या अंतर? CineHead M1 में फुल HD पिक्चर क्वालिटी, ऑटो फोकस, 6W स्पीकर और वायरलेस स्क्रीन मिररिंग जैसे एडवांस फीचर्स मिलते हैं। वहीं CineHead E1 में Android 13 इंटरफेस, OTT सपोर्ट और Wi-Fi, HDMI, USB, AUX जैसे मल्टीपल कनेक्टिविटी ऑप्शन दिए गए हैं। यह मॉडल बजट यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। घर बैठे मिलेगा 150 इंच स्क्रीन का मजा BoAt का दावा है कि इन प्रोजेक्टर के जरिए 150 इंच तक का बड़ा डिस्प्ले तैयार किया जा सकता है। यानी IPL मैच, फिल्म या वेब सीरीज देखने का अनुभव अब घर पर ही बड़े पर्दे जैसा हो सकता है। किसके लिए है यह प्रोडक्ट? यह मिनी प्रोजेक्टर खास तौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जो कम बजट में बड़ा स्क्रीन एक्सपीरिएंस चाहते हैं। स्टूडेंट्स, फैमिली यूजर्स और छोटे ऑफिस सेटअप के लिए यह एक किफायती और उपयोगी विकल्प हो सकता है। क्या है कीमत और कहां मिलेगा? CineHead M1 की कीमत ₹10,999 रखी गई है, जबकि CineHead E1 सिर्फ ₹7,499 में उपलब्ध है। दोनों मॉडल्स को Amazon India के जरिए खरीदा जा सकता है।  

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