दुनिया

US-Iran Talks Stall After Islamabad Meeting

Iran–US Tension: ‘गेंद अब ईरान के पाले में’, इस्लामाबाद वार्ता के बाद बोले वेंस

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
JD Vance speaking on Iran-US nuclear talks after Islamabad negotiations amid rising Middle East tensions
JD Vance Iran-US Islamabad Talks Statement

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच J. D. Vance ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि Islamabad में हुई शांति वार्ता में “अच्छी प्रगति” हुई है, लेकिन अब अगला कदम Tehran को उठाना होगा। वेंस ने साफ कहा–“गेंद अब ईरान के पाले में है।”

21 घंटे चली वार्ता, लेकिन समझौता नहीं

अमेरिका और Iran के बीच वीकेंड पर इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली लंबी बातचीत किसी ठोस समझौते पर खत्म नहीं हो सकी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान ने न्यूक्लियर फ्यूल एनरिचमेंट रोकने की शर्त मानने से इनकार कर दिया।

‘सही दिशा में बढ़ी बातचीत’

Fox News को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि हालात बिगड़े नहीं हैं, बल्कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी है।
उन्होंने कहा:

  • “कुछ पॉजिटिव संकेत मिले हैं”
  • “सामने वाला पक्ष भी आगे बढ़ा”
  • “हालांकि, उम्मीद के मुताबिक प्रगति नहीं हुई”

न्यूक्लियर एम्बिशन पर अमेरिका सख्त

वेंस ने जोर देकर कहा कि अगर ईरान अपने न्यूक्लियर एम्बिशन पर अमेरिका की शर्तें मान लेता है, तो दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता संभव है।
उन्होंने कहा, “क्या हम आगे बातचीत करेंगे? क्या समझौता होगा? यह अब ईरान पर निर्भर करता है।”

क्यों रुकी बातचीत?

वेंस के मुताबिक, ईरानी डेलिगेशन के पास अंतिम फैसला लेने का अधिकार नहीं था।
उन्होंने कहा:

  • “टीम को तेहरान लौटना पड़ा”
  • “अंतिम मंजूरी के लिए शीर्ष नेतृत्व से सहमति जरूरी है”

किन नेताओं ने लिया हिस्सा?

इस हाई-लेवल वार्ता में दोनों देशों के बड़े नेता शामिल हुए:

  • अमेरिका की ओर से: J. D. Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner
  • ईरान की ओर से: Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi

आगे क्या?

इस्लामाबाद वार्ता के बाद अब नजरें तेहरान पर हैं। अगर ईरान अमेरिका की शर्तों पर नरमी दिखाता है, तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। फिलहाल, कूटनीतिक हल की उम्मीद कायम है, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

दुनिया

View more
Philippines Earthquake
फिलीपींस में भूकंप के बाद बढ़ा संकट, मृतकों की संख्या 45 पहुंची

मनीला, एजेंसियां। दक्षिणी फिलीपींस के मिंडानाओ क्षेत्र में 8 जून को आए विनाशकारी 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। भूकंप के बाद अब तक 2100 से अधिक आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटके) दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है। अधिकारियों के अनुसार इस आपदा में अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 630 लोग घायल हुए हैं। वहीं 17 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।   आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई मुश्किलें फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान के मुताबिक, कई आफ्टरशॉक्स की तीव्रता 6.4 तक दर्ज की गई है। लगातार आ रहे झटकों के कारण बचावकर्मियों को कई बार अपने अभियान रोकने पड़े हैं। एक क्षतिग्रस्त किराना भवन में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान आए तेज झटके के बाद टीम को तुरंत बाहर निकलना पड़ा। सुरक्षा कारणों से कई इमारतों में राहत कार्य फिलहाल रोक दिया गया है।   हजारों लोग बेघर, राहत शिविरों में शरण भूकंप के बाद लगभग 25 हजार लोग विस्थापित हो गए हैं और सरकारी राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि कई लोग मानसिक आघात और लगातार आ रहे झटकों के कारण अपने घरों में लौटने से डर रहे हैं।   बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान आपदा में 3,100 से अधिक घर, 29 सड़कें, 11 पुल और 100 से ज्यादा सरकारी भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। जनरल सैंटोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को भी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण उसे अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। हालांकि राहत सामग्री और सरकारी विमानों को संचालन की अनुमति दी गई है।   समुद्री इलाकों में भी तबाही भूकंप के बाद उठी ऊंची लहरों से तटीय क्षेत्रों में भी भारी नुकसान हुआ। कई लोग समुद्र में बह गए, जिनमें कुछ को बचा लिया गया है, जबकि कई अब भी लापता हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह भूकंप कोटाबाटो ट्रेंच में भूगर्भीय गतिविधियों के कारण आया और इसे फिलीपींस के हालिया इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक माना जा रहा है।

abhishek singh जून 10, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi with French and Slovak leaders during Europe visit and G7 Summit engagements.

यूरोप दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, पहली बार स्लोवाकिया की करेंगे यात्रा; G-7 शिखर सम्मेलन में भी लेंगे हिस्सा

Indian-origin businessman facing US denaturalization proceedings amid immigration fraud investigation.

भारतीय मूल के CEO पर अमेरिकी नागरिकता खोने का खतरा, ट्रंप प्रशासन के 'डी-नेचुरलाइजेशन' अभियान में शामिल नाम

United Nations Security Council meeting discussing terrorism sanctions and international security issues.

UNSC में पाकिस्तान-चीन को झटका, BLA को ब्लैकलिस्ट कराने की कोशिश पर अमेरिका ने लगाई रोक

Indian Army K-9 Vajra self-propelled howitzer during field deployment and artillery firing exercise.
भारतीय सेना का बड़ा आधुनिकीकरण अभियान, 23,000 करोड़ रुपये में 300 अतिरिक्त K-9 वज्र तोपें खरीदने की तैयारी

  भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 300 अतिरिक्त K-9 वज्र-टी स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत लगभग 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। यदि इस परियोजना को स्वीकृति मिलती है, तो यह भारतीय सेना के हालिया वर्षों के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में शामिल होगी। नई तोपों की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगने वाली सीमाओं पर की जाएगी, जिससे दोनों मोर्चों पर सेना की फायरपावर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एलएंडटी को मिल सकता है निर्माण का जिम्मा रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इसका निर्माण कार्य लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिल सकता है। कंपनी दक्षिण कोरिया की रक्षा निर्माता कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से भारत में K-9 वज्र-टी का निर्माण करती है। नई खरीद के बाद भारतीय सेना के लिए ऑर्डर की गई K-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सेना की परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारी को मजबूती मिलेगी। बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर सेना का फोकस हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली प्रणालियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में मोबाइल और तेज प्रतिक्रिया देने वाली तोप प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। इसी रणनीति के तहत सेना ऐसी प्रणालियों को प्राथमिकता दे रही है, जो विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकें। क्या है K-9 वज्र की खासियत? K-9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप प्रणाली है। यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी "शूट एंड स्कूट" क्षमता है। यानी यह लक्ष्य पर गोले दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाव आसान हो जाता है। इसके अलावा यह बख्तरबंद सुरक्षा से लैस है और रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से संचालन कर सकती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक युद्ध प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। 2017 में हुआ था पहला सौदा भारत ने K-9 वज्र तोपों के लिए पहला बड़ा अनुबंध वर्ष 2017 में किया था। उस समय 100 तोपों की खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इनकी आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई थी। बाद में इन तोपों को मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा से लगे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया, जहां इनके प्रदर्शन को सकारात्मक माना गया। 2023 में मिला दूसरा ऑर्डर K-9 वज्र की परिचालन सफलता को देखते हुए दिसंबर 2023 में भारतीय सेना ने 100 अतिरिक्त तोपों की खरीद को मंजूरी दी थी। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 7,600 करोड़ रुपये थी। इस निर्णय ने स्पष्ट संकेत दिया कि सेना भविष्य की युद्ध रणनीति में इस प्रणाली को महत्वपूर्ण भूमिका देती है। लद्दाख में भी सफल रहे परीक्षण हाल ही में K-9 वज्र के संशोधित शीतकालीन संस्करण का परीक्षण लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किया गया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, बेहद कम तापमान और कठिन परिस्थितियों में भी इस प्रणाली का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। परीक्षण के सफल परिणामों के बाद उत्तरी सीमाओं पर अतिरिक्त K-9 वज्र इकाइयों की तैनाती की योजना को और बल मिला है। तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा प्रस्तावित खरीद भारतीय सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। सेना समानांतर रूप से एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप और उन्नत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम जैसी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेना भविष्य के किसी भी संघर्ष में तेजी से, सटीक और लगातार फायरपावर उपलब्ध कराने में पहले से अधिक सक्षम होगी।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Afghan civilians inspect damage after alleged Pakistani airstrikes in border provinces amid rising tensions.

पाकिस्तान पर अफगानिस्तान का बड़ा आरोप, हवाई हमलों में 13 लोगों की मौत; सीमा पर फिर बढ़ा तनाव

Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.

अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

London high-rise apartment building linked to tragic death of Indian-origin family under police investigation.

लंदन में भारतीय मूल के परिवार की दर्दनाक मौत, 36वीं मंजिल से गिरकर दंपती और बेटे की जान गई

Nepal Prime Minister Balen Shah with Sudan Gurung and Mahabir Pun during cabinet expansion announcement in Kathmandu.
बालेन सरकार का कैबिनेट विस्तार: सुदन गुरुंग फिर संभालेंगे गृह मंत्रालय, पहली बार बनेगा विज्ञान एवं नवाचार मंत्रालय

  काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह (बालेन) अपनी सरकार का विस्तार करने जा रहे हैं। मंत्रिपरिषद में दो नए चेहरों को शामिल किए जाने की तैयारी है। पूर्व गृह मंत्री सुदन गुरुंग एक बार फिर गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि सामाजिक नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में चर्चित नाम महावीर पुन को नवगठित विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्रालय का पहला मंत्री बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं का शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार को राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में आयोजित किया जाएगा। सुदन गुरुंग की सरकार में वापसी सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद सुदन गुरुंग की मंत्रिमंडल में वापसी का रास्ता साफ हो गया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में समिति की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई, जिसमें गुरुंग को उनके खिलाफ लगे आरोपों से राहत मिली है। गौरतलब है कि अप्रैल में सुदन गुरुंग ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच का सामना कर रहे कारोबारी दीपक भट्ट से जुड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखने के आरोप लगे थे। दस्तावेजों में उनके नाम पर कुछ माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों के शेयर होने की बात सामने आई थी, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। आरोपों पर पहले ही दे चुके थे सफाई सुदन गुरुंग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने अपनी संपत्तियों से जुड़ी कोई जानकारी नहीं छिपाई। उनका कहना था कि संबंधित कंपनियों के शेयर उन्होंने मंत्री बनने से पहले खरीदे थे और वे उनकी घोषित संपत्तियों का हिस्सा थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि किसी कंपनी में शेयरधारक होने का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी से जुड़े हर व्यक्ति या कारोबारी गतिविधि से उनका प्रत्यक्ष संबंध है। पहली बार बनेगा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्रालय कैबिनेट विस्तार का दूसरा बड़ा आकर्षण महावीर पुन की एंट्री मानी जा रही है। नेपाल सरकार ने हाल ही में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत मंत्रालयों की संख्या 25 से घटाकर 18 कर दी थी। इसी प्रक्रिया में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया है। महावीर पुन लंबे समय से नेपाल में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अलग मंत्रालय की मांग करते रहे हैं। अब उन्हें इस नए मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने की तैयारी है। जेन-जी आंदोलन के बाद उभरे थे गुरुंग सुदन गुरुंग सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन के बाद राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुखता से उभरे थे। उन्होंने मार्च में गोरखा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया और बाद में गृह मंत्री बनाए गए। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि बाद में उन पर हितों के टकराव को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। प्रशासनिक सुधारों पर बालेन सरकार का फोकस विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार और मंत्रालयों के पुनर्गठन के जरिए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह अपनी सरकार को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की कोशिश कर रहे हैं। विज्ञान एवं नवाचार मंत्रालय का गठन नेपाल की तकनीकी और अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुदन गुरुंग की वापसी और महावीर पुन की एंट्री के साथ बालेन सरकार अब प्रशासनिक सुधार, तकनीकी विकास और सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में दिखाई दे रही है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Russian and Pakistani officials sign security cooperation agreements during SCO meeting in Bishkek, Kyrgyzstan.

भारत के दोस्त रूस ने पाकिस्तान के साथ किए दो अहम समझौते, SCO बैठक में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति

US Apache attack helicopter near the Strait of Hormuz after crash, crew rescued safely during military operation.

होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर क्रैश, चालक दल सुरक्षित; हादसे की वजह की जांच जारी

Japan Mango

जापान के बाद नेपाल ने भी भारतीय आम पर रोक लगाई, ज्यादा कीटनाशक मिलने का दावा

0 Comments

Top week

Jamshid Ghomi accused of exporting sensitive US technology to Iran in sanctions case
दुनिया

अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

Deepshikha जून 4, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?