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Modi Starts 5-Nation Foreign Tour

UAE से शुरू होगा पीएम मोदी का 5 देशों का दौरा, UAE से होगी यात्रा की शुरुआत

surbhi मई 12, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi begins five-nation diplomatic tour starting from UAE amid global geopolitical tensions
PM Modi Five Nation Tour

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच Narendra Modi 15 मई से छह दिनों के विदेश दौरे पर निकलेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री United Arab Emirates, Netherlands, Sweden, Norway और Italy का दौरा करेंगे।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के रणनीतिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत करना माना जा रहा है।

UAE से होगी यात्रा की शुरुआत

प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे की शुरुआत यूएई से करेंगे, जहां उनकी मुलाकात Mohamed bin Zayed Al Nahyan से होगी।

दोनों नेताओं के बीच:

  • ऊर्जा सहयोग
  • व्यापार और निवेश
  • पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति
  • भारतीय समुदाय के हित

जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साथ ही वहां 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, इसलिए प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में रहेंगे।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूएई को यात्रा का पहला पड़ाव बनाना भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

नीदरलैंड में टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन पर फोकस

यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड के दौरे पर रहेंगे। यह 2017 के बाद उनकी दूसरी यात्रा होगी।

इस दौरान उनकी मुलाकात:

  • Willem-Alexander
  • Máxima Zorreguieta
  • Rob Jetten

से होगी।

इस यात्रा में रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।

भारत और यूरोप के बीच सप्लाई चेन और हाई-टेक सहयोग को मजबूत करना भी इस दौरे का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

स्वीडन में AI और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा

17 से 18 मई तक पीएम मोदी स्वीडन के दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा Ulf Kristersson के निमंत्रण पर हो रही है।

दोनों देशों के बीच जिन क्षेत्रों पर चर्चा होगी, उनमें:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • ग्रीन ट्रांजिशन
  • स्टार्टअप
  • रक्षा और अंतरिक्ष
  • क्लाइमेट चेंज
  • उभरती तकनीक

शामिल हैं।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी और क्रिस्टर्सन, Ursula von der Leyen के साथ “European Round Table for Industry” को भी संबोधित करेंगे।

नॉर्वे में नॉर्डिक समिट

18 से 19 मई तक प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा होगी।

इस दौरान मोदी मुलाकात करेंगे:

  • Harald V
  • Sonja of Norway
  • Jonas Gahr Støre

से।

इस यात्रा में व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और ब्लू इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री मोदी भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे।

इटली दौरे के साथ होगा समापन

अपने दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 19 से 20 मई तक इटली जाएंगे। यह यात्रा Giorgia Meloni के निमंत्रण पर हो रही है।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी:

  • Sergio Mattarella से मुलाकात करेंगे
  • प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे

भारत और इटली के बीच रक्षा, व्यापार, निवेश और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर बातचीत होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली गए थे।

क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा?

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह दौरा भारत और यूरोप के बीच साझेदारी को नई मजबूती देगा।

ऐसे समय में जब:

  • मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा हुआ है
  • वैश्विक सप्लाई चेन दबाव में है
  • ऊर्जा सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनी हुई है
  • यूरोप नई आर्थिक साझेदारियां तलाश रहा है

भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ट्रंप को सीनेट में बड़ी राहत: ईरान पर राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियां सीमित करने वाला प्रस्ताव गिरा, दो रिपब्लिकन सांसदों ने बदला रुख

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होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव: ओमान के पास मालवाहक जहाज पर हमला, UN एजेंसी ने रोका निकासी अभियान

  Ship Attack in Hormuz Strait: मध्य पूर्व में हालात सामान्य होने की उम्मीदों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास सिंगापुर के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर कथित हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने खाड़ी क्षेत्र से फंसे जहाजों की निकासी का अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है। घटना के बाद समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। ओमान के पास मालवाहक जहाज पर हमला ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UK Maritime Trade Operations (UKMTO) के अनुसार, सिंगापुर के झंडे वाला मालवाहक जहाज एवर लवली (Ever Lovely) ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास गुजर रहा था, तभी उस पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। हमले में हुए नुकसान और हताहतों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को तय समुद्री मार्गों का पालन करने की चेतावनी दे चुका था। IMO ने सुरक्षा समीक्षा तक रोका निकासी अभियान हमले के बाद इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने खाड़ी क्षेत्र से फंसे जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकालने का अपना स्वैच्छिक अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है। IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने कहा कि अभियान को तब तक रोका गया है, जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि निकासी सूची में शामिल सभी जहाजों और पूरे क्षेत्र में मौजूद अन्य पोतों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह उसके निकासी अभियान का हिस्सा नहीं था। दो वैकल्पिक समुद्री मार्ग बनाए गए थे IMO ने खाड़ी क्षेत्र से जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए दो वैकल्पिक समुद्री मार्ग निर्धारित किए थे। इनमें एक मार्ग ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरता था, जबकि दूसरा ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर। इस पूरी प्रक्रिया पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए था। लेकिन ताजा हमले के बाद इन दोनों मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। ईरान ने दोहराया अपना रुख ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन व्यवस्था पर उसका नियंत्रण जारी रहेगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि केवल तेहरान द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों पर ही सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दी जा सकती है। संगठन ने चेतावनी दी कि निर्धारित रास्तों का पालन नहीं करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे (Ambrey) ने भी दावा किया कि गुरुवार को IRGC ने पनामा के झंडे वाले दो जहाजों को अपना मार्ग बदलने के निर्देश दिए। तेल बाजार में दिखा तत्काल असर हमले की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कुल समुद्री तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुजरता है। युद्धविराम के बाद बढ़ रही थी जहाजों की आवाजाही ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी थी। समुद्री डेटा फर्म Lloyd's List Intelligence के अनुसार, पिछले सप्ताह इस मार्ग से 125 जहाज गुजरे, जबकि उससे पहले केवल 33 जहाजों ने इस रास्ते का इस्तेमाल किया था। बुधवार को 78 जहाजों की आवाजाही युद्ध शुरू होने के बाद का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा रही। ताजा हमले के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री यातायात की रफ्तार एक बार फिर प्रभावित हो सकती है। अमेरिका ने जताया भरोसा अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। उनके अनुसार, पिछले 24 घंटों में इस मार्ग से करीब 2 करोड़ बैरल तेल का परिवहन हुआ, जो संघर्ष से पहले के स्तर के करीब माना जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
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Zohran Mamdani celebrates as all three Democratic primary candidates he endorsed win key races in New York.
न्यूयॉर्क की राजनीति में बड़ा उलटफेर: जोहरान ममदानी बने 'किंगमेकर', समर्थित तीनों उम्मीदवारों की धमाकेदार जीत

  New York Democratic Primary: न्यूयॉर्क की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में भले ही जोहरान ममदानी खुद चुनाव मैदान में नहीं थे, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद वह सबसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे हैं। उनके समर्थन वाले तीनों उम्मीदवारों ने अपने-अपने मुकाबले में जीत दर्ज की है। इन नतीजों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर ममदानी की राजनीतिक पकड़ और मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक अब उन्हें पार्टी का नया 'किंगमेकर' बता रहे हैं। ममदानी समर्थित उम्मीदवारों में ब्रैड लैंडर ने मौजूदा सांसद डैन गोल्डमैन को हराया। वहीं क्लेयर वाल्डेज ने ब्रुकलिन बरो प्रेसिडेंट एंटोनियो रेनोसो को मात दी। तीसरे मुकाबले में डारियालिजा एविला शेवेलियर ने अनुभवी नेता एड्रियानो एस्पाइलाट को हराकर सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया। चूंकि इन सीटों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का मजबूत आधार है, इसलिए नवंबर में होने वाले आम चुनाव में इन उम्मीदवारों की जीत की संभावना भी काफी अधिक मानी जा रही है. ममदानी बोले- यह सिर्फ शुरुआत है तीनों उम्मीदवारों की जीत के बाद जोहरान ममदानी ने कहा कि उनकी राजनीतिक सफलता कोई संयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साल की जीत केवल एक शुरुआत थी और अब उनकी राजनीतिक विचारधारा व्यापक स्तर पर स्वीकार की जा रही है। ममदानी ने कहा कि उनका संगठन केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों को भी आगे बढ़ा रहा है जो आम लोगों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। तीनों मुकाबलों में कैसे बदला राजनीतिक समीकरण? ब्रैड लैंडर ने डैन गोल्डमैन को दी मात सबसे चर्चित मुकाबला लोअर मैनहट्टन और ब्रुकलिन सीट पर हुआ, जहां ब्रैड लैंडर ने मौजूदा सांसद डैन गोल्डमैन को हराया। चुनाव प्रचार के दौरान लैंडर ने खुद को अधिक प्रगतिशील उम्मीदवार के रूप में पेश किया। ममदानी ने खुलकर उनके समर्थन में प्रचार किया, जिसका चुनाव परिणाम पर असर देखने को मिला। क्लेयर वाल्डेज ने पलट दिया मुकाबला ब्रुकलिन और क्वींस की सीट पर क्लेयर वाल्डेज ने एंटोनियो रेनोसो को हराकर सभी को चौंका दिया। यह सीट सांसद निडिया वेलाजक्वेज के हटने के बाद खाली हुई थी। ममदानी के समर्थन से वाल्डेज को युवा और प्रगतिशील मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिला। डारियालिजा एविला शेवेलियर की ऐतिहासिक जीत सबसे बड़ा उलटफेर डारियालिजा एविला शेवेलियर ने किया। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एड्रियानो एस्पाइलाट को हराया, जो करीब एक दशक से कांग्रेस में थे। इस जीत को न्यूयॉर्क की राजनीति के सबसे बड़े उलटफेरों में गिना जा रहा है। क्यों कहा जा रहा है 'किंगमेकर'? राजनीति में किसी नेता का उम्मीदवारों का समर्थन करना सामान्य बात है, लेकिन जोहरान ममदानी के समर्थन वाले तीनों उम्मीदवारों की जीत ने उनकी राजनीतिक ताकत को नई पहचान दी है। खास बात यह रही कि दो उम्मीदवारों ने मौजूदा सांसदों को हराया, जबकि तीसरे ने एक मजबूत राजनीतिक दावेदार को चुनावी मैदान में मात दी। ममदानी की कम्युनिकेशन डायरेक्टर अन्ना बह्र ने कहा कि यह नतीजे दिखाते हैं कि आम लोगों के मुद्दों पर आधारित राजनीति अब पारंपरिक चुनावी रणनीतियों पर भारी पड़ रही है। गाजा और इजरायल मुद्दा भी बना चुनावी केंद्र इन प्राइमरी चुनावों में गाजा युद्ध और अमेरिका की इजरायल नीति भी प्रमुख मुद्दा रही। ममदानी और उनके समर्थित उम्मीदवारों ने महंगाई, आवास संकट और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को अमेरिकी विदेश नीति से जोड़कर चुनाव प्रचार किया। इस रुख को लेकर उन्हें न्यूयॉर्क के कुछ यहूदी संगठनों और नेताओं की आलोचना का भी सामना करना पड़ा। डैन गोल्डमैन ने आरोप लगाया कि ममदानी का अभियान मध्य-पूर्व के मुद्दों को जरूरत से ज्यादा महत्व दे रहा है, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी में बढ़ा ममदानी का कद ताजा चुनाव परिणामों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर जोहरान ममदानी का प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि उनके समर्थित उम्मीदवार नवंबर के आम चुनाव में भी जीत हासिल करते हैं, तो ममदानी आने वाले वर्षों में पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
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