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Oil Surges After Trump’s Hormuz Blockade

ट्रंप की होर्मुज नाकेबंदी से वैश्विक तेल बाजार में भूचाल, कच्चा तेल 100 डॉलर के पार

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Oil tanker navigating the Strait of Hormuz amid rising US-Iran tensions and surging crude prices.
Strait of Hormuz Oil Price Surge 2026

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा Strait of Hormuz में नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 7 प्रतिशत चढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।

इस घटनाक्रम ने न केवल ऊर्जा बाजार बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ा दी है। Dow Jones Futures में गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में चिंता साफ झलक रही है।

सप्लाई संकट की आशंका से बढ़ी कीमतें

विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में अचानक उछाल का सबसे बड़ा कारण सप्लाई बाधित होने का डर है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देश इसी समुद्री मार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर तेल निर्यात करते हैं।

अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि जब तक ईरान अपनी “आक्रामक गतिविधियों” पर रोक नहीं लगाता, यह नाकेबंदी जारी रहेगी। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता और जोखिम की भावना बढ़ गई है।

ईरान पर अमेरिका की सख्त कार्रवाई

राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसेना उन जहाजों को रोकेगी जो ईरान को कथित तौर पर अवैध टैक्स या टोल का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में माइन (समुद्री बम) होने का डर फैलाकर वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण जहाज पर हमला हुआ तो अमेरिका कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया देगा।

क्या पूरी तरह बंद होगा समुद्री रास्ता?

US Central Command के अनुसार, यह नाकेबंदी पूरी तरह से वैश्विक जहाजरानी को रोकने के लिए नहीं है। गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को सीमित अनुमति दी जाएगी। अमेरिका का उद्देश्य ईरान की तेल आय को नियंत्रित करना है, न कि पूरी दुनिया के व्यापार को बाधित करना।

हालांकि, बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही में पहले ही कमी आने लगी है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।

आगे क्या?

वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जल्द कम होने वाला नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप के “लॉक्ड एंड लोडेड” बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है।

ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Maritime security teams monitor vessel activity near Oman’s Shinas Port amid regional tensions.
ओमान के शिनास बंदरगाह के पास जहाज से जुड़ी नई घटना, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

  Muscat: ओमान के तट पर जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच गुरुवार को एक और समुद्री सुरक्षा घटना सामने आई है। शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। मामले की निगरानी लगातार की जा रही है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावास ने दी जानकारी मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 11 जून को शिनास बंदरगाह के निकट एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना प्राप्त हुई है। दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। दूतावास के अनुसार, स्थिति का आकलन किया जा रहा है और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। 24 घंटे के भीतर दूसरी समुद्री घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले को 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर समुद्री यातायात पर भी दिखाई दे रहा है, जिसके कारण क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में भारतीय मिशन भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह मामले से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है और स्थानीय प्रशासन से लगातार जानकारी प्राप्त कर रहा है। फिलहाल घटना की प्रकृति और उससे हुए संभावित नुकसान को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ओमान और खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां हालात पर बारीकी से नजर रख रही हैं, जबकि क्षेत्र में जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
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बेलफास्ट चाकूबाजी के बाद भड़की हिंसा: आयरलैंड और ब्रिटेन में प्रवासी विरोधी दंगे, घर-दुकानों में तोड़फोड़

  बेलफास्ट/लंदन: उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में एक स्थानीय व्यक्ति पर कथित जानलेवा चाकू हमले के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े पैमाने पर प्रवासी विरोधी दंगों में बदल गया है। हिंसा की लपटें बेलफास्ट से निकलकर ब्रिटेन और आयरलैंड के कई अन्य शहरों तक पहुंच गई हैं, जहां आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। चाकूबाजी की घटना के बाद सड़कों पर उतरी भीड़ जानकारी के अनुसार, बेलफास्ट में एक आयरिश नागरिक पर चाकू से हमला किए जाने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया। बताया जा रहा है कि हमले में घायल 40 वर्षीय व्यक्ति की हालत गंभीर है। घटना के बाद विभिन्न समूहों ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया, जो जल्द ही हिंसक रूप ले बैठा। बेलफास्ट में घर, दुकानें और वाहन बने निशाना बेलफास्ट और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। कई स्थानों पर भीड़ ने वाहनों को आग के हवाले कर दिया, दुकानों में तोड़फोड़ की और कुछ प्रतिष्ठानों को लूट लिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक अफ्रीकी मूल के व्यापारी की दुकान में भी आग लगा दी गई। सुरक्षा बलों ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। लंदन और ग्लासगो तक फैला विरोध बेलफास्ट की घटनाओं के बाद लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर और स्कॉटलैंड के ग्लासगो सहित कई शहरों में भी प्रवासन नीति के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों की भी खबर है। आरोपी शरणार्थी की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस पुलिस के अनुसार, हमले का आरोपी सूडान मूल का शरणार्थी है, जो पहले फ्रांस और आयरलैंड होते हुए बेलफास्ट पहुंचा था। उसे ब्रिटेन में अस्थायी रूप से रहने की अनुमति मिली हुई थी। घटना के बाद देश में शरणार्थी और प्रवासन नीतियों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्टों की जांच अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो और संदेशों के तेजी से प्रसार ने तनाव बढ़ाने में भूमिका निभाई। पुलिस कई ऑनलाइन पोस्ट और खातों की जांच कर रही है, जिन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए जा रहे हैं। कई प्रवासी परिवारों ने छोड़े घर हिंसा और बढ़ते तनाव के बीच कई प्रवासी परिवारों ने सुरक्षा कारणों से अपने घर छोड़ दिए हैं। कुछ इलाकों में धार्मिक और सामुदायिक गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा विवाद घटना के बाद कई राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों के बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। जहां कुछ नेताओं ने इसे प्रवासन नीति की विफलता बताया, वहीं अन्य ने हिंसा और घृणा फैलाने वाली राजनीति की आलोचना की है। प्रशासन की अपील- शांति बनाए रखें ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि हिंसा, आगजनी या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
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Philippines Earthquake
फिलीपींस में भूकंप के बाद बढ़ा संकट, मृतकों की संख्या 45 पहुंची

मनीला, एजेंसियां। दक्षिणी फिलीपींस के मिंडानाओ क्षेत्र में 8 जून को आए विनाशकारी 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। भूकंप के बाद अब तक 2100 से अधिक आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटके) दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है। अधिकारियों के अनुसार इस आपदा में अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 630 लोग घायल हुए हैं। वहीं 17 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।   आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई मुश्किलें फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान के मुताबिक, कई आफ्टरशॉक्स की तीव्रता 6.4 तक दर्ज की गई है। लगातार आ रहे झटकों के कारण बचावकर्मियों को कई बार अपने अभियान रोकने पड़े हैं। एक क्षतिग्रस्त किराना भवन में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान आए तेज झटके के बाद टीम को तुरंत बाहर निकलना पड़ा। सुरक्षा कारणों से कई इमारतों में राहत कार्य फिलहाल रोक दिया गया है।   हजारों लोग बेघर, राहत शिविरों में शरण भूकंप के बाद लगभग 25 हजार लोग विस्थापित हो गए हैं और सरकारी राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि कई लोग मानसिक आघात और लगातार आ रहे झटकों के कारण अपने घरों में लौटने से डर रहे हैं।   बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान आपदा में 3,100 से अधिक घर, 29 सड़कें, 11 पुल और 100 से ज्यादा सरकारी भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। जनरल सैंटोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को भी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण उसे अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। हालांकि राहत सामग्री और सरकारी विमानों को संचालन की अनुमति दी गई है।   समुद्री इलाकों में भी तबाही भूकंप के बाद उठी ऊंची लहरों से तटीय क्षेत्रों में भी भारी नुकसान हुआ। कई लोग समुद्र में बह गए, जिनमें कुछ को बचा लिया गया है, जबकि कई अब भी लापता हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह भूकंप कोटाबाटो ट्रेंच में भूगर्भीय गतिविधियों के कारण आया और इसे फिलीपींस के हालिया इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक माना जा रहा है।

abhishek singh जून 10, 2026 0
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