अगर आप नई SUV खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो Kia Seltos अब पहले से कहीं ज्यादा भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आई है। हाल ही में Bharat NCAP क्रैश टेस्ट में इस SUV को 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है, जो इसे अपने सेगमेंट की सबसे सुरक्षित गाड़ियों में शामिल करती है।
Bharat NCAP के अनुसार, Kia Seltos ने Adult Occupant Protection (AOP) में 32 में से 31.70 अंक हासिल किए हैं।
ड्राइवर और फ्रंट पैसेंजर दोनों के लिए सिर, छाती और शरीर के अहम हिस्सों को अच्छी सुरक्षा मिली है, जिससे इसकी ओवरऑल सेफ्टी मजबूत साबित होती है।
Child Occupant Protection (COP) में भी Seltos ने शानदार प्रदर्शन किया है।
टेस्ट के दौरान 18 महीने और 3 साल के बच्चों के डमी को फ्रंटल और साइड दोनों क्रैश में पूरी सुरक्षा मिली, जो इसे फैमिली कार के रूप में और भी मजबूत बनाता है।
Kia Seltos की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग सभी वेरिएंट्स पर लागू होती है। इसमें स्टैंडर्ड तौर पर मिलते हैं:
भारतीय बाजार में Kia Seltos की कीमत लगभग ₹10.99 लाख से ₹19.99 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है। बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी है और डिलीवरी भी जारी है।
भारत में कार खरीदते समय अब ग्राहक सेफ्टी को प्राथमिकता देने लगे हैं। ऐसे में Bharat NCAP की 5-स्टार रेटिंग Kia Seltos को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनाती है, खासकर परिवार के लिए सुरक्षित SUV तलाश रहे ग्राहकों के लिए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की दौड़ तेजी से आगे बढ़ रही है, और इसी कड़ी में Tata Motors एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी अपनी लोकप्रिय SUV Tata Safari का इलेक्ट्रिक वर्जन Safari EV फेस्टिव सीजन 2026 में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह Tata की पहली तीन-रो (7-सीटर) इलेक्ट्रिक SUV होगी और कंपनी के EV पोर्टफोलियो को एक नया आयाम देगी। प्लेटफॉर्म और पावरट्रेन: Harrier EV से मिलेगा बेस नई Safari EV, Tata Harrier EV के acti.ev+ प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। हालांकि यह पूरी तरह नई EV (born-electric) नहीं होगी, बल्कि मौजूदा ICE मॉडल का इलेक्ट्रिक अवतार होगी। इसमें 65kWh और 75kWh बैटरी पैक मिलने की संभावना है: स्टैंडर्ड रियर-व्हील ड्राइव (RWD) हाई वेरिएंट में ड्यूल-मोटर AWD विकल्प अनुमानित रेंज Harrier EV से थोड़ी कम होगी, क्योंकि Safari का आकार बड़ा है Harrier EV के आधार पर, Safari EV में करीब 500–600 किमी की रेंज मिलने की उम्मीद है। साथ ही 100kW DC फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी दिया जा सकता है। दमदार फीचर्स और टेक्नोलॉजी Safari EV में Tata का नया TiDAL (Tata Intelligent Digital Architecture Layer) सिस्टम मिलेगा, जिससे कई एडवांस फीचर्स शामिल होंगे: OTA अपडेट 540-डिग्री कैमरा लेवल-2 ADAS ऑटो पार्क असिस्ट ऑफ-रोड क्रूज़ कंट्रोल UPI आधारित इन-कार पेमेंट (DrivePay) समन मोड (remote parking) इसके अलावा, मल्टी-लिंक रियर सस्पेंशन और अलग-अलग टेरेन मोड (Snow, Sand, Rock Crawl आदि) बेहतर ड्राइविंग अनुभव देंगे। डिजाइन और इंटीरियर डिजाइन में हल्के बदलाव देखने को मिलेंगे: क्लोज्ड फ्रंट ग्रिल EV बैजिंग नए एयरो अलॉय व्हील्स इंटीरियर काफी हद तक मौजूदा Safari जैसा रहेगा, लेकिन टेक्नोलॉजी अपग्रेड के साथ। लॉन्च टाइमलाइन और कीमत Safari EV का प्रोडक्शन अगस्त 2026 से शुरू हो सकता है और इसे त्योहारों के सीजन में लॉन्च किया जाएगा। कीमत की बात करें तो यह SUV लगभग 22.5 लाख से 30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच आ सकती है। किससे होगी टक्कर? लॉन्च के बाद Safari EV का सीधा मुकाबला Mahindra XEV 9S से होगा, जिससे भारतीय EV SUV मार्केट में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी।
वियतनाम की उभरती ऑटोमोबाइल कंपनी VinFast भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार नए उत्पाद पेश कर रही है। इसी कड़ी में कंपनी ने अपनी नई इलेक्ट्रिक मल्टी-पर्पज़ व्हीकल VinFast MPV 7 की बुकिंग भारत में आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। यह प्रीमियम फीचर्स से लैस इलेक्ट्रिक MPV 15 अप्रैल 2026 को भारतीय बाजार में लॉन्च की जाएगी। भारत में तीसरी पेशकश, दो वेरिएंट में आएगी MPV 7 VinFast इससे पहले VinFast VF6 और VinFast VF7 को पेश कर चुकी है। अब कंपनी MPV सेगमेंट में एंट्री लेकर अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। इस नई MPV को ड्यूल ब्रांडिंग के साथ पेश किया जाएगा- Limo Green वर्जन: कमर्शियल और फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए VF MPV 7: निजी ग्राहकों के लिए ₹21,000 की टोकन राशि के साथ इसकी बुकिंग शुरू हो चुकी है, जिससे कंपनी शुरुआती ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। डिजाइन: स्पेस और स्टाइल का संतुलन MPV 7 का डिजाइन VinFast की SUV लाइनअप से प्रेरित है। इसमें फ्रंट और रियर LED लाइट बार, वर्टिकल हेडलाइट्स और एयरो-डायनामिक अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। हालांकि इसका बॉक्सी लुक खासतौर पर केबिन स्पेस बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे यह फैमिली और कमर्शियल दोनों यूज़ के लिए उपयुक्त बनती है। इंटीरियर और फीचर्स केबिन को मिनिमलिस्ट और टेक-फोकस्ड रखा गया है। इसमें मिलते हैं- 10.1-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम फ्लोटिंग सेंटर कंसोल संभावित हेड-अप डिस्प्ले ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक 4 एयरबैग और ABS+EBD स्टीयरिंग-माउंटेड कंट्रोल्स ये फीचर्स इसे प्रीमियम MPV सेगमेंट में मजबूत दावेदार बनाते हैं। परफॉर्मेंस और बैटरी MPV 7 में 60.13kWh बैटरी पैक और फ्रंट-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दिया गया है, जो 204bhp की पावर और 280Nm का टॉर्क जनरेट करता है। कंपनी का दावा है कि यह MPV एक बार चार्ज करने पर लगभग 450 किलोमीटर (NEDC) की रेंज दे सकती है। फास्ट चार्जिंग के लिए 80kW DC चार्जर का सपोर्ट दिया गया है, जिससे बैटरी 10% से 70% तक सिर्फ 30 मिनट में चार्ज हो सकती है। ऑफर्स और कस्टमर बेनिफिट्स VinFast इस MPV को “वैल्यू-फॉर-मनी” प्रोडक्ट के रूप में पेश कर रही है। शुरुआती ग्राहकों को मिल सकते हैं- ₹2 लाख तक EV इंसेंटिव फ्री चार्जिंग सुविधा बायबैक ऑप्शन 10 साल की बैटरी वारंटी साथ ही कंपनी की रेजिडुअल वैल्यू पॉलिसी के तहत- 2 साल में 75% वैल्यू 3 साल में 55% वैल्यू की गारंटी बाजार में मुकाबला भारतीय बाजार में MPV 7 का सीधा मुकाबला आने वाली इलेक्ट्रिक 3-रो गाड़ियों जैसे Kia Carens Clavis EV, Mahindra XEV 9S और BYD eMax 7 से होगा। Historical Fact 2 अप्रैल का इतिहास: महत्वपूर्ण घटनाएँ, जन्म और विशेष दिवस 2 अप्रैल इतिहास के पन्नों में कई उल्लेखनीय घटनाओं, महान व्यक्तित्वों के जन्म और महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए दर्ज है। यह दिन विज्ञान, राजनीति, खेल और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलावों का साक्षी रहा है। 2 अप्रैल की प्रमुख घटनाएँ 1984 – स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा ने सोयूज़ टी-11 मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाकर इतिहास रचा और पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने। 1989 – फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के नेता यासर अराफात फिलिस्तीन के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। 2007 – सोलोमन द्वीप में भीषण सुनामी ने भारी तबाही मचाई। 2011 – भारत ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को हराकर ICC क्रिकेट विश्व कप 2011 जीता, जो भारतीय क्रिकेट इतिहास की ऐतिहासिक जीत रही। 2 अप्रैल को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति 1943 – बिंदेश्वर पाठक, ‘सुलभ इंटरनेशनल’ के संस्थापक और समाज सुधारक। 1891 – टी. बी. कुन्हा, गोवा के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी। 1902 – बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ, शास्त्रीय संगीत के महान गायक। 1942 – रोशन सेठ, प्रसिद्ध अभिनेता। 1969 – अजय देवगन, बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता, निर्देशक और निर्माता। 1935 – ए. वी. रामा राव, प्रसिद्ध रसायनशास्त्री और आविष्कारक। 1881 – वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर, क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी। 2 अप्रैल को हुए निधन 2023 – सलीम दुर्रानी, भारत के प्रसिद्ध क्रिकेट ऑलराउंडर। 1933 – रणजी (के. एस. रणजीतसिंहजी), भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी। 1907 – राधाकृष्ण दास, बहुभाषी साहित्यकार। 1825 – बन्धुल, प्रसिद्ध बर्मी सेनापति। 1720 – बालाजी विश्वनाथ, मराठा साम्राज्य के महत्वपूर्ण नेता। महत्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस – यह दिन ऑटिज़्म से जुड़े लोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें समाज में समान अवसर दिलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। निष्कर्ष 2 अप्रैल न केवल ऐतिहासिक घटनाओं का प्रतीक है, बल्कि यह दिन हमें प्रेरित करता है कि कैसे विज्ञान, खेल और समाज में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ मानव जीवन को नई दिशा देती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पारिवारिक कारों को लेकर सोच तेजी से बदल रही है। पहले बड़ी गाड़ियों को केवल लंबे सफर या बड़े संयुक्त परिवारों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब शहरी परिवार भी ऐसे वाहन चाहते हैं जो रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ वीकेंड ट्रिप्स को भी आसानी से संभाल सकें। इसी बदलती जरूरत का जवाब बनकर सामने आई है Kia Carens Clavis। यह कार सिर्फ ज्यादा सीटों वाली गाड़ी नहीं, बल्कि आधुनिक परिवारों की नई प्राथमिकताओं स्पेस, आराम, सुरक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी का संतुलित पैकेज है। करीब 4,550 mm लंबाई और 2,780 mm व्हीलबेस के साथ यह केबिन के अंदर अच्छा-खासा लेगरूम देती है, जिससे दूसरी और तीसरी पंक्ति के यात्रियों को भी आराम मिलता है। खास बात यह है कि इसमें 6-सीटर और 7-सीटर दोनों कॉन्फ़िगरेशन मिलते हैं, जिससे खरीदार अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुन सकते हैं। स्पेस सिर्फ ज्यादा नहीं, स्मार्ट भी Carens Clavis की दूसरी पंक्ति में स्लाइड और रिक्लाइन फीचर दिया गया है, जबकि तीसरी पंक्ति की सीटें 50:50 स्प्लिट-फोल्डिंग हैं। इसका मतलब यह है कि जरूरत पड़ने पर परिवार अतिरिक्त यात्रियों के लिए जगह बना सकता है और कभी लगेज स्पेस भी बढ़ा सकता है। यही लचीलापन इसे शहरी परिवारों के लिए खास बनाता है। शहर के लिए बनी प्रैक्टिकल फैमिली कार हालांकि यह एक तीन-पंक्ति वाला वाहन है, लेकिन Kia ने इसे इस तरह डिजाइन किया है कि यह शहरों में भी आसानी से चलाई जा सके। सीमित पार्किंग स्पेस, ट्रैफिक और तंग गलियों के बीच इसकी ऊंची सीटिंग पोजिशन और बेहतर विजिबिलिटी ड्राइवर को आत्मविश्वास देती है। आराम और टेक्नोलॉजी का मजबूत कॉम्बिनेशन Carens Clavis में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, रूफ-माउंटेड AC वेंट्स, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और तीसरी पंक्ति तक एयर वेंट्स जैसे फीचर्स मिलते हैं। साथ ही बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, कनेक्टेड कार फीचर्स और 360-डिग्री कैमरा इसे तकनीक के मामले में भी मजबूत बनाते हैं। सुरक्षा बनी सबसे बड़ी ताकत परिवारों के लिए सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता होती है, और Carens Clavis इस मोर्चे पर भी मजबूत नजर आती है। इसमें मल्टीपल एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और ADAS जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जो न सिर्फ दुर्घटना के समय सुरक्षा देते हैं बल्कि संभावित खतरे को पहले से पहचानने में भी मदद करते हैं।