स्वास्थ्य

Benefits of Eating 2 Eggs Daily for 30 Days

30 दिन तक रोज़ 2 अंडे खाने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं? जानिए डाइटिशियन गिन्नी कालरा की सलाह

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Two boiled eggs served with a healthy breakfast, highlighting the nutritional benefits of eating eggs daily for overall wellness.
Benefits of Eating Two Eggs Daily

नई दिल्ली: अंडे को दुनिया के सबसे संपूर्ण और पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट्स और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों और कार्यों को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि संतुलित आहार के साथ लगातार 30 दिनों तक रोज़ाना दो अंडे खाए जाएं, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं।

डाइटिशियन गिन्नी कालरा के अनुसार, अंडे कोई जादुई भोजन नहीं हैं, लेकिन नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जिससे मांसपेशियों, दिमाग, आंखों, हड्डियों और त्वचा की सेहत में सुधार देखने को मिल सकता है।

मसल्स होंगे मजबूत, रिकवरी होगी तेज

दो अंडों से लगभग 12–13 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी नौ अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जो मांसपेशियों के विकास, टिश्यू रिपेयर और रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित व्यायाम करने वाले, बुजुर्ग और बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है।

देर तक नहीं लगेगी भूख

अंडे में मौजूद प्रोटीन और हेल्दी फैट्स धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है। अगर नाश्ते में दो अंडे शामिल किए जाएं तो बार-बार स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है और वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है।

दिमाग रहेगा अधिक सक्रिय

अंडों में कोलीन (Choline) नामक पोषक तत्व पाया जाता है, जो मस्तिष्क, याददाश्त और नर्वस सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। यह एसिटाइलकोलीन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जिससे सीखने की क्षमता, एकाग्रता और मानसिक सतर्कता बेहतर हो सकती है।

आंखों की सेहत को मिलेगा फायदा

अंडे में मौजूद ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंखों की रेटिना की सुरक्षा करते हैं। ये बढ़ती उम्र और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

हड्डियां होंगी मजबूत

अंडे प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी का स्रोत हैं, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इससे हड्डियों और दांतों की मजबूती के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी समर्थन मिलता है। हालांकि, केवल अंडों से पूरी विटामिन-डी की आवश्यकता पूरी नहीं होती, लेकिन यह कुल पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

त्वचा, बाल और नाखूनों में दिख सकता है सुधार

अंडों में बायोटिन, सेलेनियम, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स और प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो बालों, त्वचा और नाखूनों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। संतुलित आहार के साथ नियमित सेवन करने पर कुछ सप्ताह में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं।

क्या अंडे खाने से बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल?

यह सबसे आम सवालों में से एक है। हाल के वर्षों में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि अधिकांश स्वस्थ लोगों में सीमित मात्रा में अंडे खाने से हृदय रोग का खतरा नहीं बढ़ता। शरीर स्वयं कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को नियंत्रित करता है और अंडों से मिलने वाला डाइटरी कोलेस्ट्रॉल पहले की तुलना में कम प्रभाव डालता है।

हालांकि, जिन लोगों को अनियंत्रित डायबिटीज, फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया या पहले से हृदय संबंधी गंभीर बीमारी है, उन्हें नियमित रूप से अंडे खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

क्या रोज़ दो अंडे पर्याप्त हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए रोज़ाना दो अंडे पर्याप्त माने जाते हैं। इससे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स की संतुलित मात्रा मिल जाती है। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए अंडों के साथ फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल करना जरूरी है।

ध्यान रहे कि 30 दिनों में कोई चमत्कारी परिवर्तन नहीं होता, लेकिन नियमित और संतुलित जीवनशैली के साथ दो अंडों का सेवन शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में निश्चित रूप से सहायक हो सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज! किडनी, हार्ट और लिवर की गंभीर बीमारी का हो सकता है संकेत

नई दिल्ली: लंबे समय तक खड़े रहने, अधिक चलने या हल्की चोट लगने के बाद पैरों में सूजन आना आम बात है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों, टखनों या तलवों में लगातार सूजन बनी रहती है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी, लिवर संबंधी समस्याओं या रक्त संचार में गड़बड़ी जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। सीनियर इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एलेक्स मैथ्यू के अनुसार, जब शरीर के टिश्यू में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है, तो पैरों में सूजन यानी एडिमा (Edema) की समस्या होती है। यदि सूजन वाली जगह पर उंगली दबाने के बाद कुछ समय तक गड्ढा बना रहे, तो इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा संकेत हो सकता है। हार्ट फेलियर का शुरुआती संकेत हो सकती है सूजन जब हृदय शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता, तो अतिरिक्त तरल पदार्थ पैरों और टखनों में जमा होने लगता है। इसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर कहा जाता है। इस स्थिति में आमतौर पर दोनों पैरों में सूजन के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं: सांस फूलना जल्दी थक जाना सीने में भारीपन रात में सांस लेने में परेशानी किडनी ठीक से काम न करे तो भी फूल सकते हैं पैर किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले तत्व बाहर निकालने का काम करती है। जब इसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है। ऐसे मामलों में मरीज को दिखाई दे सकते हैं: पैरों और टखनों में सूजन चेहरे पर सूजन पेशाब में बदलाव लगातार थकान क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजों में यह लक्षण काफी आम माना जाता है। लिवर की बीमारी भी बन सकती है वजह लिवर एल्ब्यूमिन नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं में तरल पदार्थ को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यदि लिवर सिरोसिस या अन्य गंभीर बीमारी से प्रभावित हो जाए, तो एल्ब्यूमिन कम बनने लगता है, जिससे: पैरों में सूजन पेट में पानी भरना शरीर में भारीपन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नसों में खून का थक्का भी हो सकता है कारण यदि किसी एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, गर्माहट या लालिमा दिखाई दे, तो यह डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) यानी नस में रक्त का थक्का बनने का संकेत हो सकता है। यह स्थिति गंभीर होती है और तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए क्योंकि थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर जानलेवा भी बन सकता है। शरीर में प्रोटीन की कमी से भी आती है सूजन कुपोषण, किडनी रोग या लिवर की बीमारी के कारण शरीर में एल्ब्यूमिन का स्तर कम हो सकता है। ऐसे में रक्त से तरल पदार्थ बाहर निकलकर टिश्यू में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन दिखाई देती है। कुछ दवाएं भी बढ़ा सकती हैं परेशानी विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं के सेवन से भी पैरों में सूजन हो सकती है: हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं स्टेरॉयड हार्मोनल दवाएं कुछ दर्द निवारक दवाएं डायबिटीज की कुछ दवाएं यदि नई दवा शुरू करने के बाद सूजन आने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। पैरों की सूजन से बचने के आसान उपाय लंबे समय तक लगातार खड़े या बैठे न रहें। नमक का सेवन सीमित करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित व्यायाम करें। वजन नियंत्रित रखें। बैठते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं में बदलाव न करें। कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि पैरों की सूजन के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें: अचानक दोनों या एक पैर में तेज सूजन सांस लेने में तकलीफ सीने में दर्द तेज दर्द या लालिमा पेशाब कम होना कई दिनों तक सूजन का बने रहना  

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Doctor checking a patient's blood pressure while explaining the connection between hypertension and thyroid disorders.
बार-बार बढ़ रहा है BP? सिर्फ नमक नहीं, थायरॉइड की गड़बड़ी भी हो सकती है वजह, जानिए डॉक्टर की सलाह

भारत में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आमतौर पर लोग हाई बीपी की वजह अधिक नमक, मोटापा, तनाव, धूम्रपान या खराब लाइफस्टाइल को मानते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बार-बार बढ़ता ब्लड प्रेशर किसी हार्मोनल समस्या, खासकर थायरॉइड डिसऑर्डर का भी संकेत हो सकता है। कार्डियक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्लड प्रेशर दवाइयों के बावजूद बार-बार बढ़ रहा है या नियंत्रित नहीं हो रहा, तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। कैसे जुड़ा है थायरॉइड और हाई ब्लड प्रेशर? थायरॉइड ग्रंथि शरीर में बनने वाले T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है, तब रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर, विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (निचला स्तर), बढ़ सकता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है? हाइपोथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है। साथ ही रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम होने लगता है। यही कारण है कि शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए दबाव बढ़ सकता है, जिससे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई बीपी और थायरॉइड के बीच संबंध को देखते हुए दोनों स्थितियों की जांच एक साथ करना बेहतर माना जाता है। कब करानी चाहिए थायरॉइड जांच? यदि आपको— बार-बार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, दवा लेने के बावजूद बीपी नियंत्रित न हो, लगातार थकान महसूस हो, वजन बढ़ रहा हो, ठंड ज्यादा लगती हो, दिल की धड़कन धीमी रहती हो, तो डॉक्टर की सलाह पर TSH, T3 और T4 टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। हाइपोथायरॉइडिज्म में किन दवाओं में बरतें सावधानी? विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों में पहले से ही दिल की धड़कन धीमी हो सकती है। ऐसे में कुछ बीपी की दवाएं, जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, धड़कन को और धीमा कर सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के आसान उपाय हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड दोनों स्थितियों में स्वस्थ जीवनशैली काफी मददगार साबित होती है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। योग और कार्डियो एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। नमक का सेवन सीमित रखें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर DASH डाइट अपनाएं। पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की जांच कराते रहें। डॉक्टर की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की समस्या कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए जिन लोगों को लगातार हाई बीपी की शिकायत रहती है, उन्हें थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। वहीं थायरॉइड के मरीजों को भी समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना चाहिए ताकि किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या से बचा जा सके।  

surbhi जून 29, 2026 0
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रात में बार-बार खुलती है नींद? हो सकता है दिमाग को नहीं मिल रही पर्याप्त ऑक्सीजन, जानिए स्लीप एपनिया कितना खतरनाक

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग रात में बार-बार नींद टूटने, खर्राटे आने या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस करने जैसी समस्याओं से जूझते हैं। अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्लीप एपनिया केवल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे दिमाग की कार्यक्षमता, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है। क्या है स्लीप एपनिया? ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय श्वसन मार्ग बार-बार आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाता है। इसके कारण सांस लेने में रुकावट आती है और व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती रहती है। कई बार मरीज को इसका एहसास भी नहीं होता, लेकिन उसका शरीर पूरी रात इस समस्या से जूझता रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुकावट एक रात में दर्जनों या यहां तक कि सैकड़ों बार भी हो सकती है। दिमाग को कैसे पहुंचता है नुकसान? ऑक्सीजन की कमी बनती है सबसे बड़ा खतरा स्लीप एपनिया के दौरान शरीर और दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस स्थिति को "इंटरमिटेंट हाइपोक्सिया" कहा जाता है। दिमाग को लगातार ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जब बार-बार ऑक्सीजन की कमी होती है, तो मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। खासकर वे हिस्से जो याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक बिना इलाज वाले स्लीप एपनिया से हिप्पोकैम्पस और फ्रंटल कॉर्टेक्स जैसे महत्वपूर्ण ब्रेन क्षेत्रों में बदलाव हो सकते हैं। याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों में अक्सर ये समस्याएं देखी जाती हैं— चीजें भूलना ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई निर्णय लेने में परेशानी मानसिक प्रतिक्रिया की गति धीमी होना पढ़ाई और काम में प्रदर्शन प्रभावित होना नींद की रिकवरी प्रक्रिया हो जाती है प्रभावित हर बार सांस रुकने पर शरीर हल्की अवस्था में जाग जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में "अराउजल" कहा जाता है। इससे गहरी नींद और REM Sleep बार-बार बाधित होती है। यही वे चरण हैं जिनमें— दिमाग खुद की मरम्मत करता है यादें मजबूत होती हैं भावनात्मक संतुलन बनता है सीखने की क्षमता बेहतर होती है जब ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो पातीं, तो व्यक्ति दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और सुस्ती महसूस करता है। बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार स्लीप एपनिया केवल नींद की बीमारी नहीं है, बल्कि यह रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित करता है। बार-बार ऑक्सीजन की कमी और फिर अचानक ऑक्सीजन मिलने की प्रक्रिया से— सूजन बढ़ती है ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ता है हृदय रोगों की संभावना बढ़ती है इन सभी कारणों से स्ट्रोक और मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। अल्जाइमर और डिमेंशिया से भी जुड़ सकता है संबंध हाल के शोध बताते हैं कि लंबे समय तक अनुपचारित स्लीप एपनिया अल्जाइमर और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। नींद में लगातार व्यवधान आने से दिमाग में जमा होने वाले हानिकारक प्रोटीन, जैसे बीटा-एमिलॉयड, ठीक तरह से साफ नहीं हो पाते। यही प्रोटीन आगे चलकर डिमेंशिया और अल्जाइमर से जुड़े पाए गए हैं। किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें? यदि आपको इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है— तेज खर्राटे आना रात में बार-बार नींद खुलना सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होना सुबह सिरदर्द होना दिनभर अत्यधिक नींद आना लगातार थकान महसूस होना ध्यान और याददाश्त कमजोर होना क्या है इसका इलाज? अच्छी बात यह है कि स्लीप एपनिया का इलाज संभव है। विशेषज्ञ इसके लिए कई उपाय सुझाते हैं— CPAP (Continuous Positive Airway Pressure) थेरेपी वजन नियंत्रित करना नियमित व्यायाम धूम्रपान और शराब से दूरी ओरल डिवाइस का उपयोग सोने की सही पोजीशन अपनाना समय पर पहचान और उपचार से न केवल नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि दिमाग को होने वाले लंबे समय के नुकसान से भी बचा जा सकता है।  

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