स्वास्थ्य

ग्रीन टी क्यों है हेल्थ के लिए बेस्ट? जानिए इसके 10 बड़े बेनिफिट्स

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
Green tea benefits
Green tea benefits

नई दिल्ली, एजेंसियां। ग्रीन टी आज दुनिया भर में एक लोकप्रिय हेल्दी ड्रिंक बन चुकी है। इसकी शुरुआत चीन से हुई थी, लेकिन इसके औषधीय गुणों के कारण अब यह हर जगह पसंद की जाती है। यह Camellia sinensis की पत्तियों से बनती है और इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल्स पाए जाते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।

 

वजन घटाने से लेकर कैंसर तक में सहायक


ग्रीन टी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मेटाबॉलिज्म को तेज कर फैट बर्न करने में मदद करती है, खासकर पेट की चर्बी कम करने में। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स कई प्रकार के कैंसर जैसे ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

 

डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में असरदार


ग्रीन टी ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद कर सकती है, जिससे Type 2 Diabetes का खतरा कम होता है। साथ ही यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

 

ब्रेन और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद


ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थीनाइन दिमाग को सक्रिय रखते हैं और याददाश्त बेहतर बनाते हैं। यह Alzheimer's disease और Parkinson's disease जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी सहायक हो सकती है। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर दिल की बीमारियों से बचाव करती है।

 

दांतों और त्वचा के लिए भी लाभकारी


ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन बैक्टीरिया को खत्म कर दांतों को स्वस्थ रखते हैं और सांसों की बदबू कम करते हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा को जवान बनाए रखने और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं।

 

डॉक्टर की सलाह जरूरी


हालांकि ग्रीन टी के कई फायदे हैं, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि इसका सही और सुरक्षित लाभ मिल सके।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

स्वास्थ्य

View more
Green tea benefits
ग्रीन टी क्यों है हेल्थ के लिए बेस्ट? जानिए इसके 10 बड़े बेनिफिट्स

नई दिल्ली, एजेंसियां। ग्रीन टी आज दुनिया भर में एक लोकप्रिय हेल्दी ड्रिंक बन चुकी है। इसकी शुरुआत चीन से हुई थी, लेकिन इसके औषधीय गुणों के कारण अब यह हर जगह पसंद की जाती है। यह Camellia sinensis की पत्तियों से बनती है और इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल्स पाए जाते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।   वजन घटाने से लेकर कैंसर तक में सहायक ग्रीन टी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मेटाबॉलिज्म को तेज कर फैट बर्न करने में मदद करती है, खासकर पेट की चर्बी कम करने में। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स कई प्रकार के कैंसर जैसे ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक माने जाते हैं।   डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में असरदार ग्रीन टी ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद कर सकती है, जिससे Type 2 Diabetes का खतरा कम होता है। साथ ही यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।   ब्रेन और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थीनाइन दिमाग को सक्रिय रखते हैं और याददाश्त बेहतर बनाते हैं। यह Alzheimer's disease और Parkinson's disease जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी सहायक हो सकती है। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर दिल की बीमारियों से बचाव करती है।   दांतों और त्वचा के लिए भी लाभकारी ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन बैक्टीरिया को खत्म कर दांतों को स्वस्थ रखते हैं और सांसों की बदबू कम करते हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा को जवान बनाए रखने और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं।   डॉक्टर की सलाह जरूरी हालांकि ग्रीन टी के कई फायदे हैं, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि इसका सही और सुरक्षित लाभ मिल सके।

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
Elderly man exercising with medical illustration showing prostate cancer lifestyle impact

प्रोस्टेट कैंसर में लाइफस्टाइल का बड़ा असर: एक्सरसाइज से दिमाग तेज, स्मोकिंग से बढ़ता खतरा

Elderly person sitting alone looking stressed while another performs exercise highlighting mental and physical health contrast

डिप्रेशन और शारीरिक निष्क्रियता बढ़ा रहे गंभीर बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

Healthy morning habits like hydration, exercise and planning help reduce stress and boost daily energy

सुबह की ये 5 आदतें बदल सकती हैं आपका दिन, कम होगा स्ट्रेस और बढ़ेगी एनर्जी

salt and calcium loss
क्या नमक छीन रहा है शरीर का कैल्शियम? जानिए पूरी सच्चाई

नई दिल्ली, एजेंसियां। नमक हमारे रोजमर्रा के खानपान का अहम हिस्सा है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हाल के स्वास्थ्य विश्लेषण बताते हैं कि ज्यादा नमक लेने से शरीर के मिनरल बैलेंस पर असर पड़ सकता है, जिसमें कैल्शियम भी शामिल है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के साथ-साथ मांसपेशियों और नसों के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी होता है।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक नमक का सेवन शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ाता है, जिससे पेशाब के जरिए कैल्शियम का उत्सर्जन बढ़ सकता है। इसका मतलब यह है कि लंबे समय तक ज्यादा नमक खाने से शरीर में कैल्शियम का स्तर धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि यह प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता और यह उसकी डाइट, उम्र और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करता है।   लंबे समय तक नमक का अधिक सेवन हड्डियों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है और इससे हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और उन लोगों में यह जोखिम अधिक होता है जिनकी डाइट में पहले से ही कैल्शियम की कमी होती है। इसके अलावा, हार्मोनल बदलाव और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकती है।   विशेषज्ञ क्या सलाह देते  है? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नमक का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए और प्रोसेस्ड व पैकेज्ड फूड से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि इनमें छिपा हुआ नमक अधिक होता है। साथ ही, आहार में कैल्शियम से भरपूर चीजें जैसे दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां और बीज शामिल करना जरूरी है। कुल मिलाकर, संतुलित आहार और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर शरीर के मिनरल बैलेंस को बनाए रखा जा सकता है और हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखा जा सकता है।

Anjali Kumari अप्रैल 25, 2026 0
Glass of protein coffee with milk and protein powder blended in fitness lifestyle setting

प्रोटीन कॉफी का बढ़ता ट्रेंड: क्या सच में हेल्दी है ‘प्रोफी’?

Doctor examining elderly patient with Giant Cell Arteritis discussing aspirin benefits and bleeding risk

Giant Cell Arteritis में Aspirin: दिल के खतरे में कमी, लेकिन ब्लीडिंग का बढ़ा जोखिम–नई स्टडी में बड़ा खुलासा

Medical illustration showing diabetic patient experiencing shoulder pain indicating frozen shoulder risk

Diabetes और ‘Frozen Shoulder’ का खतरा: नई स्टडी में 4 गुना ज्यादा रिस्क का खुलासा

AI analyzing antibiotic data in hospital to combat antimicrobial resistance crisis
AMR संकट के बीच AI के जिम्मेदार इस्तेमाल की जरूरत, ESCMID 2026 में विशेषज्ञ की चेतावनी

  दुनियाभर में बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) संकट को लेकर वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता लगातार गहराती जा रही है। अनुमान है कि 2025 तक यह संकट हर साल करीब 1 करोड़ लोगों की जान को खतरे में डाल सकता है। इसी बीच ESCMID Global 2026 में पेश किए गए नए शोध में बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस समस्या से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकता है–लेकिन इसके इस्तेमाल में सावधानी बेहद जरूरी है। AI कैसे कर सकता है AMR से मुकाबला यूके की University of Hertfordshire से जुड़ी शोधकर्ता Rasha Elshenawy ने अपने अध्ययन में बताया कि AI आधारित मशीन लर्निंग एल्गोरिदम अस्पतालों में एंटीबायोटिक के सही उपयोग, समय पर हस्तक्षेप और संक्रमण के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने में मददगार साबित हो रहे हैं। उनके अनुसार, AI सिस्टम अस्पतालों में एंटीबायोटिक उपयोग के पैटर्न का विश्लेषण कर यह संकेत दे सकता है कि कहां दवाओं के प्रति प्रतिरोध (resistance) बढ़ने की संभावना है, जिससे डॉक्टर समय रहते सही कदम उठा सकें। रिसर्च में मिले प्रभावशाली नतीजे अध्ययन के दौरान: AI ने 84.7% सटीकता के साथ सही प्रिस्क्रिप्शन का अनुमान लगाया 156 संभावित दवा-इंटरैक्शन की पहचान की गई 89 मामलों में डोज़ एडजस्टमेंट की जरूरत बताई गई डेटा की सटीकता 99.2% पाई गई यह सिस्टम महामारी के दौरान बढ़े हुए 40% कार्यभार के बावजूद प्रभावी बना रहा, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है। लो-इनकम देशों में बड़ी चुनौतियां हालांकि, AMR का सबसे ज्यादा असर लो और मिडिल-इनकम देशों (LMICs) में देखने को मिलता है, जहां संसाधनों की कमी, नीति और प्रशिक्षण के अभाव जैसी कई बाधाएं मौजूद हैं। रिसर्च में यह भी सामने आया कि इन देशों में AI लागू करना तकनीकी रूप से संभव तो है, लेकिन इसके लिए मजबूत वित्तीय समर्थन, प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर नवाचार की जरूरत है। जिम्मेदार AI उपयोग पर जोर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि AI का इस्तेमाल बिना उचित जांच और सत्यापन के नहीं किया जाना चाहिए। Rasha Elshenawy ने स्पष्ट कहा कि किसी भी AI सिस्टम को लागू करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित करना अनिवार्य है, ताकि मरीजों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़े। उन्होंने यह भी जोर दिया कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को AI अपनाने से पहले मजबूत परीक्षण प्रक्रिया और स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने होंगे। आगे की राह विशेषज्ञों के मुताबिक, AMR से लड़ाई में AI एक शक्तिशाली उपकरण बन सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है: मजबूत वैलिडेशन और टेस्टिंग हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण नीति और वित्तीय समर्थन अगर इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाए, तो AI न केवल एंटीबायोटिक के सही उपयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट को कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Transgender cancer patient consulting doctor highlighting healthcare discrimination and unequal treatment

ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी कैंसर मरीजों के साथ भेदभाव से बिगड़ते स्वास्थ्य परिणाम, नई स्टडी में खुलासा

tan removal at home

टैनिंग हटाने के आसान घरेलू उपाय, 7 दिन में दिखेगा असर

Diseases with No Cure

दुनिया की 5 आम बीमारियां जिनका कोई क्योर नहीं

0 Comments

Top week

Donald Trump warns Iran over nuclear tensions as US boosts military presence in Middle East
दुनिया

ट्रंप का ईरान को कड़ा संदेश: “परमाणु हथियार नहीं, लेकिन समय खत्म हो रहा है” – मिडल ईस्ट में बढ़ा तनाव

surbhi अप्रैल 24, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?