स्वास्थ्य

Makhana recipes: गर्मी में मखाना खाएं इन नए तरीकों से, मिलेगा ठंडक और एनर्जी दोनों का फायदा

Anjali Kumari अप्रैल 28, 2026 0
Makhana recipes
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नई दिल्ली, एजेंसियां। मखाना को भारत में एक सुपरफूड माना जाता है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। आमतौर पर लोग इसे घी में भूनकर और मसालों के साथ खाना पसंद करते हैं, लेकिन गर्मियों के मौसम में यह तरीका हर किसी के लिए सही नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा तला-भुना मखाना शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है और पाचन पर असर डाल सकता है।

 

गर्मी में क्यों बदलना चाहिए मखाना खाने का तरीका?


गर्मी और हीटवेव के दौरान शरीर पहले से ही डिहाइड्रेशन और आंतरिक गर्मी से जूझ रहा होता है। ऐसे में घी और भारी मसालों में भुना मखाना पेट में और अधिक गर्मी पैदा कर सकता है। इससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ सकता है और भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ हल्के और ठंडक देने वाले विकल्पों को अपनाने की सलाह देते हैं।

 

मखाना की हेल्दी चाट है बेहतर विकल्प


 डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट  के अनुसार, गर्मियों में मखाना की चाट एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें खीरा, टमाटर और प्याज जैसी सब्जियां मिलाकर इसे और पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि इसमें फाइबर की मात्रा बढ़ने से पाचन भी बेहतर होता है। हालांकि मखाना का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में यह शरीर का पानी सोख सकता है।

 

मखाना रायता: दही के साथ बेहतरीन कॉम्बिनेशन


गर्मियों में मखाना को दही के साथ खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है। दही शरीर को ठंडक देने के साथ प्रोबायोटिक्स प्रदान करता है, जबकि मखाना ऊर्जा और ताकत देता है। इसे बनाने के लिए हल्के से भुने मखाने को फेंटे हुए दही में मिलाया जाता है। स्वाद और सेहत बढ़ाने के लिए इसमें पुदीना भी मिलाया जा सकता है। यह संयोजन हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में भी मदद करता है।

 

मखाना स्मूदी: नया और हेल्दी ट्रेंड


मखाना का पाउडर बनाकर उसे छाछ में मिलाकर स्मूदी के रूप में भी सेवन किया जा सकता है। इसे ठंडा करके पीना गर्मी में शरीर को अंदर से हाइड्रेट और कूल रखने में मदद करता है। यह एक हल्का लेकिन एनर्जी देने वाला ड्रिंक है, जिसे दोपहर के भोजन के साथ लिया जा सकता है।

 

संतुलित सेवन है जरूरी


विशेषज्ञों का कहना है कि मखाना एक सुपरफूड जरूर है, लेकिन इसका सही तरीके से और संतुलित मात्रा में सेवन करना जरूरी है। गर्मियों में हल्के और हाइड्रेटिंग विकल्प अपनाकर इसे और भी स्वास्थ्यवर्धक बनाया जा सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। मखाना को भारत में एक सुपरफूड माना जाता है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। आमतौर पर लोग इसे घी में भूनकर और मसालों के साथ खाना पसंद करते हैं, लेकिन गर्मियों के मौसम में यह तरीका हर किसी के लिए सही नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा तला-भुना मखाना शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है और पाचन पर असर डाल सकता है।   गर्मी में क्यों बदलना चाहिए मखाना खाने का तरीका? गर्मी और हीटवेव के दौरान शरीर पहले से ही डिहाइड्रेशन और आंतरिक गर्मी से जूझ रहा होता है। ऐसे में घी और भारी मसालों में भुना मखाना पेट में और अधिक गर्मी पैदा कर सकता है। इससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ सकता है और भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ हल्के और ठंडक देने वाले विकल्पों को अपनाने की सलाह देते हैं।   मखाना की हेल्दी चाट है बेहतर विकल्प  डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट  के अनुसार, गर्मियों में मखाना की चाट एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें खीरा, टमाटर और प्याज जैसी सब्जियां मिलाकर इसे और पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि इसमें फाइबर की मात्रा बढ़ने से पाचन भी बेहतर होता है। हालांकि मखाना का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में यह शरीर का पानी सोख सकता है।   मखाना रायता: दही के साथ बेहतरीन कॉम्बिनेशन गर्मियों में मखाना को दही के साथ खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है। दही शरीर को ठंडक देने के साथ प्रोबायोटिक्स प्रदान करता है, जबकि मखाना ऊर्जा और ताकत देता है। इसे बनाने के लिए हल्के से भुने मखाने को फेंटे हुए दही में मिलाया जाता है। स्वाद और सेहत बढ़ाने के लिए इसमें पुदीना भी मिलाया जा सकता है। यह संयोजन हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में भी मदद करता है।   मखाना स्मूदी: नया और हेल्दी ट्रेंड मखाना का पाउडर बनाकर उसे छाछ में मिलाकर स्मूदी के रूप में भी सेवन किया जा सकता है। इसे ठंडा करके पीना गर्मी में शरीर को अंदर से हाइड्रेट और कूल रखने में मदद करता है। यह एक हल्का लेकिन एनर्जी देने वाला ड्रिंक है, जिसे दोपहर के भोजन के साथ लिया जा सकता है।   संतुलित सेवन है जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि मखाना एक सुपरफूड जरूर है, लेकिन इसका सही तरीके से और संतुलित मात्रा में सेवन करना जरूरी है। गर्मियों में हल्के और हाइड्रेटिंग विकल्प अपनाकर इसे और भी स्वास्थ्यवर्धक बनाया जा सकता है।

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डिप्रेशन और शारीरिक निष्क्रियता बढ़ा रहे गंभीर बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में यह सामने आया है कि डिप्रेशन और शारीरिक निष्क्रियता मिलकर बुजुर्गों में कई गंभीर बीमारियों के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं। खासतौर पर कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी–जिसमें डायबिटीज, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी बीमारियां शामिल हैं–का जोखिम काफी बढ़ जाता है। 9 साल की स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े चीन में की गई इस लॉन्ग-टर्म स्टडी में 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 2,661 लोगों को करीब 9 साल तक फॉलो किया गया। शुरुआत में सभी प्रतिभागी इन बीमारियों से मुक्त थे, लेकिन अध्ययन के दौरान 797 लोगों में कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी विकसित हो गई। डिप्रेशन और एक्सरसाइज की कमी का डबल असर स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों को डिप्रेशन था और जो बिल्कुल भी तीव्र शारीरिक गतिविधि (VPA) नहीं करते थे, उनमें इस तरह की बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा पाया गया। यह भी सामने आया कि: डिप्रेशन वाले लेकिन एक्टिव लोग भी जोखिम में रहे बिना डिप्रेशन लेकिन निष्क्रिय लोग भी खतरे से बाहर नहीं थे यानी मानसिक स्वास्थ्य और फिजिकल एक्टिविटी–दोनों ही अलग-अलग तरीके से जोखिम बढ़ाते हैं। एक्सरसाइज से मिल सकती है आंशिक राहत अध्ययन में यह भी पाया गया कि नियमित शारीरिक गतिविधि, खासकर तेज एक्सरसाइज, इस जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकती है। हालांकि यह पूरी तरह से खतरे को खत्म नहीं करती, लेकिन निष्क्रिय लोगों की तुलना में एक्टिव लोगों की स्थिति बेहतर पाई गई। क्यों है यह चिंता का विषय? विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी एक बार हो जाए तो इसे मैनेज करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर ही डिप्रेशन और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। रोकथाम के लिए क्या करें? स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए उम्र बढ़ने के साथ हेल्थ चेकअप और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है

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नई मेडिकल रिसर्च में यह सामने आया है कि Giant Cell Arteritis (GCA) के मरीजों में शुरुआती दौर में लो-डोज Aspirin शुरू करने से दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। हालांकि, इसके साथ एक अहम जोखिम भी जुड़ा है–गंभीर ब्लीडिंग। क्या है स्टडी का निष्कर्ष? 14,000 से अधिक मरीजों पर आधारित इस बड़े अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों ने बीमारी की पहचान के दो हफ्तों के भीतर एस्पिरिन लेना शुरू किया: उनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और मौत जैसे मेजर कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स का खतरा कम हुआ 1 साल और 3 साल दोनों अवधि में यह लाभ देखा गया कुल मृत्यु दर (All-cause mortality) में भी कमी आई लेकिन बढ़ा ब्लीडिंग का खतरा जहां एक ओर दिल से जुड़े जोखिम कम हुए, वहीं दूसरी ओर: पहले साल में गंभीर रक्तस्राव (major haemorrhage) का खतरा बढ़ गया खासकर बुजुर्ग मरीजों में यह जोखिम ज्यादा चिंता का विषय बना हालांकि, 3 साल के बाद यह बढ़ा हुआ ब्लीडिंग रिस्क उतना स्पष्ट नहीं रहा। किन मरीजों को ज्यादा फायदा? स्टडी में यह भी पाया गया कि एस्पिरिन का फायदा सभी में समान नहीं था। महिलाओं में अधिक लाभ देखा गया डायबिटीज वाले मरीजों में भी बेहतर परिणाम मिले इससे साफ है कि इलाज सभी के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। डॉक्टरों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि GCA के मरीजों में एस्पिरिन को “रूटीन दवा” की तरह नहीं दिया जाना चाहिए। हर मरीज के लिए अलग-अलग फैक्टर को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना जरूरी है: कार्डियोवैस्कुलर जोखिम कितना है ब्लीडिंग का खतरा कितना है उम्र और अन्य बीमारियां

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