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Nihang Sikhs End Uttarakhand Border Protest After Talks

उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर खत्म हुआ निहंग सिखों और प्रशासन का गतिरोध, कई घंटे की वार्ता के बाद बनी सहमति

Deepshikha जून 26, 2026 0
Nihang Sikhs gather at the Uttarakhand–Himachal Pradesh border before returning after successful talks with the state administration.
Nihang Sikhs End Border Standoff After Talks with Uttarakhand Administration

 

उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर निहंग सिखों और उत्तराखंड प्रशासन के बीच बना तनाव आखिरकार कई घंटे चली बातचीत के बाद समाप्त हो गया। कर्णप्रयाग झड़प और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर राज्य में प्रवेश की घोषणा के बाद सीमा पर बड़ी संख्या में निहंग सिख एकत्र हुए थे। प्रशासन के साथ सफल वार्ता के बाद अधिकांश लोग वापस लौट गए, जिससे क्षेत्र में हालात सामान्य होने लगे।

कर्णप्रयाग और नगरासू विवाद के बाद बढ़ा था तनाव

निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग झड़प और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड में प्रवेश करने की घोषणा की थी। इसके बाद देहरादून और सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।

कुल्हाल चेक पोस्ट पर जुटे सैकड़ों निहंग सिख

गुरुवार को सैकड़ों निहंग सिख उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट के पास पहुंच गए। पहला जत्था दिनभर हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारा पांवटा साहिब में रुका रहा, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे कई दौर की बातचीत की और उत्तराखंड की ओर प्रस्तावित मार्च को टालने का आग्रह किया।

हाई अलर्ट पर रहा प्रशासन, जगह-जगह की गई बैरिकेडिंग

शुरुआती दौर में बातचीत से समाधान नहीं निकलने पर प्रशासन ने सीमा क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखी।

वार्ता सफल होने के बाद लौटने लगे निहंग सिख

लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद माहौल शांत होने लगा। निहंग सिख छोटे-छोटे समूहों में वहां से लौटने लगे। देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी की ओर जाने वाले मार्ग बंद होने के कारण कई लोग वापस हिमाचल प्रदेश लौट गए।

कुछ प्रतिनिधि देहरादून में रुके

प्रशासन ने कुछ निहंग सिखों को देहरादून स्थित गुरुद्वारा गोबिंद नगर, रेसकोर्स में ठहराया है। यहां प्रशासन और प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत जारी रहने की संभावना है, ताकि विवाद से जुड़े मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

प्रशासन ने ली राहत की सांस

सीमा पर बिना किसी हिंसक घटना के तनाव समाप्त होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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पुणे केतन हत्याकांड: प्रेम संबंध, जबरन तय शादी और 2,004 कॉल; पुलिस जांच में रोज हो रहे नए खुलासे

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे में प्रॉपर्टी डीलर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस वारदात के पीछे प्रेम संबंध, परिवार द्वारा तय की गई शादी और पूर्व नियोजित साजिश की अहम भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया गोयल सह-आरोपी चेतन चौधरी से प्रेम करती थी, लेकिन परिवार ने उसकी शादी आर्थिक रूप से संपन्न अग्रवाल परिवार में तय कर दी थी।   परिवार को पहले से थी रिश्ते की जानकारी पुलिस जांच में सामने आया है कि जनवरी में आयोजित एक कम्युनिटी क्रिकेट मैच के दौरान सिया और चेतन की नजदीकियों की जानकारी परिवार के कुछ सदस्यों को मिल गई थी। हालांकि, दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति में अंतर होने के कारण सिया की भावनाओं को नजरअंदाज कर उसकी सगाई केतन अग्रवाल से करा दी गई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि सिया के भाई साहिल गोयल ने यह जानकारी परिवार के अन्य लोगों से साझा की थी या नहीं। इस संबंध में उससे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई।   चैट डिलीट, 2,004 कॉल और फोरेंसिक जांच जांच में यह भी पता चला है कि घटना से पहले और बाद में सिया और चेतन ने अपने मोबाइल फोन से चैट डिलीट कर दी थी। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए दोनों के मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं। पुलिस के मुताबिक, पिछले छह महीनों में दोनों के बीच 2,004 कॉल हुईं, जिनकी कुल अवधि लगभग 238 घंटे रही। वारदात वाले दिन दोनों एक कैफे में मिले थे, जहां कथित तौर पर हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया गया।   हत्या की साजिश का दावा, जांच जारी पुलिस का दावा है कि लोहागढ़ किले पर पहले से तय इशारे के बाद चेतन चौधरी ने पीछे से केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दे दिया। हालांकि, सिया की मां ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी बेटी ट्रेकिंग पर जाना ही नहीं चाहती थी और उसे केतन व उसके परिवार के कहने पर वहां जाना पड़ा। पुलिस फिलहाल सभी डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच कर रही है।

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जल्द भारत दौरे पर आएंगे डोनाल्ड ट्रंप, पीएम मोदी से मुलाकात की तैयारी; अमेरिकी विदेश मंत्री ने किया ऐलान

  नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के रणनीतिक तथा व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना होगा। रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छे संबंध हैं और दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित है यात्रा समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएंगे। यही हमारी कोशिश है और इस दिशा में तैयारियां जारी हैं।" अंतिम चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मार्को रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों पक्ष जल्द ही समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। 'भारत अमेरिका का करीबी साझेदार' अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का बहुत करीबी साथी और सहयोगी है। दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हुए हैं और भविष्य में इन्हें और विस्तार देने की दिशा में काम किया जा रहा है।" मोदी-ट्रंप मुलाकात पर रहेगी नजर ट्रंप के प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक में व्यापार समझौते के अलावा रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, तकनीकी साझेदारी, निवेश और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

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Bageshwar Dham chief Dhirendra Krishna Shastri reacts to the Ayodhya Ram Temple donation embezzlement case during an event in Jakarta.
'रावण ने सिर्फ माता सीता का हरण किया था, यहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था लूटी गई'... राम मंदिर दान मामले पर बोले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

  अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल धन की चोरी नहीं हुई, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। इस बीच मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा? राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रावण ने केवल माता सीता का हरण किया था, लेकिन यहां राम मंदिर के दानपात्र से श्रद्धालुओं की आस्था ही लूट ली गई। उन्होंने कहा, "रावण ने माता जानकी का हरण किया था, जिसका परिणाम उसके पूरे परिवार के विनाश के रूप में सामने आया। करोड़ों लोगों द्वारा भगवान राम के मंदिर में श्रद्धा से दिए गए दान में चोरी करने वालों को कानून का दंड भी मिलेगा और ईश्वर का न्याय भी मिलेगा।" 'जांच आगे बढ़ेगी तो और लोग भी पकड़े जाएंगे' धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। उनके अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर और भी बहुत कुछ कह सकते हैं, लेकिन फिलहाल इतना ही कहना चाहते हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को अपने कृत्यों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में राम मंदिर दान गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर दान गबन प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। विपक्ष मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है। चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि उसे इस संबंध में किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नहीं है। योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच जारी, अदालत में तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त रकम और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।  

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