पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे दो टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है और अब तक 13 भारतीय पोत इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal ने बताया कि ‘सिमी’ नाम का एलपीजी टैंकर 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया। वहीं ‘एनवी सनशाइन’ टैंकर ने भी गुरुवार को सुरक्षित रूप से यह मार्ग पार कर लिया।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों जहाज भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
मार्शल द्वीप के ध्वज वाला ‘सिमी’ टैंकर करीब 19,965 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इसके 16 मई को Kandla पहुंचने की संभावना है।
वहीं वियतनाम के ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ संयुक्त अरब अमीरात की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर रवाना हुआ है और इसके 18 मई को Mangaluru पहुंचने की उम्मीद है। दोनों जहाजों में मौजूद एलपीजी Indian Oil Corporation यानी IOC का बताया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह समुद्री क्षेत्र कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद अब तक कुल 13 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं।
इनमें देश गरिमा, शिवालिक, ग्रीन सान्वी, नंदा देवी, पाइन गैस और एमवी सर्वशक्ति जैसे पोत शामिल हैं। हालांकि अभी भी खाड़ी क्षेत्र में करीब 12 भारतीय जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
इसी बीच भारत के ध्वज वाली ‘हाजी अली’ नाम की मशीनी पाल नौका ओमान के जलक्षेत्र में हमले का शिकार हो गई। हमले के बाद लकड़ी से बनी इस पारंपरिक नौका में आग लग गई और बाद में यह समुद्र में डूब गई।
यह नौका सोमालिया से UAE के शारजाह जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक नौका पर सवार चालक दल के सभी 14 सदस्यों को ओमान तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचा लिया है।
अधिकारियों ने बताया कि सभी चालक दल के सदस्यों को ओमान के डिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी स्थिति सुरक्षित है। भारत सरकार ओमान प्रशासन और भारतीय दूतावास के संपर्क में है और उन्हें जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई विदेशी जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत लगातार अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत सावित्री और सत्यवान की अमर कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें सावित्री ने अपने तप और पतिव्रता धर्म से यमराज से अपने पति के प्राण वापस प्राप्त किए थे। यही कारण है कि यह व्रत स्त्री शक्ति, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। 2026 में दो बार मनाया जाएगा वट सावित्री व्रत वट सावित्री व्रत हर साल दो तिथियों पर मनाया जाता है। पहला ज्येष्ठ अमावस्या को और दूसरा ज्येष्ठ पूर्णिमा को। साल 2026 में वट सावित्री अमावस्या 16 मई को मनाई जाएगी, जबकि वट पूर्णिमा व्रत 29 जून 2026 को रखा जाएगा। दोनों ही दिनों वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। वट सावित्री अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 5:11 बजे शुरू होगी और 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 7:12 बजे से सुबह 8:24 बजे तक वट पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 को सुबह 3:06 बजे शुरू होगी और 30 जून को सुबह 5:26 बजे समाप्त होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 8:55 बजे से सुबह 10:40 बजे तक ऐसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा व्रत वाले दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और साफ या नए वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद वट वृक्ष के नीचे पूजा की जाती है। पूजा में रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और जल का उपयोग किया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा करती हैं और कच्चा सूत या मौली पेड़ के चारों ओर लपेटती हैं। इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है और पति की लंबी उम्र तथा सुखी जीवन की कामना की जाती है। क्यों होती है वट वृक्ष की पूजा? धार्मिक मान्यताओं में वट वृक्ष को दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि इसके विभिन्न भागों में त्रिदेव का वास होता है। • जड़ में ब्रह्मा का निवास • तने में भगवान विष्णु का वास • शाखाओं में भगवान शिव का स्थान माना जाता है इसी वजह से वट वृक्ष की पूजा को अत्यंत शुभ माना गया है। व्रत का धार्मिक महत्व मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से किया गया वट सावित्री व्रत महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाने वाला और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है।
Madhya Pradesh के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद पर आज बड़ा फैसला आ सकता है। Madhya Pradesh High Court की इंदौर खंडपीठ ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 15 मई की तारीख तय की है। फैसले से पहले प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन ने की शांति की अपील धार जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि भोजशाला परिसर Archaeological Survey of India यानी ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है। प्रशासन सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर लगातार नजर बनाए हुए है। किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का बयान मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम Jagdish Devda ने कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो भी निर्णय आए, उसे शांति और संयम के साथ स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि धार में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। क्या है भोजशाला-कमाल मौला विवाद? धार स्थित भोजशाला को हिंदू समुदाय माता वाग्देवी यानी देवी सरस्वती का मंदिर मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसके अलावा जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह परिसर मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल का हिस्सा रहा है। ASI सर्वे में क्या सामने आया? ASI ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में संकेत दिए गए कि परिसर में मौजूद संरचना से पहले यहां परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल इमारत मौजूद थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान विवादित ढांचे के निर्माण में पुराने मंदिरों के हिस्सों का दोबारा इस्तेमाल किया गया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख इस बात के प्रमाण हैं कि परिसर मूल रूप से मंदिर था। 98 दिनों तक चला था सर्वे हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को ASI को वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसके बाद 22 मार्च 2024 से सर्वे शुरू हुआ, जो करीब 98 दिनों तक चला। ASI ने 15 जुलाई 2024 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में जमा की थी। अब सभी की नजर हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।
भारत को वैश्विक आईटी सुरक्षा क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। India ने कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड (CCDB) का अध्यक्ष पद संभाल लिया है। यह जिम्मेदारी अप्रैल 2026 से अप्रैल 2028 तक के लिए भारत को सौंपी गई है। इसे अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा मानकों के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और तकनीकी क्षमता का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला 14 से 16 अप्रैल 2026 के बीच जापान की राजधानी Tokyo में आयोजित कॉमन क्राइटेरिया रिकॉग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) की पहली तिमाही बैठक में लिया गया। क्या है CCRA? कॉमन क्राइटेरिया रिकॉग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसके तहत आईटी सुरक्षा प्रमाणपत्रों को सदस्य देशों के बीच आपसी मान्यता दी जाती है। इसका उद्देश्य सुरक्षित आईटी उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाना और वैश्विक सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है। CCRA के तहत मूल्यांकित और प्रमाणित उत्पादों को सदस्य देशों में दोबारा प्रमाणन की जरूरत नहीं पड़ती। इससे टेक्नोलॉजी कंपनियों और आईटी उद्योग को बड़ा फायदा मिलता है। CCDB की क्या है भूमिका? कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड यानी CCDB, CCRA का तकनीकी केंद्र माना जाता है। यह बोर्ड आईटी सुरक्षा मूल्यांकन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों और मूल्यांकन प्रक्रिया को संचालित करता है। CCDB का मुख्य काम कॉमन क्राइटेरिया (CC) और कॉमन इवैल्यूएशन मेथडोलॉजी (CEM) के लिए वैश्विक तकनीकी कार्यक्रम तैयार करना और उन्हें अपडेट करना है। यह संस्था दुनिया भर में सुरक्षित आईटी उत्पादों के लिए मानक तय करने में अहम भूमिका निभाती है। 2013 से सक्रिय सदस्य है भारत भारत 16 सितंबर 2013 से CCRA का सक्रिय सदस्य रहा है। देश में यह काम Ministry of Electronics and Information Technology और STQC महानिदेशालय के जरिए किया जाता है, जो आईटी सुरक्षा मूल्यांकन के लिए अधिकृत प्रमाणन संस्था है। फिलहाल CCRA में 20 सर्टिफिकेट-अथॉराइजिंग देश और 18 सर्टिफिकेट-कंज्यूमिंग देश शामिल हैं। ये सभी मिलकर वैश्विक आईटी सुरक्षा मानकों और प्रमाणन प्रणाली को मजबूत बनाने का काम करते हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? विशेषज्ञों के मुताबिक, CCDB की अध्यक्षता मिलने से भारत अब वैश्विक साइबर सुरक्षा और आईटी सुरक्षा मानकों को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे भारत को उभरती तकनीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार करने में प्रभाव बढ़ाने का मौका मिलेगा। दो साल की इस अवधि में भारत वैश्विक आईटी सुरक्षा प्रमाणन व्यवस्था के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में निर्णायक भूमिका निभा सकेगा। इसे डिजिटल और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।