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Miller’s Error Hands GT a 1-Run Win

DC vs GT: डेविड मिलर की ‘ब्रेन फेड’ गलती से हारी दिल्ली, आखिरी गेंद तक गया रोमांचक मुकाबला

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
David Miller reacts after missing a shot during DC vs GT IPL 2026 last-over thriller.
David Miller Brain Fade DC vs GT IPL 2026

आईपीएल 2026 के बेहद रोमांचक मुकाबले में Delhi Capitals को Gujarat Titans के खिलाफ सिर्फ 1 रन से हार का सामना करना पड़ा। यह मैच आखिरी गेंद तक गया, लेकिन अंत में एक छोटी सी गलती ने दिल्ली से जीत छीन ली। इस हार के केंद्र में रहे David Miller, जिनके ‘ब्रेन फेड’ फैसले ने मैच का रुख बदल दिया।

आखिरी पलों में क्या हुई चूक?
दिल्ली को जीत के लिए अंतिम दो गेंदों पर सिर्फ 2 रन चाहिए थे। ऐसे में प्रसिद्ध कृष्णा की दूसरी आखिरी गेंद पर मिलर के पास सिंगल लेने का मौका था, जिससे स्कोर बराबर हो सकता था और मैच सुपर ओवर में जा सकता था। लेकिन मिलर ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में सिंगल लेने से इनकार कर दिया।

आखिरी गेंद पर भी वह बड़ा शॉट नहीं लगा पाए और दबाव में चूक गए। इसके बाद रन लेने की कोशिश में Kuldeep Yadav रन आउट हो गए, जहां Jos Buttler ने विकेट के पीछे शानदार भूमिका निभाई। इस तरह दिल्ली की टीम जीत के बेहद करीब पहुंचकर भी हार गई।

राहुल की पारी गई बेकार
इस मैच में KL Rahul ने 52 गेंदों में 92 रनों की शानदार पारी खेली थी, जबकि Pathum Nissanka ने 41 रन बनाकर अच्छी शुरुआत दिलाई। वहीं मिलर ने भी 40+ की उपयोगी पारी खेली, लेकिन अंत का एक फैसला भारी पड़ गया।

गुजरात की दमदार बल्लेबाजी
पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात के कप्तान Shubman Gill ने 70 रन की शानदार पारी खेली। उनके अलावा Jos Buttler (52 रन) और Washington Sundar (55 रन) ने टीम को 210 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।


क्रिकेट में एक छोटी सी गलती भी मैच का नतीजा बदल सकती है और इस मुकाबले में वही देखने को मिला। डेविड मिलर का यह फैसला लंबे समय तक चर्चा में रहेगा और दिल्ली के लिए यह हार एक बड़ा सबक बन सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Tejas Networks के शेयरों में गिरावट, Q4 में बढ़ा घाटा; रेवेन्यू में 82% की भारी कमी

  नई दिल्ली: टेलीकॉम इक्विपमेंट निर्माता Tejas Networks के शेयरों में बुधवार को दबाव देखने को मिला। मार्च तिमाही (Q4 FY26) के कमजोर नतीजों के बाद कंपनी का स्टॉक करीब 4.5% तक गिर गया। शेयरों में गिरावट 16 अप्रैल को सुबह करीब 10:32 बजे कंपनी के शेयर 4.4% गिरकर ₹429.95 पर ट्रेड कर रहे थे। निवेशकों ने बढ़ते घाटे और गिरते रेवेन्यू को लेकर चिंता जताई। घाटा तीन गुना तक बढ़ा कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा बढ़कर ₹211.34 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹71.80 करोड़ था। यानी साल-दर-साल घाटे में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। रेवेन्यू में भारी गिरावट तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 82.55% घटकर ₹332.69 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹1,906.94 करोड़ था। यह गिरावट कंपनी के प्रदर्शन पर बड़ा असर डालती दिखी। EBITDA भी निगेटिव Q4FY26 में EBITDA लॉस ₹118 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन -35.53% पर पहुंच गया, जो पिछले साल 6.37% था। यह कंपनी की ऑपरेशनल कमजोरी को दर्शाता है। मैनेजमेंट का बयान कंपनी के COO रहे Arnob Roy ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4G/5G वायरलेस प्रोडक्ट्स के लिए कंपनी को पहली कमर्शियल ऑर्डर मिला है। साथ ही NEC के साथ 5G MIMO रेडियो सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट और अमेरिका में 5G ट्रायल्स में प्रगति हुई है। ऑर्डर बुक में सुधार CFO Sumit Dhingra के अनुसार, कंपनी की ऑर्डर बुक ₹1,514 करोड़ पर पहुंच गई है, जो सालाना आधार पर 49% की बढ़त है। हालांकि, कंपनी पर कर्ज का दबाव भी बना हुआ है। बड़े मैनेजमेंट बदलाव Arnob Roy को नया MD और CEO नियुक्त किया गया (अगस्त 2028 तक) Preetham Uthaiah को नया COO बनाया गया AVS Prasad 16 मई से CFO का पद संभालेंगे Srikumar Vijayasekharan को स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया

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ब्रांडिंग से लेकर सिक्योरिटी तक, जानिए क्यों इतनी महंगी होती हैं IPL टीम बसें?

नई दिल्ली, एजेंसियां। IPL में टीम बसें अब सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि ये चलते-फिरते फाइव स्टार होटल का रूप ले चुकी हैं। खिलाड़ियों की सुविधा, आराम और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन बसों को खास तौर पर डिजाइन किया जाता है। इनमें वही सुविधाएं मिलती हैं जो किसी लग्जरी लाउंज या प्राइवेट स्पेस में होती हैं।   एक बस की कीमत 70 लाख से 1.5 करोड़ तक आईपीएल टीम बसों की कीमत आम बसों से कई गुना ज्यादा होती है। एक फ्रेंचाइजी अपनी जरूरत और कस्टमाइजेशन के आधार पर एक बस पर लगभग 70 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक खर्च करती है। हाई-टेक फीचर्स, प्रीमियम इंटीरियर और ब्रांडिंग के कारण इनकी लागत तेजी से बढ़ जाती है।   अंदर मिलती हैं लग्जरी सुविधाएं इन बसों के अंदर चौड़ी और रिक्लाइनिंग सीट्स, अतिरिक्त लेगरूम, मोबाइल चार्जिंग पोर्ट और कई बार मसाज फंक्शन वाली सीट्स भी होती हैं। इसके अलावा हाई-स्पीड वाई-फाई, एलईडी स्क्रीन, प्रीमियम साउंड सिस्टम और मिनी फ्रिज जैसी सुविधाएं भी मौजूद रहती हैं। एम्बिएंट लाइटिंग और क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम खिलाड़ियों को आरामदायक माहौल देते हैं।   ब्रांडिंग और सुरक्षा का खास ध्यान हर टीम अपनी बस को अपने रंग, लोगो और खिलाड़ियों की तस्वीरों से सजाती है, जिससे यह एक चलती-फिरती ब्रांड पहचान बन जाती है। मैच के दिनों में इन बसों को कड़ी सुरक्षा के बीच चलाया जाता है और कई बार पुलिस एस्कॉर्ट भी साथ रहता है।   टीम बॉन्डिंग का अहम हिस्सा आज के समय में ये बसें सिर्फ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि टीम के “मोबाइल ड्रेसिंग रूम” बन चुकी हैं। खिलाड़ी इन बसों में रणनीति पर चर्चा करते हैं, म्यूजिक सुनते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं। तेज़ शेड्यूल वाले आईपीएल में ये सफर टीम बॉन्डिंग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल 2026 (Indian Premier League) में ऑरेंज कैप की दौड़ और रोमांचक हो गई है। अब तक सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे Vaibhav Sooryavanshi को बड़ा झटका लगा है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में वे पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गए, जिससे वे सीधे पहले स्थान से तीसरे नंबर पर खिसक गए।   हेनरिक क्लासेन बने नए नंबर-1 इस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए Heinrich Klaasen ने ऑरेंज कैप पर कब्जा कर लिया। उन्होंने 26 गेंदों में 40 रनों की तेज पारी खेली, जिसमें एक चौका और तीन छक्के शामिल थे। क्लासेन अब 5 मैचों में 224 रन बनाकर टॉप पर पहुंच गए हैं, उनका स्ट्राइक रेट और औसत भी प्रभावशाली है।   ईशान किशन की दमदार छलांग सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान Ishan Kishan ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए दूसरे स्थान पर कब्जा जमा लिया है। उन्होंने उसी मैच में 44 गेंदों पर 91 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। अब उनके कुल रन 213 हो गए हैं।   सूर्यवंशी तीसरे स्थान पर वैभव सूर्यवंशी अब 5 मैचों में 200 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं। उनका स्ट्राइक रेट 263.16 का रहा है, जो अब तक का सबसे तेज माना जा रहा है, लेकिन हालिया मैच में शून्य पर आउट होने का खामियाजा उन्हें रैंकिंग में गिरावट के रूप में भुगतना पड़ा।   आगे और बदल सकती है तस्वीर ऑरेंज कैप की रेस अभी खुली हुई है और आने वाले मैचों में इसमें और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजस्थान रॉयल्स का अगला मुकाबला कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ है, जहां सूर्यवंशी के पास वापसी का मौका होगा।

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