रांची। झारखंड टी20 क्रिकेट लीग 2026 अपने रोमांचक अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में छोटानागपुर रॉयल्स और जमशेदपुर स्टीलर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बना ली है। अब 23 जून को दोनों टीमें खिताब के लिए आमने-सामने होंगी।
पहले सेमीफाइनल में जमशेदपुर स्टीलर्स ने लीग चरण की शीर्ष टीम कोयलांचल सुपर किंग्स को 79 रन से हराकर सभी को चौंका दिया। स्टीलर्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 2 विकेट पर 250 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की जीत के हीरो कुमार करण रहे, जिन्होंने 63 गेंदों में नाबाद 143 रन की रिकॉर्डतोड़ पारी खेली। रवि शर्मा ने भी 81 रन बनाकर उनका शानदार साथ दिया। जवाब में कोयलांचल सुपर किंग्स की टीम 171 रन पर सिमट गई। कप्तान उत्कर्ष सिंह ने 101 रन बनाए, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके।
दूसरे सेमीफाइनल में रांची टाइटन्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 220 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी छोटानागपुर रॉयल्स ने आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 17.2 ओवर में ही मुकाबला सात विकेट से जीत लिया। कप्तान विराट सिंह ने 77 रन की शानदार पारी खेली, जबकि मो. नाजिम सिद्दीकी ने 43 और कुमार कुशाग्रा ने 58 रन बनाकर जीत में अहम योगदान दिया।
झारखंड टी20 क्रिकेट लीग 2026 का फाइनल मुकाबला 23 जून को शाम 6 बजे जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स, रांची में खेला जाएगा। मैच का सीधा प्रसारण डीडी स्पोर्ट्स पर होगा, जबकि लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि स्टेडियम में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि पहला झारखंड टी20 लीग खिताब किस टीम के नाम होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। 15 साल के विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी-20 टीम में सिलेक्शन हो गया है। उन्हें सीनियर टीम में 3 नंबर की जर्सी मिली है। भारत का यह दौरा 26 जून से शुरू हो रहा है, जिसके लिए BCCI ने सोशल मीडिया पर वैभव का एक वीडियो शेयर किया है। टीम इंडिया का पहला बैच मंगलवार 23 जून को आयरलैंड के लिए रवाना हो गया। वैभव बोले-शब्दों में बयां नहीं कर सकता भारतीय टीम में चुने जाने पर सूर्यवंशी ने कहा कि इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि जिस दिन उन्होंने पहली बार बल्ला थामकर मैदान पर कदम रखा था, आज वह सपना पूरा हो गया है। सूर्यवंशी के मुताबिक, उनके अब तक के करियर का यह सबसे बड़ा कदम है और इस अहसास को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। वैभव पहली बार नेशनल टीम मे सूर्यवंशी को पहली बार भारतीय टीम में जगह दी गई है। वे सबसे कम उम्र में नेशनल टीम में सिलेक्ट हुए भारतीय बने। इंडिया की जर्सी देखकर नहीं रुकी मुस्कान थ्रो-डाउन स्पेशलिस्ट रघु ने सूर्यवंशी को उनके होटल रूम में टीम इंडिया की जर्सी सौंपी। सूर्यवंशी ने बताया कि जब उन्होंने जर्सी पर अपना नाम लिखा देखा, तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। वह अपनी खुशी छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि यह ऐसा पल था, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी और जब वह सच हुआ तो समझ नहीं आया कि कैसे प्रतिक्रिया दें। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी-20 टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और प्रिंस यादव। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद आयरलैंड के बेलफास्ट में 26 या 28 जून को होने वाले मैच से वैभव सूर्यवंशी इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू कर सकते हैं। अगर वह आयरलैंड या इंग्लैंड के खिलाफ मैदान पर उतरते हैं, तो वह 15 साल की उम्र में भारत के लिए खेलने वाले सबसे युवा इंटरनेशनल क्रिकेटर बन जाएंगे। ऐसा होने पर वे सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ देंगे, जिन्होंने 16 साल 205 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने वैभव सूर्यवंशी ने IPL 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑरेंज कैप अपने नाम की। उन्होंने 16 मैचों में 776 रन बनाए, जो इस सीजन किसी भी बल्लेबाज द्वारा सबसे ज्यादा हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 1 शतक और 5 अर्धशतक निकले। वैभव ने सबसे कम उम्र में ऑरेंज कैप जीतने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। उन्होंने साई सुदर्शन का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने IPL 2025 में 23 साल 237 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।
दांबुला, एजेंसियां। महज 15 साल के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका-ए के खिलाफ ट्राई नेशन सीरीज के फाइनल में ऐसी विस्फोटक पारी खेली, जिसने भारतीय क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। दांबुला में खेले गए खिताबी मुकाबले में वैभव ने केवल 29 गेंदों पर 94 रन ठोककर भारत-ए की 66 रन की शानदार जीत की नींव रखी। उनकी इस यादगार पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। 11 गेंदों में फिफ्टी, टूटा युवराज सिंह का रिकॉर्ड इतना ही नहीं वैभव ने अपनी पारी के दौरान सिर्फ 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जो लिस्ट-ए क्रिकेट ही नहीं, बल्कि किसी भी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में किसी भारतीय द्वारा लगाया गया सबसे तेज अर्धशतक बन गया। बता दे इससे पहले यह रिकॉर्ड युवराज सिंह के नाम था, जिन्होंने 2007 टी20 विश्व कप में 12 गेंदों में फिफ्टी लगाई थी। वैभव की फास्टेस्ट फिफ्टी में 5 चौके और 5 छक्के शामिल रहे और उन्होंने इस दौरान सिर्फ एक डॉट बॉल खेली। वैभव ने अपने पुरे पारी में 10 चौके और 8 छक्के लगाई। हालांकि वह शतक से महज छह रन दूर रह गए, लेकिन उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने श्रीलंका-ए की वापसी की उम्मीदें खत्म कर दीं। 'मुझ पर कोई दबाव नहीं था' मैच के बाद पुरस्कार समारोह में वैभव ने कहा कि फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में भी उन्होंने किसी तरह का दबाव महसूस नहीं किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती 10 ओवर के लिए बनाई गई रणनीति पर अमल किया और वही उनकी सफलता की कुंजी बनी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके थे, लेकिन कोचों से बातचीत के बाद उनका आत्मविश्वास लौटा। हर बड़े मैच में चमक रहे वैभव 2026 में वैभव सूर्यवंशी लगातार बड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। अंडर-19 विश्व कप फाइनल में 175 रन, आईपीएल प्लेऑफ में विस्फोटक पारियां और अब ट्राई सीरीज फाइनल में 94 रन की धमाकेदार पारी ने साबित कर दिया है कि वह बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। इस प्रदर्शन के बाद जल्द ही भारतीय सीनियर टी20 टीम में उनके डेब्यू की संभावनाएं भी मजबूत हो गई हैं।
चेन्नई: क्रिकेट के मैदान पर एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए, जब एक उत्साहित प्रशंसक सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे रोहित शर्मा के पास पहुंच गया। अपने पसंदीदा खिलाड़ी के प्रति दीवानगी दिखाने की कोशिश में फैन ने सभी नियमों को दरकिनार कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए मैदान पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि फैन अचानक रोहित शर्मा के बेहद करीब पहुंच गया, जिससे भारतीय कप्तान पूरी तरह चौंक गए। अचानक हुई इस घटना से रोहित कुछ क्षणों के लिए असहज नजर आए। यदि साथी खिलाड़ी और सुरक्षाकर्मी तुरंत सक्रिय नहीं होते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने मैदान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चेपॉक जैसे बड़े और प्रतिष्ठित स्टेडियम में खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। हालांकि फैन का उद्देश्य अपने पसंदीदा खिलाड़ी के प्रति प्यार और सम्मान जताना था, लेकिन इस तरह की हरकत भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। तुरंत हरकत में आए सुरक्षाकर्मी घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों ने सक्रियता दिखाते हुए फैन को मैदान से बाहर ले जाया। सफेद यूनिफॉर्म में मौजूद सुरक्षा स्टाफ और अन्य अधिकारियों ने स्थिति को तेजी से नियंत्रित किया, जिससे मैच से जुड़े कार्यक्रमों में कोई बाधा नहीं आई। फैंस की दीवानगी, लेकिन सुरक्षा भी जरूरी क्रिकेट में खिलाड़ियों के प्रति प्रशंसकों का प्यार और जुनून कोई नई बात नहीं है। लेकिन खिलाड़ियों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा नियमों को तोड़ना न सिर्फ खेल की गरिमा को प्रभावित करता है, बल्कि खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करता है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि फैंस का प्यार अपनी जगह है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।