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नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, 40 साल बाद टूटेगा इंतजार

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Modi New Zealand Visit
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वेलिंगटन, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस यात्रा की पुष्टि करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है। यह पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को न्यूजीलैंड के सबसे बड़े शहर ऑकलैंड पहुंचेंगे।

 

क्रिस्टोफर लक्सन ने क्या कहा?

 

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा, "भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्यूजीलैंड दौरा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। हम व्यापार, निवेश, शिक्षा, पर्यटन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए उत्सुक हैं।"

 

व्यापार और सुरक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा

 

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच व्यापार एवं निवेश, समुद्री सुरक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, खेल और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। दोनों नेता द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार करेंगे।

 

FTA के बाद पहली उच्चस्तरीय यात्रा

 

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और न्यूजीलैंड ने हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया है। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।

 

द्विपक्षीय रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

 

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नया अध्याय जोड़ सकती है। दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में इस दौरे को अहम कदम माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Firefighters battle massive wildfires in southern France as flames spread across forests amid extreme heat, drought and strong winds.
दक्षिणी फ्रांस में भीषण जंगल की आग, 900 हेक्टेयर वन क्षेत्र राख; 800 से ज्यादा दमकलकर्मी राहत अभियान में जुटे

पेरिस: दक्षिणी फ्रांस में भीषण गर्मी और लंबे समय से पड़े सूखे के बीच जंगलों में लगी आग ने व्यापक तबाही मचाई है। औडे (Aude) और हेराल्ट (Hérault) क्षेत्रों में भड़की आग अब तक करीब 900 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुकी है। आग पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, आग बुझाने के लिए 800 से अधिक दमकलकर्मी, 150 दमकल वाहन और चार वाटर बॉम्बर विमान तैनात किए गए हैं। हवाई और जमीनी स्तर पर लगातार अभियान चलाया जा रहा है ताकि आग को आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने से रोका जा सके। 7,000 से अधिक जंगलों में आग की घटनाएं दर्ज फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने बताया कि इस वर्ष गर्मियों की शुरुआत के बाद से देशभर में 7,000 से अधिक जंगलों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में अब तक 8,700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ता तापमान, सूखा और तेज हवाएं आग के खतरे को और गंभीर बना रही हैं। आग फैलने से रोकने की कोशिश जारी औडे क्षेत्र के प्रीफेक्ट एलेन बुकेट ने बताया कि दमकल विभाग आग पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। हालांकि, भूमध्यसागरीय क्षेत्र में चलने वाली तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। पड़ोसी क्षेत्रों में दो अन्य स्थानों पर लगी आग पर नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन प्रभावित इलाकों में कई जगह अब भी धधकती आग चिंता का कारण बनी हुई है। रिजॉर्ट और शिविरों से लोगों को सुरक्षित निकाला गया दक्षिणी फ्रांस में टेट नदी के आसपास जंगल में आग फैलने के बाद एक रिजॉर्ट के निकट स्थित शिविरों को एहतियातन खाली कराया गया। प्रशासन ने क्षेत्र के सभी लाइफगार्ड स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और लोगों से नदी में तैराकी से बचने की अपील की है। वन्यजीवों पर भी बढ़ा संकट विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में लगी आग केवल पेड़-पौधों को ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। आग के कारण बड़ी संख्या में पशु-पक्षियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है और जैव विविधता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी फ्रांस के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना बेहद कम है, जबकि तापमान ऊंचा बना रहेगा। ऐसे में भूमध्यसागरीय क्षेत्र की तेज हवाएं जंगल की आग को और अधिक भड़का सकती हैं, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।  

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अमेरिका में सुस्त पड़ा जॉब मार्केट, जून में सिर्फ 57 हजार नई नौकरियां

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं।   ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।   बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है।   श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है।   टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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ट्रंप का बड़ा दावा: 'ईरान ने लगभग सभी शर्तें मान लीं', बताया क्यों नहीं बंद किया गया होर्मुज स्ट्रेट

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खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मोजतबा! सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक कार्यक्रम से दूरी की संभावना

तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां जारी हैं। इस बीच उनके बेटे मोजतबा खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत स्थित प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही ने कहा है कि सुरक्षा कारणों से मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना बेहद कम है। सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक उपस्थिति पर जताई चिंता इंडिया टुडे से बातचीत में आयतुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मौजूदा हालात में मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इसी वजह से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि मोजतबा लोगों के बीच जाकर उनसे मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसकी अनुमति नहीं दे रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस समय उनकी सार्वजनिक मौजूदगी सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है। तेहरान रवाना होने से पहले दिया बयान नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से तेहरान रवाना होने से पहले इलाही ने कहा कि पिछले सप्ताह उनकी ईरान यात्रा के दौरान उन लोगों से मुलाकात हुई थी, जो मोजतबा खामेनेई के संपर्क में थे। उन्हीं से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने यह बात साझा की। ईरान में कई दिनों तक चलेगा राजकीय शोक आयतुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में कई दिनों तक राजकीय शोक और अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य इस्लामिक गणराज्य के प्रति जनता की एकजुटता और समर्थन को प्रदर्शित करना है। देशभर में शोक का माहौल उन्होंने कहा कि खामेनेई के निधन से पूरे ईरान में गहरा शोक है। बड़ी संख्या में लोग उन्हें देश का मजबूत नेतृत्वकर्ता और प्रेरणा का स्रोत मानते थे। उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी कमी की भरपाई करना आसान नहीं होगा। इलाही ने कहा कि ईरान के विभिन्न प्रांतों के अलावा कई अन्य देशों से भी लोग तेहरान पहुंच रहे हैं, ताकि दिवंगत नेता को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। अंतिम संस्कार में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार में कई देशों के प्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटी हुई हैं। फिलहाल मोजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर अंतिम निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के आधार पर लिया जाएगा।  

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