दुनिया

China Steps In for Middle East Peace

मिडिल ईस्ट संकट: ट्रंप-ईरान टकराव के बीच चीन ने शांति के लिए बढ़ाया हाथ

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
China calls for peace amid US Iran tensions with diplomats discussing Middle East crisis
China Peace Efforts Middle East Crisis

बीजिंग/मिडिल ईस्ट: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच जहां दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, वहीं चीन ने युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

बहरीन के साथ मिलकर शांति पहल

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल ज़यानी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि:

  • चीन युद्ध खत्म कराने और स्थिरता लाने के लिए तैयार है
  • बहरीन के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयास किए जाएंगे

चीन का साफ संदेश: ‘आक्रामकता का विरोध’

वांग यी ने स्पष्ट किया कि:

  • चीन किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ है
  • क्षेत्र में संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान चाहता है

चीन-पाकिस्तान की 5 सूत्रीय योजना

चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक पांच सूत्रीय पहल भी पेश की है, जिसमें शामिल हैं:

  1. नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर हमले रोकना
  2. युद्धविराम लागू करना
  3. होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना
  4. समुद्री व्यापार और आवाजाही को सामान्य करना
  5. क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करना

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर जोर

चीन ने कहा कि:

  • युद्धविराम अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जरूरत है
  • UN सिक्योरिटी काउंसिल को तनाव कम करने और बातचीत बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए

बहरीन की चिंता

बहरीन ने भी माना कि:

  • खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा गंभीर खतरे में है
  • हॉर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही प्रभावित हो रही है

बहरीन ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के जरिए समाधान और चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही।

‘ग्लोबल साउथ’ पर फोकस

चीन ने खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति बताते हुए कहा कि वह:

  • पाकिस्तान के साथ मिलकर शांति बहाल करने में योगदान देगा
  • खासकर छोटे और विकासशील देशों (Global South) के हितों की रक्षा करेगा
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Italian Prime Minister Giorgia Meloni speaking Hindi with Narendra Modi during Italy meeting
पीएम मोदी के सामने हिंदी बोलने लगीं मेलोनी, ‘परिश्रम’ वाले बयान का वीडियो वायरल

Giorgia Meloni ने Narendra Modi की मौजूदगी में हिंदी बोलकर सभी का ध्यान खींच लिया। इटली दौरे के दौरान मेलोनी ने हिंदी में कहा— “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मेलोनी ने हिंदी में क्या कहा? इटली की प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारतीय शब्द है जो भारत और इटली के रिश्तों को बहुत अच्छी तरह व्यक्त करता है— “परिश्रम”। उन्होंने कहा: “परिश्रम का अर्थ है कड़ी मेहनत। भारत में एक लोकप्रिय कहावत है— परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। यानी मेहनत ही सफलता का रास्ता बनाती है।” मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली अपने संबंधों को इसी सोच और सहयोग के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारत-इटली रिश्तों को मिली नई दिशा भारत और इटली के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नई तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। पीएम मोदी ने क्या कहा? संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में रोम पहुंचे थे। मेलोनी से मुलाकात के दौरान उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मिले मोदी अपने इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी ने Sergio Mattarella से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने: व्यापार प्रौद्योगिकी स्वच्छ ऊर्जा संस्कृति और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। तेजी से बढ़ा भारत-इटली व्यापार इटली में भारतीय दूतावास के मुताबिक, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। साल 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार लगभग 14.25 अरब यूरो तक पहुंच गया। इसमें: भारत का निर्यात: 8.55 अरब यूरो इटली का भारत को निर्यात: 5.70 अरब यूरो रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मेलोनी का हिंदी बोलने वाला वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे भारत-इटली संबंधों की बढ़ती नजदीकी का प्रतीक बताया है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Indian software engineers affected by US tech layoffs and H-1B visa uncertainty in Silicon Valley

अमेरिका में H-1B वीजा धारकों पर संकट, नौकरी जाने के बाद 60 दिन में ढूंढनी होगी नई जॉब

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UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, अफगानिस्तान में हिंसा और आतंकवाद पर उठाए सवाल

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ईरानी जहाज पर चढ़ी US नेवी, ट्रंप के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव

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क्या क्यूबा पर हमला कर सकता है अमेरिका? बढ़ते तनाव के बीच कई संकेतों ने बढ़ाई चिंता

क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिकी गतिविधियों और हालिया राजनीतिक बयानों के बाद यह चर्चा बढ़ गई है कि वॉशिंगटन क्यूबा पर दबाव बढ़ा सकता है या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर सकता है। अमेरिका की ओर से किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। राउल कास्त्रो पर हत्या का मामला अमेरिका में राउल कास्त्रो के खिलाफ हत्या से जुड़ा मामला दर्ज किए जाने की खबरों ने तनाव बढ़ा दिया है। उन पर 1996 में दो नागरिक विमानों को गिराने के मामले में आरोप लगाए गए हैं। इन विमानों को कथित तौर पर कास्त्रो विरोधी पायलट उड़ा रहे थे। राउल कास्त्रो, क्यूबा की 1959 की कम्युनिस्ट क्रांति के नेता फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई हैं और आज भी क्यूबा की राजनीति में प्रभावशाली माने जाते हैं। ट्रंप का बयान बना चर्चा का केंद्र डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका “क्यूबा को आजाद करा रहा है” और वहां के लोगों की मदद करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को क्यूबा के हालात की पूरी जानकारी है और वहां अमेरिकी खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी सोशल मीडिया पर ट्रंप के बयान को साझा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्यूबा सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। कैरेबियन सागर में पहुंचा USS Nimitz अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक युद्धपोत USS Nimitz और उसका स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन क्षेत्र में पहुंच चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समूह में F/A-18E सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, EA-18G ग्रोलर विमान और अन्य सैन्य जहाज शामिल हैं। अमेरिकी साउदर्न कमांड ने इसकी पुष्टि की है। अमेरिका ने इसे नियमित सैन्य तैनाती बताया है, लेकिन समय को देखते हुए इसे क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। क्यूबा के आसपास जासूसी विमानों की उड़ान रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी नौसेना के P-8A Poseidon निगरानी विमान लगातार क्यूबा के आसपास उड़ान भर रहे हैं। कुछ विमान क्यूबा से करीब 80 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गए। Flightradar24 और BBC Verify की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन विमानों की गतिविधियां समुद्री और सैन्य मूवमेंट पर नजर रखने से जुड़ी हो सकती हैं। अमेरिकी ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी इसके अलावा MQ-4C Triton निगरानी ड्रोन भी क्यूबा के आसपास सक्रिय देखे गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रोन और निगरानी विमानों की उड़ानें क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों की गहन निगरानी का संकेत देती हैं। Center for Strategic and International Studies से जुड़े रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंशियन ने कहा कि अमेरिका संभवतः क्यूबा के आसपास आने-जाने वाले जहाजों और सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहा है। क्या वाकई सैन्य कार्रवाई संभव है? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी तक किसी संभावित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव और प्रतिबंध जारी हैं, लेकिन सैन्य कार्रवाई जैसा कदम बेहद गंभीर माना जाएगा। फिलहाल इन घटनाक्रमों को बढ़ते रणनीतिक दबाव, निगरानी और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कैरेबियन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।  

surbhi मई 21, 2026 0
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PM Modi Italy visit
पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दिया यह खास गिफ्ट

रोम, एजेंसियां। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच खास दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। रोम में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प पल तब सामने आया, जब पीएम मोदी ने मेलोनी को भारत की मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की। इस खास तोहफे को लेकर मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में धन्यवाद कहा और लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए “बहुत, बहुत अच्छी टॉफी” लेकर आए। सोशल मीडिया पर मेलोनी का यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों ने इसे भारत-इटली के मजबूत होते रिश्तों और दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री का प्रतीक बताया।   डिनर टेबल पर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा रोम में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने बताया कि भारत और इटली के संबंध अब नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुके हैं। बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे। डिनर के बाद दोनों नेताओं ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का भी दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किए जा रहे हैं।   ‘इंडो-मेडिटेरेनियन’ साझेदारी को नई दिशा भारत और इटली ने अपने रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बताते हुए एक साझा विजन भी पेश किया है। “इटली एंड इंडिया: ए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर द इंडो-मेडिटेरेनियन” शीर्षक से जारी संयुक्त लेख में दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। रक्षा, एयरोस्पेस, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई है। यह दौरा भारत-इटली संबंधों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

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