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Dubai Airport के पास ईरानी ड्रोन हमला, फ्यूल टैंक में लगी भीषण आग; उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित

Anjali Kumari मार्च 16, 2026 0
Dubai airport drone attack
Dubai airport drone attack

दुबई, एजेंसियां। Dubai International Airport के पास सोमवार को कथित तौर पर ईरान के ड्रोन हमले के बाद ईंधन टैंक में भीषण आग लग गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसमान में धुएं का गुबार दूर तक देखा गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन ने एयरपोर्ट के आसपास मौजूद एक फ्यूल टैंक को निशाना बनाया था। घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। कुछ ही समय में आग पर काबू पा लिया गया और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया।

 

उड़ानें अस्थायी रूप से रोकी गईं


घटना के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए Dubai Civil Aviation Authority ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम यात्रियों और एयरपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा के लिए एहतियातन उठाया गया है।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर


बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में Iran और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। इस संघर्ष के दौरान संयुक्त अरब अमीरात पर कई बार ड्रोन और मिसाइल से हमला करने की कोशिश की गई है, जिनमें से अधिकतर को एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल स्थिति सामान्य करने की कोशिश जारी है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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US-Iran Tension: ट्रंप की ‘एक रात में खत्म’ करने की धमकी, ईरान ने दिया सख्त जवाब

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “ईरान को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है।” ट्रंप की कड़ी चेतावनी व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा- अगर ईरान तय समय सीमा (डेडलाइन) तक डील नहीं करता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है यह कार्रवाई “मंगलवार रात” को भी हो सकती है ट्रंप ने ईरान को वॉशिंगटन समयानुसार रात 8 बजे तक का समय दिया है (भारतीय समय: बुधवार सुबह 5:30 बजे)। डील की मुख्य शर्तें अमेरिका की शर्तों में सबसे अहम- होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलना वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा न डालना गौरतलब है कि दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। बातचीत जारी, लेकिन अनिश्चितता बरकरार ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के नेता “अच्छी नीयत” से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। ईरान का जवाब: अस्थायी सीजफायर नहीं ट्रंप की धमकी के बीच ईरान ने- अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) को खारिज कर दिया स्थायी समाधान और प्रतिबंध हटाने की मांग रखी यानी ईरान फिलहाल किसी अल्पकालिक समझौते के पक्ष में नहीं है। रक्षा अधिकारियों की मौजूदगी इस अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में- अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डान केन भी मौजूद रहे, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालिया घटनाक्रम पिछले सप्ताह अमेरिकी सुरक्षा बलों ने- दक्षिणी ईरान में गिराए गए F-15 फाइटर जेट के दो क्रू मेंबर्स को सुरक्षित रेस्क्यू किया

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UAE ने मांगे कर्ज के पैसे, पाकिस्तान पर बढ़ा आर्थिक दबाव; बयानबाजी से बढ़ा विवाद

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Iran Crisis: पावर प्लांट्स के बाहर मानव श्रृंखला बनाएगा ईरान, ट्रंप की डेडलाइन से पहले बढ़ा तनाव

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Artemis II ने रचा इतिहास: इंसानों की पृथ्वी से सबसे दूर यात्रा, Apollo 13 का रिकॉर्ड टूटा

NASA के Artemis II मिशन ने अंतरिक्ष इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। इस मिशन पर सवार चार अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से सबसे दूर मानव यात्रा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो पहले 1970 के Apollo 13 मिशन के नाम था। 56 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा Apollo 13 ने 1970 में पृथ्वी से 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय कर रिकॉर्ड बनाया था। अब Artemis II मिशन ने इसे पीछे छोड़ते हुए सोमवार को 15:58 GMT पर इस दूरी को पार कर लिया। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री लगभग 4,06,788 किलोमीटर की अधिकतम दूरी तक पहुंचेंगे। चांद के दूरस्थ हिस्से की यात्रा Artemis II मिशन चंद्रमा के उस हिस्से की यात्रा कर रहा है, जिसे पृथ्वी से सीधे नहीं देखा जा सकता। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के पीछे (far side) का अध्ययन कर रहे हैं और करीब 6 घंटे तक वहां की सतह का विश्लेषण और दस्तावेज़ीकरण करेंगे। ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी’ से वापसी यह मिशन “फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी” पर आधारित है, जिसका मतलब है कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा के चारों ओर घूमकर स्वतः ही पृथ्वी की ओर लौटेगा। वापसी की यात्रा लगभग 4 दिनों में पूरी होगी। जिम लवेल का भावुक संदेश इस ऐतिहासिक दिन की शुरुआत एक खास संदेश से हुई। Apollo 13 मिशन के अंतरिक्ष यात्री जिम लवेल का रिकॉर्ड किया गया संदेश क्रू को सुनाया गया, जिसमें उन्होंने कहा- “यह एक ऐतिहासिक दिन है, व्यस्तता के बीच इस नजारे का आनंद लेना मत भूलना। मेरे पुराने इलाके में आपका स्वागत है।” चंद्रमा की नई तस्वीरें आईं सामने मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के ओरिएंटेल बेसिन (Orientale Basin) की तस्वीरें भी भेजी हैं। यह एक विशाल क्रेटर है, जिसे पहले केवल बिना मानव वाले मिशनों के जरिए देखा गया था। इंसानी आंख अब भी सबसे बेहतर कैमरा NASA की वैज्ञानिक केल्सी यंग के अनुसार, तकनीकी प्रगति के बावजूद इंसानी आंख आज भी सबसे बेहतरीन “कैमरा” है। उन्होंने कहा कि मानव आंख में मौजूद रिसेप्टर्स किसी भी आधुनिक कैमरे से ज्यादा सक्षम हैं, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों के अवलोकन बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। अंतरिक्ष अन्वेषण में नई दिशा Artemis II मिशन को मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के अगले चरण की शुरुआत माना जा रहा है। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन और उससे आगे के अभियानों के लिए रास्ता तैयार करेगा।  

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trump iran 48 hour threat
ट्रंप की ईरान को 48 घंटे की धमकी, होर्मुज खोलो वरना तबाही!

वाशिंगटन/ तेहरान, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर लगातार हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि ईरान ने तय समयसीमा के भीतर यह समुद्री मार्ग नहीं खोला, तो उसे “भीषण और विनाशकारी” हमलों का सामना करना पड़ेगा।   होर्मुज को लेकर ट्रंप का सख्त संदेश ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान के पास अब बहुत कम समय बचा है। उन्होंने पहले भी ईरान को समझौता करने और होर्मुज खोलने के लिए समयसीमा दी थी, लेकिन इस बार उन्होंने 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर दबाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि “होर्मुज खोल दो, वरना नरक में जाओगे।” होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और ऊर्जा आपूर्ति दुनिया भर में पहुंचती है। ऐसे में इस मार्ग पर तनाव का असर सीधे वैश्विक बाजार, ईंधन की कीमतों और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।   ईरान का पलटवार: ‘दुश्मनों के लिए जहन्नुम के दरवाजे खुलेंगे’ ट्रंप की धमकी पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, संयुक्त सैन्य कमान के प्रमुख जनरल अली अब्दुल्ला अलीबादी ने कहा कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे, खासकर पावर प्लांट्स और रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया गया, तो “दुश्मनों के लिए जहन्नुम के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।” ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हमले तेज करता है, तो ईरान बाब अल-मंडेब जलमार्ग को भी बाधित कर सकता है। यह मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल व कंटेनर व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।   ईरानी मंत्री ने ट्रंप को बताया अस्थिर ईरान के संस्कृति मंत्री सैयद रजा सालिही-अमीरी ने ट्रंप पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें “अस्थिर और भ्रमित” व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि ईरानी समाज ट्रंप के बयानों को गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि उनमें संतुलन की कमी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज दुनिया के लिए खुला है, लेकिन “ईरान के दुश्मनों” के लिए नहीं।   जंग के बीच मध्यस्थता की कोशिशें हालांकि हालात बेहद तनावपूर्ण हैं, लेकिन कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ओमान, मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे देश तनाव कम करने और सुरक्षित समुद्री रास्ते बहाल करने के लिए बातचीत में जुटे हैं। ओमान ने ईरान के साथ बैठक कर होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही के विकल्पों पर चर्चा की है। पाकिस्तान ने भी अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी की पेशकश कर तनाव कम करने की कोशिश तेज की है।

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