डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत में प्रगति का हवाला देते हुए ‘Project Freedom’ को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए अमेरिका की रणनीति में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
बातचीत में प्रगति, ऑपरेशन पर ब्रेक
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता में “अच्छी प्रोग्रेस” देखने को मिल रही है, जिसके चलते इस सैन्य परियोजना को फिलहाल रोक दिया गया है। ‘Project Freedom’ का उद्देश्य समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करना और रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना था, लेकिन संभावित समझौते को ध्यान में रखते हुए इसे अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और सहमति का संकेत
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बताया कि यह फैसला पाकिस्तान समेत कई देशों के सुझाव के बाद लिया गया है। उन्होंने इसे “बड़ी सैन्य सफलता” के बाद उठाया गया संतुलित कदम बताया, जिससे कूटनीतिक रास्ता खुल सके।
‘हालात पहले से बेहतर’
अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद अब हालात पहले से बेहतर हो गए हैं और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत अंतिम चरण के करीब पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है और यह सही समय है जब कूटनीति को मौका दिया जाए।
नाकेबंदी जारी, दबाव कायम
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘Project Freedom’ को भले ही रोका गया हो, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी और दबाव पूरी तरह जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह रणनीति इसलिए जरूरी है ताकि ईरान समझौते के लिए गंभीर बना रहे और बातचीत का परिणाम सकारात्मक दिशा में जाए।
क्यों लगाई गई अस्थायी रोक?
ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि यह परखा जा सके कि कूटनीतिक प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं। अब यह देखा जाएगा कि क्या बातचीत सफल होकर अंतिम समझौते तक पहुंचती है या नहीं।
कूटनीति बनाम सैन्य दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस समय “डुअल स्ट्रेटेजी” अपना रहा है–एक तरफ सैन्य दबाव बनाए रखना और दूसरी ओर बातचीत के जरिए समाधान निकालना। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह रणनीति ईरान के साथ समझौते तक पहुंचती है या फिर तनाव एक बार फिर बढ़ता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों से अमेरिका आने वाली कारों और ट्रकों पर बड़ा टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय संघ (EU) अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा था, इसलिए अब आयातित कार और ट्रक पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. ट्रंप बोले- ट्रेड डील का पालन नहीं कर रहा था यूरोप डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ ने सहमत व्यापार समझौते का सही तरीके से पालन नहीं किया. इसी वजह से अमेरिका अब यूरोप से आने वाले ऑटोमोबाइल और ट्रकों पर शुल्क बढ़ाने जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह से यूरोप से आयात होने वाले कार और ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया जाएगा. “अमेरिका में बनाओ, टैरिफ नहीं लगेगा” ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि जो कंपनियां अमेरिका के भीतर कार और ट्रक बनाएंगी, उन्हें किसी तरह का टैरिफ नहीं देना होगा. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में इस समय कई बड़े ऑटोमोबाइल और ट्रक निर्माण संयंत्र बन रहे हैं, जिनमें 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हो रहा है. ट्रंप के मुताबिक, ये प्लांट अमेरिकी कर्मचारियों को रोजगार देंगे और देश के ऑटो सेक्टर को मजबूत करेंगे. वैश्विक बाजार में बढ़ सकती है हलचल ट्रंप के इस फैसले के बाद वैश्विक व्यापार और ऑटोमोबाइल बाजार में उथल-पुथल की आशंका बढ़ गयी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय ऑटो कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. अगर यूरोपीय संघ जवाबी टैरिफ लगाता है, तो अमेरिका और यूरोप के बीच नया ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है. ईरान युद्ध के बीच आया फैसला ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते सैन्य खर्च और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन घरेलू उद्योगों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है. पहले भी कई देशों पर लगा चुके हैं टैरिफ डोनाल्ड ट्रंप पहले भी चीन समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने का फैसला कर चुके हैं. उनका कहना रहा है कि अमेरिका को “अनुचित व्यापार नीतियों” से नुकसान हुआ है और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा जरूरी है. अब यूरोप पर लगाया गया नया 25 प्रतिशत टैरिफ वैश्विक व्यापार राजनीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
Indo-Pacific Tension: मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके आसपास चीन के सात नौसैनिक युद्धपोत और एक सरकारी पोत सक्रिय पाए गए हैं. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और चीन-ताइवान संबंधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ताइवान के आसपास दिखे चीनी युद्धपोत ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि ताइवान के आसपास सात PLAN (People’s Liberation Army Navy) जहाज और एक आधिकारिक पोत की गतिविधि दर्ज की गयी है. मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की सशस्त्र सेनाओं ने पूरी स्थिति पर नजर रखी और आवश्यक प्रतिक्रिया दी. हालांकि इस दौरान चीनी वायुसेना की कोई गतिविधि दर्ज नहीं की गयी. लगातार दूसरे दिन बढ़ी सैन्य गतिविधि यह लगातार दूसरा दिन है जब ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधि देखी गयी है. इससे एक दिन पहले भी ताइवान ने एक चीनी सैन्य विमान, छह नौसैनिक जहाज और एक सरकारी पोत की मौजूदगी दर्ज की थी. ताइवान के मुताबिक, उस दौरान एक चीनी सैन्य विमान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के उत्तरी हिस्से में भी प्रवेश कर गया था. इसे क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला संकेत माना जाता है. चीन की “ग्रे ज़ोन” रणनीति? विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब ताइवान पर दबाव बनाने के लिए “ग्रे ज़ोन टैक्टिक्स” का इस्तेमाल कर रहा है. इसका मतलब है कि बिना खुला युद्ध छेड़े लगातार सैन्य मौजूदगी और गतिविधियों के जरिए दबाव बनाना. इस रणनीति के तहत चीन नियमित रूप से अपने नौसैनिक जहाजों और विमानों को ताइवान के आसपास भेजता है, ताकि सैन्य और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस बार केवल नौसैनिक गतिविधि और वायुसेना की अनुपस्थिति यह संकेत देती है कि चीन फिलहाल सीमित लेकिन लगातार दबाव की नीति अपना रहा है. ताइवान ने कहा- स्थिति पर नजर ताइवान की सेना ने कहा कि उसने पूरी स्थिति पर नजर रखी और जरूरत के मुताबिक जवाबी कदम उठाये. हालांकि सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसकी प्रतिक्रिया क्या रही. लगातार दो दिनों तक चीनी नौसैनिक गतिविधियों के बढ़ने से यह संकेत मिल रहे हैं कि बीजिंग क्षेत्र में अपना दबदबा लगातार दिखाना चाहता है. ताइवान-चीन विवाद क्या है? चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और “वन चाइना पॉलिसी” के तहत उस पर दावा करता है. दूसरी तरफ ताइवान खुद को अलग लोकतांत्रिक शासन वाला क्षेत्र मानता है, जिसकी अपनी सरकार, सेना और आर्थिक व्यवस्था है. इतिहास के अनुसार, 1895 में चीन-जापान युद्ध के बाद ताइवान जापान के नियंत्रण में चला गया था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह फिर चीन के प्रभाव में आया, लेकिन इसकी राजनीतिक स्थिति को लेकर विवाद आज तक जारी है. इंडो-पैसिफिक में बढ़ी वैश्विक चिंता मिडिल ईस्ट संकट के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता भी बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिविधियां लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में बड़े सैन्य अभ्यास या और आक्रामक कदम भी देखने को मिल सकते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने अलग अंदाज़ को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह राजनीति नहीं, बल्कि उनका डांस है। व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में आयोजित एक यूथ फिटनेस इवेंट के दौरान ट्रंप ने छात्रों के साथ हल्का-फुल्का माहौल बनाते हुए अपना फेमस ‘ट्रंप डांस’ किया और उन्हें स्टेप्स भी सिखाए। इवेंट के दौरान ट्रंप कुछ देर के लिए “डांस टीचर” बन गए। जैसे ही बैकग्राउंड में YMCA बजा, ट्रंप अपने जाने-पहचाने अंदाज़ में हाथ हिलाते और स्टेप्स करते नजर आए। उनके साथ मौजूद छात्र भी इस पल को एंजॉय करते दिखे। इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट पर शेयर किया गया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। ट्रंप का यह डांस स्टाइल पहले भी उनकी चुनावी रैलियों में कई बार देखा जा चुका है। फिटनेस पर दिया जोर इसी इवेंट के दौरान ट्रंप ने युवाओं के लिए फिटनेस को लेकर भी अहम घोषणा की। उन्होंने “प्रेसिडेंशियल फिटनेस टेस्ट” को फिर से शुरू करने की बात कही और कहा कि बच्चों और युवाओं के लिए शारीरिक रूप से फिट रहना बेहद जरूरी है। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सही खानपान और नियमित व्यायाम भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने युवाओं को खेलों में भाग लेने और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित किया। हल्का माहौल, बड़ा संदेश हालांकि यह कार्यक्रम एक मनोरंजक पल के रूप में सामने आया, लेकिन इसके जरिए ट्रंप ने फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल का संदेश देने की कोशिश की। व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में छात्रों के साथ ट्रंप का यह डांस वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।