मेकअप खरीदना अक्सर उत्साह से ज्यादा कन्फ्यूजन से भरा अनुभव बन जाता है, खासकर जब बात फाउंडेशन की हो। स्टोर में जो शेड परफेक्ट लगता है, वही कुछ घंटों बाद ऑरेंज, ग्रे या जरूरत से ज्यादा डार्क नजर आने लगता है। कई बार गलत शेड की बोतलें ड्रेसिंग टेबल के कोने में पड़ी रह जाती हैं और लोग मजबूरी में वही फाउंडेशन इस्तेमाल करते रहते हैं जो उनकी स्किन टोन से मेल ही नहीं खाता।
ऐसे में मेकअप एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही फाउंडेशन चुनना मुश्किल जरूर है, लेकिन अगर कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखा जाए तो यह प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। मेकअप आर्टिस्ट Leiya Phinao Ningshen और Rose Siard ने फाउंडेशन चुनने के तीन सबसे जरूरी स्टेप्स बताए हैं—शेड, अंडरटोन और स्किन टाइप।
अधिकतर लोग फाउंडेशन को हाथ के पीछे लगाकर टेस्ट करते हैं, जबकि एक्सपर्ट्स इसे सबसे बड़ी गलती मानते हैं। हाथ का रंग अक्सर चेहरे से अलग होता है क्योंकि वह ज्यादा धूप में रहता है।
मेकअप आर्टिस्ट्स के मुताबिक, फाउंडेशन हमेशा जॉलाइन यानी चेहरे और गर्दन के बीच वाले हिस्से पर टेस्ट करना चाहिए। इससे पता चलता है कि शेड चेहरे और गर्दन दोनों में नेचुरली ब्लेंड हो रहा है या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फाउंडेशन को खरीदने से पहले उसे कम से कम 5 से 10 मिनट तक स्किन पर रहने दें। ऐसा इसलिए क्योंकि कई फाउंडेशन स्किन के ऑयल के साथ मिलकर ऑक्सीडाइज हो जाते हैं और कुछ देर बाद डार्क या ऑरेंज दिखने लगते हैं।
ऑक्सीडेशन वह प्रक्रिया है जिसमें फाउंडेशन स्किन के नैचुरल ऑयल के संपर्क में आकर अपना रंग बदल देता है। यही वजह है कि शुरुआत में सही दिखने वाला फाउंडेशन बाद में अलग नजर आने लगता है।
कई बार समस्या शेड की नहीं बल्कि अंडरटोन की होती है। अगर फाउंडेशन चेहरे पर ज्यादा पीला, गुलाबी या ग्रे दिख रहा है, तो संभव है कि उसका अंडरटोन आपकी स्किन से मैच नहीं कर रहा हो।
अंडरटोन पहचानने का आसान तरीका:
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कलर करेक्टर का सही इस्तेमाल भी मेकअप को बेहतर बना सकता है। उदाहरण के लिए:
सिर्फ सही शेड चुनना काफी नहीं है। अगर फाउंडेशन का फॉर्मूला आपकी स्किन टाइप के मुताबिक नहीं होगा, तो मेकअप खराब दिख सकता है।
ऑयल-फ्री, मैट और लॉन्ग-वियर फाउंडेशन बेहतर रहते हैं।
Hydrating या Serum-infused फाउंडेशन स्किन को फ्लॉलेस लुक देते हैं।
Natural या Satin finish फाउंडेशन सबसे अच्छा विकल्प माने जाते हैं।
मेकअप एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि फाउंडेशन हमेशा पतली लेयर में लगाएं और उसे स्किन पर प्रेस करें, रगड़ें नहीं। साथ ही जरूरत से ज्यादा पाउडर लगाने से बचें, वरना मेकअप केकी दिख सकता है।
अगर गलती से गलत शेड खरीद लिया है, तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं।
मेकअप एक्सपर्ट्स का मानना है कि परफेक्ट फाउंडेशन वही होता है जो स्किन में पूरी तरह घुल जाए और अलग से नजर न आए। सही शेड ढूंढने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन बेसिक जानकारी होने पर यह प्रक्रिया आसान और कम खर्चीली बन सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Alia Bhatt सिर्फ फिल्मों ही नहीं, बल्कि अपने फैशन सेंस को लेकर भी लगातार सुर्खियों में रहती हैं। साल 2023 में Gucci की ग्लोबल एंबेसडर बनने के बाद आलिया ने अपने स्टाइल में इस लग्जरी ब्रांड के कई आइकॉनिक बैग्स को शामिल किया है। खास बात यह है कि उनका बैग कलेक्शन सिर्फ फैशन नहीं बल्कि क्लासिक और मॉडर्न स्टाइल का परफेक्ट मिश्रण भी दिखाता है। Gucci Jackie से लेकर Bamboo 1947 तक, आलिया के कई बैग्स सोशल मीडिया पर फैशन गोल्स बन चुके हैं। इनके अलावा Dior, Chanel और Bottega Veneta जैसे बड़े लग्जरी ब्रांड्स के बैग्स भी उनके कलेक्शन का हिस्सा हैं। Gucci Jackie 1961 बना आलिया का फेवरेट कान्स 2026 के दौरान आलिया ने Gucci Jackie 1961 बैग को स्लाउची जैकेट और कैपरी पैंट्स के साथ स्टाइल किया था। टेक्सचर्ड लेदर और क्लासिक पिस्टन क्लैस्प वाला यह बैग विंटेज फैशन का शानदार उदाहरण माना जाता है। यही नहीं, आलिया कई बार ब्लैक Gucci Jackie के साथ एयरपोर्ट और फैशन इवेंट्स में भी नजर आ चुकी हैं। Gucci Bamboo 1947 ने दिया रेट्रो ग्लैमर Gucci Bamboo 1947 बैग भी आलिया के सबसे चर्चित बैग्स में शामिल है। ब्लैक फर कोट और साटन आउटफिट के साथ इस बैग को कैरी कर उन्होंने ‘मोब-वाइफ’ एस्थेटिक को नया ट्विस्ट दिया। वहीं व्हाइट Bamboo बैग को मोनोक्रोम आउटफिट के साथ स्टाइल कर उन्होंने मिनिमल लग्जरी लुक पेश किया। Gucci Horsebit और Blondie बैग्स ने बढ़ाया स्टाइल गेम मिलान फैशन वीक में आलिया ने ऑल-ब्लैक लेदर ट्रेंच कोट के साथ Gucci Horsebit 1955 बैग कैरी किया था। वहीं रेड Gucci Blondie बैग को उन्होंने डेनिम और मोनोग्राम शर्ट के साथ पेयर किया, जिसने उनके कैजुअल लुक को भी लग्जरी टच दिया। Dior, Chanel और Bottega Veneta भी हैं कलेक्शन का हिस्सा Gucci के अलावा आलिया का Dior Book Tote एयरपोर्ट लुक्स में कई बार नजर आया है। वहीं पेस्टल पिंक Chanel Deauville Tote को उन्होंने इंडियन और वेस्टर्न दोनों आउटफिट्स के साथ स्टाइल किया। Bottega Veneta Acro Tote और Balenciaga Backpack उनके ट्रैवल फैशन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। क्यों खास है आलिया का बैग कलेक्शन? आलिया भट्ट का बैग कलेक्शन सिर्फ लग्जरी ब्रांड्स दिखाने तक सीमित नहीं है। उनके हर बैग में अलग स्टाइल स्टेटमेंट नजर आता है। कहीं क्लासिक विंटेज लुक है तो कहीं Gen-Z फैशन का मॉडर्न टच। यही वजह है कि फैशन लवर्स उनके एयरपोर्ट लुक से लेकर रेड कार्पेट स्टाइल तक को फॉलो करते हैं।
फैशन ट्रेंड्स हर सीजन बदलते रहते हैं, लेकिन कुछ कपड़े ऐसे होते हैं जो कभी आउट ऑफ स्टाइल नहीं होते। यही वजह है कि “Capsule Wardrobe” का कॉन्सेप्ट आजकल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। Capsule Wardrobe यानी ऐसी सीमित लेकिन स्मार्ट क्लोदिंग कलेक्शन, जिसमें कुछ क्लासिक और वर्सेटाइल पीस शामिल हों, जिन्हें अलग-अलग तरीकों से स्टाइल किया जा सके। फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आपके पास सही बेसिक कपड़े हैं, तो रोजाना आउटफिट चुनना आसान हो जाता है। चाहे आपका स्टाइल मिनिमल हो या एक्सपेरिमेंटल, कुछ क्लासिक फैशन आइटम हर वॉर्डरोब में होने चाहिए। यहां जानिए ऐसे 6 जरूरी फैशन पीस जो हर Capsule Wardrobe का हिस्सा होने चाहिए। 1. Crisp White Shirt एक सफेद शर्ट फैशन की दुनिया का सबसे भरोसेमंद क्लासिक मानी जाती है। इसे ऑफिस मीटिंग में ब्लेज़र के साथ पहना जा सकता है, वहीं कैजुअल लुक के लिए जींस या स्नीकर्स के साथ भी स्टाइल किया जा सकता है। एक अच्छी White Shirt खरीदते समय Cotton Poplin या Linen फैब्रिक चुनना बेहतर माना जाता है क्योंकि ये लंबे समय तक अपनी शेप बनाए रखते हैं और आरामदायक भी होते हैं। 2. Straight-Leg Blue Jeans डेनिम कभी फैशन से बाहर नहीं जाता। खासकर Straight-leg blue jeans सबसे वर्सेटाइल विकल्प मानी जाती है। इसे बैले फ्लैट्स, लेदर जैकेट, लोफर्स या ट्रेंच कोट—किसी भी चीज़ के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स Mid-rise Indigo Jeans को सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल मानते हैं। 3. Classic Knits सर्दियों और एयर-कंडीशन्ड ऑफिस के लिए Knitwear जरूरी माना जाता है। Crewnecks, Cardigans, V-necks और Turtlenecks जैसे Classic Knits लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। Neutral shades जैसे Beige, Black, Grey और Cream सबसे ज्यादा वर्सेटाइल होते हैं और लगभग हर आउटफिट के साथ मैच हो जाते हैं। 4. Simple Black Dress एक Simple Black Dress यानी “Little Black Dress” हर महिला की वॉर्डरोब का अहम हिस्सा मानी जाती है। यह दिन से रात तक आसानी से ट्रांजिशन कर सकती है। सिर्फ एक्सेसरीज बदलकर इसे पार्टी, डिनर या ऑफिस इवेंट के लिए स्टाइल किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि ऐसा सिल्हूट चुनें जिसमें आप सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करें। 5. Basic Tees और Tank Tops White, Black, Grey और Navy जैसे बेसिक रंगों में Tees और Tank Tops किसी भी Capsule Wardrobe की नींव होते हैं। इन्हें जैकेट, शर्ट, ब्लेज़र या डेनिम के साथ लेयर करके अलग-अलग लुक तैयार किए जा सकते हैं। यही वजह है कि ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले फैशन पीस माने जाते हैं। 6. Black Trousers एक अच्छी फिटिंग वाला Black Trouser Casual और Formal दोनों लुक्स के लिए परफेक्ट माना जाता है। इसे ऑफिस प्रेजेंटेशन से लेकर डिनर डेट तक आसानी से पहना जा सकता है। सही कट और फिट वाला ट्राउजर आपके पूरे लुक को एलिगेंट बना सकता है। क्यों जरूरी है Capsule Wardrobe? Capsule Wardrobe सिर्फ फैशन ट्रेंड नहीं बल्कि स्मार्ट शॉपिंग का तरीका भी माना जाता है। इससे: रोज आउटफिट चुनने में समय कम लगता है जरूरत से ज्यादा शॉपिंग कम होती है हर कपड़ा कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है स्टाइल हमेशा क्लासी और टाइमलेस दिखता है फैशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली लग्जरी उन्हीं कपड़ों में होती है जो सालों तक आपके स्टाइल का हिस्सा बने रहें।
बिना हैवी गाउन और ट्रेल के भी Cannes डेब्यू में दिखीं बेहद एलिगेंट Tara Sutaria ने Cannes Film Festival 2026 में अपने डेब्यू लुक से फैशन लवर्स का ध्यान खींच लिया। जहां रेड कार्पेट पर अक्सर बड़े ट्रेल, भारी गाउन और चमकदार आउटफिट्स देखने को मिलते हैं, वहीं तारा ने बेहद क्लासिक और मिनिमल अंदाज में ओल्ड-हॉलीवुड ग्लैमर को रीक्रिएट किया। स्टाइलिस्ट Tanya Ghavri द्वारा स्टाइल की गई तारा ने Helsa ब्रांड की ब्लैक-एंड-व्हाइट “Finale Midi Dress” पहनी, जिसने उनके पूरे लुक को बेहद रॉयल और विंटेज टच दिया। 1950s हॉलीवुड स्टाइल से इंस्पायर्ड था लुक तारा की स्ट्रैपलेस मिडी ड्रेस में: फिटेड ब्लैक बॉडिस स्वीटहार्ट नेकलाइन पर व्हाइट डिटेलिंग टी-लेंथ फुल स्कर्ट लेस-ट्रिम्ड व्हाइट अंडरलेयर जैसे एलिमेंट्स शामिल थे। ड्रेस का सबसे खास हिस्सा उसका ब्लैक और व्हाइट कॉन्ट्रास्ट रहा, जिसने पूरे आउटफिट को क्लासिक 1950s हॉलीवुड वाइब दी, लेकिन लुक कहीं भी ओवरड्रामेटिक नहीं लगा। एक्सेसरीज़ ने बढ़ाया ग्लैमरस टच Tara Sutaria के इस लुक को और खास बनाया: Jimmy Choo के ब्लैक पेटेंट पंप्स YSL सनग्लासेस Viange के विंटेज ड्रॉप ईयररिंग्स ने। सभी एक्सेसरीज़ को ब्लैक-एंड-व्हाइट थीम में रखा गया, जिससे पूरा स्टाइल बेहद सॉफिस्टिकेटेड नजर आया। मेकअप और हेयरस्टाइल ने पूरा किया ओल्ड-हॉलीवुड लुक मेकअप आर्टिस्ट Meera Sakhrani ने तारा के लिए: ग्लोइंग स्किन डीप बेरी लिप कलर सॉफ्ट स्मोकी आई मेकअप चुना। वहीं हेयरस्टाइलिस्ट Aamir Naveed ने साइड-पार्टेड वेव्स और क्राउन वॉल्यूम के साथ क्लासिक हॉलीवुड हेयरस्टाइल तैयार की, जिसने पूरे लुक को और एलिगेंट बना दिया। सोशल मीडिया पर फैंस कर रहे तारीफ Tara Sutaria का यह Cannes लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैशन फैंस उनके मिनिमल लेकिन क्लासी स्टाइल की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने उन्हें “Modern Hollywood Diva” तक कहा।