मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-अमेरिका तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 600 अंक से अधिक की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,200 के नीचे आ गया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
विश्लेषकों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा।
कारोबार के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, TCS और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव बना रहा, जिससे बाजार का व्यापक रुख कमजोर रहा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया है। इससे भारतीय बाजारों में पूंजी निकासी का दबाव बढ़ा है और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है तो बाजार में फिर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 443 अंक फिसलकर 77,709 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 96 अंक टूटकर 24,239 पर आ गया। पूरे दिन के कारोबार में निवेशकों ने खासकर प्राइवेट बैंक, ऑटोमोबाइल और आईटी शेयरों में बिकवाली की, जबकि सरकारी बैंक और फार्मा सेक्टर के शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली। बाजार पर सबसे अधिक दबाव निजी बैंकिंग शेयरों से आया। पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही। इसके साथ ही ऑटो और आईटी सेक्टर में भी मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों का भी घरेलू बाजार पर असर पड़ा। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भारी गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग में तेजी दर्ज की गई। वहीं, पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट रही, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचना, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इन परिस्थितियों में निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 964 अंक चढ़कर 78,151 पर और निफ्टी 261 अंक की बढ़त के साथ 24,334 पर बंद हुआ था। हालांकि, सोमवार को वैश्विक और घरेलू कारकों के दबाव ने बाजार की दिशा बदल दी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड निवेशकों और उनके नामांकित (नॉमिनी) व्यक्तियों को बड़ी राहत देते हुए म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन प्रक्रिया को सरल बनाने के नए नियम जारी किए हैं। नए नियमों का उद्देश्य निवेशक की मृत्यु के बाद दावों के निपटारे को तेज, पारदर्शी और कम दस्तावेज़ों वाला बनाना है। यह फैसला 17 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सामने आया। नॉमिनी को मिलेगा आसान दावा निपटान नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड यूनिटधारक की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) को ट्रांसमिशन क्लेम के लिए कम औपचारिकताओं का सामना करना पड़ेगा। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को दावों के निपटान की प्रक्रिया अधिक सरल और समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेज़ी प्रक्रिया होगी आसान SEBI ने कहा है कि अनावश्यक दस्तावेज़ों और प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम किया जाएगा, ताकि निवेशकों के परिवारों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। इससे विशेष रूप से छोटे निवेशकों और उनके उत्तराधिकारियों को राहत मिलेगी। डिमैट निवेशकों के लिए भी नई सुविधा इसी के साथ SEBI ने डिमैट खाते में रखी गई म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए Systematic Withdrawal Plan (SWP) और Systematic Transfer Plan (STP) की Standing Instructions की सुविधा भी मंजूर कर दी है। इससे डिमैट निवेशकों को भी वही सुविधा मिलेगी, जो अब तक केवल SOA (Statement of Account) फॉर्मेट वाले निवेशकों को उपलब्ध थी। निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश SEBI का कहना है कि इन बदलावों से म्यूचुअल फंड उद्योग में Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों तथा उनके नामांकित व्यक्तियों के लिए दावों का निपटारा पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक होगा।
मुंबई, एजेंसियां। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और मजबूत परिचालन के दम पर इस कारोबार का राजस्व ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया। कंपनी के तिमाही नतीजों में O2C बिजनेस एक बार फिर सबसे बड़े राजस्व स्रोत के रूप में उभरा। रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कारोबार से मिली मजबूती रिलायंस को इस तिमाही में वैश्विक बाजार में बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की मजबूत मांग का फायदा मिला। कंपनी ने कहा कि ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद उसके एकीकृत रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल संचालन ने बेहतर प्रदर्शन किया। कच्चे तेल की कीमतों का मिला लाभ विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसका असर रिफाइनिंग कारोबार पर भी पड़ा, लेकिन रिलायंस ने अपनी परिचालन क्षमता और निर्यात प्रदर्शन के दम पर बेहतर कमाई दर्ज की। जियो और रिटेल कारोबार ने भी दिया साथ O2C के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल ने भी कंपनी के समग्र प्रदर्शन को मजबूती दी। जियो के ग्राहकों की संख्या और औसत राजस्व में बढ़ोतरी हुई, जबकि रिटेल कारोबार ने भी मजबूत बिक्री दर्ज की। इससे रिलायंस का कुल तिमाही राजस्व पहली बार ₹3 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। निवेशकों की नजर अगले विस्तार पर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि O2C कारोबार में लगातार मजबूती और जियो व रिटेल बिजनेस के विस्तार से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की दीर्घकालिक विकास रणनीति को बल मिलेगा। अब निवेशकों की नजर कंपनी की नई ऊर्जा परियोजनाओं और जियो प्लेटफॉर्म्स के संभावित IPO पर बनी हुई है।