बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सिलेक्शन (IBPS) ने प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO)/मैनेजमेंट ट्रेनी (MT) के 6,715 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 21 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती के माध्यम से 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पीओ/एमटी पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
यह भर्ती ऐसे समय आई है जब हाल ही में SBI ने भी पीओ भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था। ऐसे में बैंकिंग उम्मीदवारों के पास एक साथ दो बड़े अवसर मौजूद हैं।
IBPS PO भर्ती के जरिए कई प्रमुख सरकारी बैंकों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
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6715 पद
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रिक्तियों की संख्या अधिक बताई जा रही है।
उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री होना अनिवार्य है।
इस भर्ती के लिए किसी विशेष अनुभव या अतिरिक्त प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।
निर्धारित पात्रता के अनुसार उम्मीदवार की जन्मतिथि 2 जुलाई 1996 से पहले और 1 जुलाई 2006 के बाद नहीं होनी चाहिए।
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में 3 से 10 वर्ष तक की छूट मिलेगी।
उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में होगा—
इन तीनों चरणों में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया जाएगा।
चयनित उम्मीदवारों को ₹48,480 से ₹85,920 तक की बेसिक सैलरी मिलेगी।
इसके अलावा विभिन्न भत्ते, एचआरए, डीए और अन्य सरकारी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।
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ऑनलाइन भुगतान के दौरान लागू बैंक ट्रांजैक्शन शुल्क का भुगतान भी उम्मीदवार को करना होगा।
उम्मीदवार निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाकर आवेदन कर सकते हैं—
IBPS PO भर्ती देश की सबसे प्रतिष्ठित बैंकिंग भर्तियों में से एक मानी जाती है। सरकारी बैंक में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा अवसर है। इच्छुक अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI) ने 4,500 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती के लिए आयोजित होने वाली ऑनलाइन परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। जिन अभ्यर्थियों ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया है, वे बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने लॉगिन क्रेडेंशियल की सहायता से हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। यह भर्ती परीक्षा 5 जुलाई 2026 (रविवार) को आयोजित की जाएगी। ऑनलाइन होगी परीक्षा, स्थानीय भाषा की भी होगी जांच अप्रेंटिस भर्ती परीक्षा का आयोजन BFSI SSC द्वारा कराया जाएगा। चयन प्रक्रिया में सबसे पहले ऑनलाइन लिखित परीक्षा होगी। इसमें सफल होने वाले अभ्यर्थियों को स्थानीय भाषा दक्षता परीक्षा से भी गुजरना होगा। अंतिम चयन दोनों चरणों में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। एडमिट कार्ड में इन जानकारियों की करें जांच उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दर्ज सभी जानकारियों का सावधानीपूर्वक मिलान करें। इसमें अभ्यर्थी का नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, फोटो, हस्ताक्षर, परीक्षा तिथि, परीक्षा समय, रिपोर्टिंग समय, परीक्षा केंद्र का नाम और पता, जन्म तिथि तथा श्रेणी जैसी जानकारियां शामिल हैं। यदि किसी प्रकार की त्रुटि दिखाई देती है तो तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें। परीक्षा केंद्र पर क्या लेकर जाएं परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों के पास एडमिट कार्ड का प्रिंटआउट और सरकार द्वारा जारी वैध फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य है। उम्मीदवारों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है, ताकि सत्यापन प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड उम्मीदवार सबसे पहले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां CBI Apprentice Admit Card 2026 लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर या रोल नंबर तथा पासवर्ड अथवा जन्म तिथि दर्ज कर लॉगिन करें। स्क्रीन पर एडमिट कार्ड दिखाई देगा। सभी विवरण जांचने के बाद उसे डाउनलोड करें और भविष्य के उपयोग के लिए प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी नए वित्त वर्ष की शुरुआत में लगभग 5,000 कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते निवेश और बिजनेस रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है। वर्तमान में कंपनी में दुनिया भर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और संभावित छंटनी कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से भी कम होगी। सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स डिवीजन पर सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार सबसे अधिक प्रभाव सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स (गेमिंग) डिवीजन पर पड़ सकता है। विशेष रूप से एक्सबॉक्स कारोबार में नई नेतृत्व टीम के आने के बाद संगठनात्मक बदलाव तेज हुए हैं। कंपनी कई पुराने पदों को समाप्त कर टीमों का पुनर्गठन कर सकती है, ताकि कारोबार को नई रणनीति के अनुरूप ढाला जा सके। एआई निवेश के लिए घटाए जा रहे परिचालन खर्च विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट पिछले कुछ वर्षों से ओपनएआई के साथ मिलकर एआई डेटा सेंटर, कोपायलट और अन्य जनरेटिव एआई तकनीकों पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। इन परियोजनाओं पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के लिए कंपनी अन्य परिचालन लागत में कटौती कर रही है। जिन कार्यों को अब एआई और ऑटोमेशन के जरिए अधिक दक्षता से किया जा सकता है, वहां मानव संसाधन की आवश्यकता कम की जा रही है। पूरी टेक इंडस्ट्री में बदल रहा रोजगार का स्वरूप माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026 में मेटा, अमेजन, ओरेकल और लिंक्डइन जैसी कई प्रमुख टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी हैं। उद्योग जगत का मानना है कि एआई के बढ़ते उपयोग से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। भविष्य में कंपनियां कम कर्मचारियों और अधिक ऑटोमेशन के साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं, जिससे तकनीकी क्षेत्र में रोजगार का स्वरूप लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन ग्रेड-I और टेक्नीशियन ग्रेड-III के कुल 6,557 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 30 जून 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 29 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। कौन कर सकता है आवेदन? टेक्नीशियन ग्रेड-I पद के लिए उम्मीदवार की आयु 18 से 33 वर्ष और टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। एससी/एसटी वर्ग को 5 वर्ष और ओबीसी वर्ग को 3 वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार का 10वीं पास होना अनिवार्य है। संबंधित पद के अनुसार अभ्यर्थियों के पास निर्धारित तकनीकी योग्यता या इंजीनियरिंग से जुड़ी डिग्री/डिप्लोमा होना भी आवश्यक है। विस्तृत योग्यता की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में देखी जा सकती है। कितनी है आवेदन फीस? सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग: ₹500 एससी, एसटी, महिला, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, ईबीसी और पूर्व सैनिक: ₹250 आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। चयन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT) के माध्यम से किया जाएगा। परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जो सामान्य जागरूकता, गणित, जनरल इंटेलिजेंस एवं रीजनिंग और कंप्यूटर ज्ञान जैसे विषयों पर आधारित होंगे। प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी। रेलवे में टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और परीक्षा की तैयारी शुरू कर दें।