सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जून 2026 का यह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण है। रेलवे, भारतीय सेना, यूपीएससी, बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निकली कई बड़ी भर्तियों की आवेदन प्रक्रिया 14 जून तक समाप्त होने वाली है। ऐसे में योग्य अभ्यर्थियों के लिए यह अंतिम मौका है कि वे समय रहते आवेदन पूरा कर लें।
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने 2759 पदों पर टेक्निकल असिस्टेंट ग्रुप-C भर्ती निकाली है।
योग्यता:
अंतिम तिथि: 11 जून 2026
रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने 11,127 पदों पर असिस्टेंट लोको पायलट भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं।
योग्यता:
आयु सीमा: 18 से 30 वर्ष
अंतिम तिथि: 14 जून 2026
भारतीय सेना ने 10+2 टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES-56) के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं।
योग्यता:
पद: 90
अंतिम तिथि: 12 जून 2026
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने NDA-II और CDS-II परीक्षाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अंतिम तिथि: 9 जून 2026, शाम 6 बजे तक
बैंक ऑफ बड़ौदा में 5000 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती निकली है।
योग्यता:
आयु सीमा: 20 से 28 वर्ष
अंतिम तिथि: 8 जून 2026
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 7150 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती निकाली है।
योग्यता: स्नातक
नई अंतिम तिथि: 15 जून 2026
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) बिलासपुर ने 1191 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती निकाली है।
योग्यता:
अंतिम तिथि: 11 जून 2026
नेशनल एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) ने 268 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है।
पद:
योग्यता:
अंतिम तिथि: 10 जून 2026
आवेदन शुल्क:
इन भर्तियों की अंतिम तिथियां बेहद नजदीक हैं। आवेदन करने से पहले आधिकारिक अधिसूचना को ध्यान से पढ़ें और पात्रता, आयु सीमा, दस्तावेज और शुल्क की जानकारी अवश्य जांच लें। अंतिम दिन वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक की वजह से तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं, इसलिए समय रहते आवेदन करना बेहतर रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स स्टडीज एंड एनालिसिस (ISSA) लैब ने छात्रों के लिए पेड इंटर्नशिप का शानदार अवसर जारी किया है। इस योजना के तहत कुल 25 पदों पर चयन किया जाएगा, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 20 जून तक कर सकते हैं आवेदन इच्छुक उम्मीदवार 20 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों की इंटर्नशिप 3 अगस्त 2026 से शुरू होगी। आवेदन प्रक्रिया ईमेल के माध्यम से पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों को सभी जरूरी दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में भेजने होंगे। कौन कर सकता है आवेदन? इस इंटर्नशिप के लिए अंतिम वर्ष के छात्र और पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। पात्रता के तहत BTech/BE (फाइनल ईयर), MSc और MTech के छात्र शामिल हैं। उम्मीदवारों ने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रथम श्रेणी (First Division) में अध्ययन किया होना चाहिए। पात्र विषयों में कंप्यूटर साइंस, IT, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, गणित, एप्लाइड मैथमेटिक्स, ऑपरेशनल रिसर्च और स्टैटिस्टिक्स जैसे विषय शामिल हैं। बिना परीक्षा मेरिट पर होगा चयन DRDO ISSA की इस इंटर्नशिप में किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं होगी। चयन पूरी तरह शैक्षणिक मेरिट और शॉर्टलिस्टिंग के आधार पर किया जाएगा। यह अवसर उन छात्रों के लिए खास माना जा रहा है जो रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और डेटा एनालिसिस का अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं। 30,000 रुपये तक मिलेगा स्टाइपेंड इंटर्नशिप की अवधि 6 महीने होगी। चयनित छात्रों को हर महीने 5,000 रुपये स्टाइपेंड मिलेगा, यानी कुल 30,000 रुपये की राशि दी जाएगी। भुगतान दो चरणों में किया जाएगा पहले तीन महीने बाद 15,000 रुपये और अंत में शेष 15,000 रुपये। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 8 जून 2026 अंतिम तिथि: 20 जून 2026 चयन सूचना: जुलाई 2026 का दूसरा/तीसरा सप्ताह इंटर्नशिप शुरुआत: 3 अगस्त 2026 छात्रों के लिए बड़ा अवसर DRDO ISSA की यह इंटर्नशिप तकनीकी छात्रों के लिए रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इसमें काम करने वाले छात्रों को सिस्टम स्टडीज, डेटा एनालिसिस और रिसर्च वर्क का वास्तविक अनुभव मिलेगा, जो उनके करियर को मजबूत बना सकता है।
रांची। झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने जेल वार्डर (कक्षपाल) भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है। आयोग ने न्यायालय के आदेश के बाद भर्ती कार्यक्रम में संशोधन करते हुए पात्र उम्मीदवारों को आवेदन का एक और अवसर प्रदान किया है। इच्छुक अभ्यर्थी अब 19 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 1733 पदों पर होगी भर्ती यह भर्ती झारखंड कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा (JKCE-2025) के माध्यम से आयोजित की जा रही है। भर्ती अभियान के तहत कुल 1733 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें 1634 पद पुरुष अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित हैं, जबकि महिला उम्मीदवारों के लिए भी अलग पद आरक्षित किए गए हैं। भर्ती प्रक्रिया राज्य के जेल विभाग में मानव संसाधन को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है। महत्वपूर्ण तिथियां • आवेदन की अंतिम तिथि : 19 जून 2026 • शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि : 21 जून 2026 • आवेदन पत्र प्रिंट करने की अंतिम तिथि : 21 जून 2026 • आवेदन संशोधन (Correction Window) : 22 से 24 जून 2026 योग्यता और आयु सीमा इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों के आधार पर किया जाएगा— • शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) • लिखित परीक्षा • मेडिकल परीक्षण PET केवल क्वालिफाइंग प्रकृति की होगी। इसमें सफल उम्मीदवार ही लिखित परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। जल्द करें आवेदन जो अभ्यर्थी पहले आवेदन नहीं कर सके थे, उनके लिए यह सुनहरा अवसर है। आयोग ने उम्मीदवारों को अंतिम तिथि का इंतजार न करते हुए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है। भर्ती से जुड़ी सभी शर्तों और दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही आवेदन करें।
टेक जॉब मार्केट में बड़ी गिरावट भारत के आईटी और टेक सेक्टर में नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में सक्रिय टेक जॉब ओपनिंग्स पिछले 28 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के कामकाज के तरीके बदल रहा है, नई भर्तियों की रफ्तार भी धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 में देशभर में सक्रिय टेक नौकरियों की संख्या घटकर 93,000 रह गई है। यह पिछले 28 महीनों का सबसे कम आंकड़ा माना जा रहा है। एक महीने में 14 फीसदी की बड़ी गिरावट रोजगार विश्लेषण कंपनी Xpheno की रिपोर्ट के अनुसार, मई में सक्रिय टेक जॉब ओपनिंग्स लगभग 1.08 लाख थीं, जो जून में घटकर 93,000 पर आ गईं। यानी सिर्फ एक महीने में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पिछले एक वर्ष में सबसे तेज मासिक गिरावटों में से एक है, जो टेक उद्योग में बदलती परिस्थितियों की ओर इशारा करती है। AI बन रहा है भर्ती में कमी की बड़ी वजह विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता इस्तेमाल इस बदलाव का एक प्रमुख कारण हो सकता है। Careernet के मुख्य व्यवसाय अधिकारी Neelabh Shukla के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में AI का उपयोग अब मुख्यधारा का हिस्सा बनता जा रहा है। इससे कई कंपनियां पहले की तुलना में कम कर्मचारियों के साथ अधिक काम करने में सक्षम हो रही हैं। उनका कहना है कि भारत जैसे बड़े टेक हायरिंग बाजार में इसका असर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रहा है। IT कंपनियों से लेकर स्टार्टअप तक प्रभावित रिपोर्ट के अनुसार, नौकरी के अवसरों में कमी केवल आईटी सर्विस कंपनियों तक सीमित नहीं है। टेक स्टार्टअप, सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट कंपनियां और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी भर्ती की गति कमजोर पड़ी है। हालांकि, Global Capability Centres (GCCs) एक ऐसा क्षेत्र रहा जहां साल-दर-साल आधार पर 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद मासिक आधार पर यहां भी लगभग 6 प्रतिशत की कमी देखी गई। H-1B वीजा धारकों की वापसी से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाने वाला एक अन्य पहलू अमेरिका से लौट रहे भारतीय तकनीकी पेशेवर हैं। कई भारतीय टेक कर्मचारी अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करते हैं। यह वीजा सीधे नियोक्ता से जुड़ा होता है। नौकरी जाने की स्थिति में कर्मचारी को सीमित समय के भीतर नई नौकरी ढूंढनी होती है, अन्यथा उसे अपने देश लौटना पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में हालिया छंटनियों और सख्त आव्रजन नीतियों के कारण बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर भारत लौट सकते हैं। इससे पहले से कमजोर पड़े भारतीय जॉब मार्केट में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। अमेरिका की सख्त नीतियों का असर हाल के वर्षों में अमेरिका ने H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियमों को सख्त किया है। इसके कारण विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार संबंधी अनिश्चितता बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में अमेरिका जाने वाले भारतीय टेक पेशेवरों की संख्या लौटने वालों से लगभग 12,300 अधिक थी। वहीं 2024 में यह अंतर घटकर 6,100 रह गया। इससे संकेत मिलता है कि भारत लौटने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। क्या आगे और मुश्किल होगा जॉब मार्केट? विशेषज्ञों का मानना है कि AI के बढ़ते उपयोग, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलती भर्ती रणनीतियों के कारण टेक सेक्टर में नौकरी बाजार आने वाले महीनों में भी दबाव में रह सकता है। हालांकि AI नए अवसर भी पैदा कर रहा है। ऐसे में उद्योग विशेषज्ञ युवाओं को AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑटोमेशन जैसी उभरती तकनीकों में कौशल विकसित करने की सलाह दे रहे हैं ताकि बदलते रोजगार बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनी रहे।