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बंगाल-तमिलनाडु चुनाव से पहले सियासी संग्राम तेज: खड़गे के बयान पर बवाल, कल वोटिंग

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Voters standing in queue at polling booth during assembly elections in India
Assembly Elections Voting Day India

 

चुनाव प्रचार थमा, अब मतदान की बारी

Election Commission of India के निर्देशानुसार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो चुका है। दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म है और सभी दल अंतिम रणनीति में जुटे हुए हैं।

खड़गे के बयान से मचा सियासी तूफान

कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने तमिलनाडु की एक रैली में प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “आतंकी” कह दिया। इस बयान के सामने आते ही देशभर में विवाद छिड़ गया और राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

हालांकि, बाद में खड़गे ने सफाई दी कि उनका आशय शाब्दिक रूप से यह नहीं था, बल्कि उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्ष और संस्थाओं पर दबाव बनाते हैं।

अमित शाह का पलटवार, कांग्रेस पर साधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने खड़गे के बयान को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा से कांग्रेस ने राजनीतिक मर्यादाओं को पार कर दिया है और यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

शाह ने यह भी कहा कि इस तरह के बयान प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।

बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण में लगभग 3.60 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। सुरक्षा के मद्देनजर 2,450 केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात की गई हैं, जबकि 8,000 से अधिक बूथों को संवेदनशील घोषित किया गया है।

ED की छापेमारी से बढ़ा चुनावी तापमान

चुनाव से पहले Enforcement Directorate (ED) की पश्चिम बंगाल में एक दर्जन से अधिक छापेमारी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई चल रही जांच के तहत की गई है, जबकि राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास बताया है।

तमिलनाडु में NDA बनाम DMK गठबंधन की टक्कर

तमिलनाडु में मुकाबला काफी दिलचस्प है, जहां National Democratic Alliance (NDA) विपक्षी गढ़ में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वहीं DMK गठबंधन अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इन नतीजों से तय होगा कि किस दल को जनता ने शासन की जिम्मेदारी सौंपी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Arvind Kejriwal
बंगाल चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल का अरविंद केजरीवाल को समर्थन, कहा- लोकतंत्र की लड़ाई दीदी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल ने अरविंद केजरीवाल से फोन पर बात कर उन्हें पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया। आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल ने कहा कि ममता बनर्जी देश के लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण और कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी साझा की।   भाजपा और केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इन सबके बावजूद आगामी चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा। केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुटता जरूरी है।   ममता की रैली को अनुमति न मिलने पर विवाद यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग ने भवानीपुर में ममता बनर्जी की प्रस्तावित रैली को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एक मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें अपने ही क्षेत्र में रैली की इजाजत नहीं दी गई, जबकि प्रधानमंत्री की रैलियों को जल्दी मंजूरी मिल जाती है।   चुनावी माहौल हुआ गरम पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला इस बार बेहद दिलचस्प हो गया है। 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में होगा—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 142 सीटों पर बाद में आयोजित होगा। मतगणना 4 मई को होगी।   सत्ता के लिए कड़ा मुकाबला राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में है। ऐसे में केजरीवाल का यह समर्थन चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना सकता है।

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दो साल के भीतर दूसरी मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

  हाई कोर्ट का स्पष्ट संदेश Allahabad High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी महिला कर्मचारी को सिर्फ इस आधार पर दूसरी मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) से वंचित नहीं किया जा सकता कि पहली और दूसरी छुट्टी के बीच दो साल का अंतर नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व लाभ से जुड़े कानूनी अधिकार किसी भी प्रशासनिक नियम से ऊपर हैं। याचिका पर सुनवाई में आया फैसला यह फैसला जस्टिस करुणेश सिंह पवार की लखनऊ पीठ ने सुनाया। मामला मनीषा यादव की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने 4 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि Maternity Benefit Act, 1961 एक कल्याणकारी कानून है और इसके प्रावधानों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। सरकारी नियमों पर कानून भारी राज्य सरकार ने अपने पक्ष में वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा था कि दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो साल का अंतर होना जरूरी है। लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानून के सामने किसी भी तरह के कार्यकारी निर्देश या नियम टिक नहीं सकते। कोर्ट ने आदेश रद्द कर दी राहत अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने 2021 में पहले बच्चे को जन्म दिया था और 2022 में दूसरी मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे गलत आधार पर खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने संबंधित आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि मनीषा यादव को 6 अप्रैल 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश दिया जाए। महिलाओं के अधिकारों के लिए अहम फैसला यह निर्णय कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। इससे साफ संदेश गया है कि मातृत्व लाभ जैसे अधिकारों को किसी भी प्रशासनिक शर्त के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
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याद है पहलगाम में दिल दहला देने वाला हमला, जहां धर्म पूछकर बरसाई गई गोलियां

श्रीनगर, एजेंसियां। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी में वह दर्दनाक घटना घटी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। दोपहर करीब ढाई बजे पर्यटकों से भरी वादियां अचानक गोलियों की आवाज से गूंज उठीं। हमलावरों ने पहले लोगों से नाम और धर्म पूछा और हिंदू बताते ही उन्हें गोली मार दी। इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए।   कश्मीर की शांति पर लगा गहरा आघात हमले से पहले कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे थे और पर्यटन तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन इस घटना ने घाटी को फिर से आतंक और भय के दौर में धकेल दिया। दशकों की मेहनत से लौट रही शांति को इस एक हमले ने गहरा झटका दिया।   पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद पर आरोप प्रारंभिक जांच में इस हमले के तार पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से जुड़े पाए गए। आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। जांच में यह भी सामने आया कि हमलावर स्थानीय मदद से इलाके में छिपे हुए थे और सही मौके का इंतजार कर रहे थे।   स्थानीय मदद और मास्टरमाइंड की तलाश जांच एजेंसियों को पता चला कि कुछ स्थानीय लोगों ने आतंकियों को हथियार और ठिकाना उपलब्ध कराया। हमले के मास्टरमाइंड के पाकिस्तान में छिपे होने के सबूत भी मिले। सुरक्षा बलों ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाकर कई आतंकियों को मार गिराया।   भारत की जवाबी कार्रवाई: ऑपरेशन सिंदूर हमले के करीब 15 दिन बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया। इस कार्रवाई में कई ठिकाने नष्ट किए गए। हालांकि, इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।   देश और दुनिया की प्रतिक्रिया इस हमले की दुनियाभर में निंदा हुई और कई देशों ने भारत के प्रति संवेदना व्यक्त की। यह घटना आज भी देश के लिए एक गहरा जख्म है, जिसे भुला पाना आसान नहीं है।

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