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इंफाल में रैली के दौरान बवाल , पुलिस ने 21 लोगों को दबोचा

Anjali Kumari अप्रैल 20, 2026 0
Imphal rally
Imphal rally

इंफाल, एजेंसियां। इंफाल में हाल ही में आयोजित एक विरोध मार्च के दौरान हिंसा भड़कने के मामले में पुलिस ने 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह रैली 18 अप्रैल को इम्फाल-जिरीबाम मार्ग पर निकाली गई थी, जिसे विभिन्न नागरिक समाज संगठनों ने आयोजित किया था। प्रदर्शन हाल ही में हुए बम हमले के विरोध में किया जा रहा था, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी।

 

सुरक्षाबलों पर हमला, कई घायल


पुलिस के अनुसार, रैली के दौरान भीड़ अचानक उग्र हो गई और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव, पेट्रोल बम और गुलेल से हमला किया गया। इस हिंसा में सीआरपीएफ की 232वीं बटालियन के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ ही सुरक्षा वाहनों में तोड़फोड़ की गई, जिससे हालात और बिगड़ गए।

 

भड़काऊ पोस्ट पर भी कार्रवाई


पुलिस ने एक 23 वर्षीय युवक को भी गिरफ्तार किया है, जिस पर सोशल मीडिया के जरिए हिंसा भड़काने का आरोप है। बताया गया कि आरोपी एक स्थानीय संगठन से जुड़ा हुआ है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

 

कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन जारी


रविवार शाम को मणिपुर घाटी के कई हिस्सों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट समेत कई क्षेत्रों में रैलियां और प्रदर्शन हुए, जिनमें कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प भी हुई।

 

स्थिति नियंत्रण में, जांच जारी


हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पुलिस ने चेतावनी दी है कि हिंसा या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारत-कोरिया डील से खुले नए रास्ते, 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का ब्लूप्रिंट तैयार

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung के बीच हैदराबाद हाउस में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय शिखर वार्ता हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए नई रणनीतिक रूपरेखा तैयार की।   पहली भारत यात्रा का खास महत्व जून 2025 में पद संभालने के बाद राष्ट्रपति ली की यह पहली भारत यात्रा है। साथ ही, पिछले आठ वर्षों में दक्षिण कोरिया के किसी राष्ट्रपति की यह पहली राज्य स्तरीय यात्रा है, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ गया है।   व्यापार और तकनीक पर फोकस वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, जहाज निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने 2010 से लागू व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आधुनिक जरूरतों के अनुसार मजबूत करने पर सहमति जताई।   2030 तक 50 अरब डॉलर का लक्ष्य बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय करना रहा। यह लक्ष्य भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को नई गति देने में मददगार साबित हो सकता है।   इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर भी चर्चा दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी जोर दिया। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।   आर्थिक ही नहीं, सांस्कृतिक रिश्तों को भी मजबूती राष्ट्रपति ली अपनी पत्नी किम हे-क्युंग के साथ भारत दौरे पर हैं। यह यात्रा न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय रिश्तों को भी नई दिशा देगी।

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आसनसोल में चुनावी सभा के बाद बड़ा हादसा: बेकाबू बस भीड़ में घुसी, 7 साल की बच्ची समेत 12 घायल; इलाके में तनाव

Indian voters standing in queue at polling booth highlighting unequal voter distribution across constituencies
‘एक व्यक्ति, एक वोट’ पर बढ़ता सवाल: असमान मतदाता संख्या के बीच परिसीमन की मांग तेज

भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद समान प्रतिनिधित्व पर टिकी है, जहां हर नागरिक का वोट बराबर महत्व रखता है। इसी सिद्धांत को “एक व्यक्ति, एक वोट” कहा जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में निर्वाचन क्षेत्रों के बीच मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता इस सिद्धांत को कमजोर करती नजर आ रही है। ऐसे में अब परिसीमन (Delimitation) की जरूरत को लेकर बहस तेज हो गई है। क्या है समस्या? देश के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में बहुत बड़ा अंतर है। उदाहरण के तौर पर: Malkajgiri में करीब 37.80 लाख मतदाता हैं जबकि Lakshadweep में केवल 58 हजार मतदाता इसी तरह: Ghaziabad में करीब 30 लाख वोटर हैं वहीं छोटे क्षेत्रों में यह संख्या कुछ लाख से भी कम है ऐसी स्थिति में कम आबादी वाले क्षेत्र के मतदाता का प्रभाव अधिक हो जाता है, जो लोकतांत्रिक समानता के सिद्धांत के विपरीत है। ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ क्यों हो रहा कमजोर? जब किसी क्षेत्र में बहुत अधिक मतदाता होते हैं: वहां का सांसद हर व्यक्ति तक पहुंच नहीं बना पाता लोगों की समस्याएं और अपेक्षाएं पूरी तरह सामने नहीं आ पातीं दूसरी ओर, कम मतदाताओं वाले क्षेत्रों में: प्रतिनिधि अपेक्षाकृत कम लोगों का प्रतिनिधित्व करता है वहां मतदाताओं की आवाज ज्यादा प्रभावी हो जाती है यही असंतुलन “एक व्यक्ति, एक वोट” के मूल सिद्धांत को कमजोर करता है। क्या है परिसीमन? परिसीमन का मतलब है: लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण हर सीट पर मतदाताओं की संख्या को संतुलित करना जब लोकसभा सीटों का परिसीमन होता है, तो उसके अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों की संरचना भी बदल जाती है। सरकार का क्या कहना है? केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने संसद में कहा कि: अधिक मतदाताओं वाले क्षेत्रों के सांसद सभी की अपेक्षाएं पूरी नहीं कर पाते इसलिए परिसीमन जरूरी है ताकि हर सीट पर मतदाताओं की संख्या संतुलित हो सके उन्होंने यह भी कहा कि “एक व्यक्ति, एक वोट” का सिद्धांत तभी सही मायनों में लागू होगा, जब यह असमानता दूर की जाए। महिला आरक्षण से भी जुड़ा है मामला सरकार के अनुसार: महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भी परिसीमन जरूरी है सीटों का सही बंटवारा और संख्या तय होने के बाद ही आरक्षण का लाभ सही तरीके से मिल सकेगा जनसंख्या बढ़ी, लेकिन सीटें नहीं 1971 में भारत की जनसंख्या करीब 54 करोड़ थी आज यह बढ़कर 140 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है लेकिन लोकसभा सीटों की संख्या लंबे समय से लगभग स्थिर है। विशेषज्ञों का मानना है कि: सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने पर विचार होना चाहिए इससे बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा बड़े और छोटे संसदीय क्षेत्र (उदाहरण) सबसे बड़े क्षेत्र: मलकाजगिरि – 37.80 लाख बेंगलुरु उत्तर – 32.15 लाख गाजियाबाद – 29.48 लाख गौतम बुद्ध नगर – 26.81 लाख पश्चिमी दिल्ली – 25.92 लाख सबसे छोटे क्षेत्र: लक्षद्वीप – 58 हजार दमन और दीव – 1.34 लाख लद्दाख – 1.90 लाख दादरा और नगर हवेली – 2.83 लाख अंडमान और निकोबार – 3.15 लाख

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बंगाल चुनाव 2026: कौन हैं विक्रम साव? जिनकी छोटी सी दुकान पर पीएम मोदी ने लिया ‘झालमुड़ी ब्रेक’

Narendra Modi के चुनावी दौरे के दौरान एक दिलचस्प और मानवीय पल सामने आया, जिसने राजनीति के बीच आम जिंदगी की झलक दिखा दी। West Bengal के जंगलमहल इलाके में जनसभा के बाद पीएम मोदी अचानक एक सड़क किनारे की दुकान पर रुक गए और वहां झालमुड़ी का आनंद लिया। इस घटना के बाद हर कोई जानना चाहता है–आखिर कौन हैं वो दुकानदार विक्रम साव? कौन हैं विक्रम साव? झालमुड़ी बेचने वाले विक्रम साव अचानक सुर्खियों में आ गए, जब प्रधानमंत्री उनकी दुकान पर पहुंचे। विक्रम साव मूल रूप से Gaya (बिहार) के रहने वाले हैं रोज़गार के लिए वे पश्चिम बंगाल के झारग्राम में आकर बस गए यहां वे सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, जहां वे झालमुड़ी बेचते हैं स्थानीय लोगों के बीच उनकी दुकान पहले से ही काफी मशहूर बताई जाती है एक साधारण दुकानदार के लिए यह पल किसी सपने जैसा था, जिसे वह खुद भी यकीन नहीं कर पा रहे हैं। कैसे हुआ यह खास पल? घटना उस समय की है जब: पीएम मोदी की जनसभा खत्म हो चुकी थी उनका काफिला हेलीपैड की ओर जा रहा था अचानक Jhargram के कॉलेज मोड़ के पास काफिला रुक गया इसके बाद पीएम खुद कार से उतरे और सीधे विक्रम साव की दुकान की ओर बढ़ गए। “भैया, मुझे झालमुड़ी खिलाओ” दुकान पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा: “भैया, मुझे झालमुड़ी खिलाओ… कितने की देते हो?” दुकानदार ने जवाब दिया कि आप जितने का कहें। लेकिन पीएम मोदी ने insist करते हुए कहा कि कीमत बताइए। विक्रम ने कहा: 10 और 20 रुपये पीएम ने अपनी जेब से 10 रुपये निकालकर दिए और उसी कीमत की झालमुड़ी बनवाई दुकानदार पैसे लेने में हिचकिचा रहा था, लेकिन पीएम ने साफ कहा–“ऐसे नहीं चलेगा” और पैसे देकर ही सामान लिया। मजेदार बातचीत और हल्का माहौल झालमुड़ी बनाते समय दुकानदार ने पूछा: “क्या आप प्याज खाते हैं?” इस पर पीएम मोदी ने हंसते हुए जवाब दिया: “हां, प्याज-मिर्च खाता हूं… किसी का सिर नहीं।” यह सुनकर वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। बच्चों के साथ खास जुड़ाव जैसे ही लोगों को पता चला कि प्रधानमंत्री वहां हैं: महिलाओं और बच्चों की भीड़ जुट गई पीएम मोदी ने बच्चों के हाथों में खुद झालमुड़ी बांटी कई बच्चे आगे बढ़े तो उन्होंने सबको दिया वह दृश्य कुछ ऐसा था मानो कोई नेता नहीं, बल्कि परिवार का कोई सदस्य बच्चों के साथ वक्त बिता रहा हो। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पल इस घटना के बाद: तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए खुद Narendra Modi ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तस्वीरें शेयर कीं उन्होंने लिखा कि व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बीच यह छोटा सा ब्रेक यादगार रहा क्यों खास है यह घटना? यह सिर्फ एक झालमुड़ी खाने का मामला नहीं है, बल्कि: यह आम लोगों से जुड़ाव का संदेश देता है चुनावी माहौल में एक सॉफ्ट इमेज पेश करता है छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों को राष्ट्रीय चर्चा में ले आता है विक्रम साव जैसे साधारण दुकानदार के लिए यह घटना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा पल बन गई है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
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