तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के आमतला स्थित निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय पर चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने जुलाई के अंत तक परिसर में किसी भी तरह की तोड़फोड़ या बदलाव पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस राजा बसु चौधरी की एकल पीठ ने रविवार को विशेष अदालत लगाकर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विवादित इमारत से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज अगली सुनवाई में पेश किए जाएं।
ध्वस्तीकरण कार्रवाई को 'लीप्स एंड बाउंड्स' कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान बताया गया कि विवादित भवन इसी कंपनी के स्वामित्व में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व दावों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जुलाई के अंत तक यथास्थिति बनी रहेगी। इसके बाद मामले की विस्तृत सुनवाई नियमित पीठ के समक्ष होगी, जहां दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने शनिवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इमारत को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन का दावा है कि भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाया गया था और निर्माण में भवन नियमों का उल्लंघन हुआ था, इसलिए कार्रवाई की गई।
अभिषेक बनर्जी ने प्रशासन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह उनका आधिकारिक निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय है। उनका दावा है कि भवन वैध रूप से खरीदी गई जमीन पर बनाया गया है और निर्माण के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियां ली गई थीं।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुक गई है। अब इस राजनीतिक और कानूनी विवाद पर अंतिम तस्वीर जुलाई के अंत में होने वाली अगली सुनवाई के बाद ही साफ हो सकेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले लोगों के लिए बड़ी सुविधा शुरू की है। अब टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निवासी ‘राजमार्गयात्रा’ (Rajmargyatra) मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे डिजिटल मासिक लोकल टोल पास बनवा सकेंगे। इस पास के माध्यम से पात्र वाहन चालक संबंधित टोल प्लाजा से पूरे महीने असीमित यात्रा कर सकेंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय लोगों को टोल प्लाजा के चक्कर लगाने से राहत देना और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है। अब नहीं होगी दस्तावेजों की भाग-दौड़ पहले लोकल टोल पास बनवाने या उसका नवीनीकरण कराने के लिए लोगों को टोल प्लाजा पर जाकर निवास प्रमाण पत्र और वाहन संबंधी दस्तावेजों की भौतिक प्रतियां जमा करनी पड़ती थीं। नई डिजिटल व्यवस्था के तहत यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन पूरी हो जाएगी। इससे समय की बचत होगी और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। डिजिलॉकर और वाहन पोर्टल से होगा सत्यापन NHAI ने इस सुविधा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए इसे डिजिलॉकर और वाहन पोर्टल से जोड़ा है। उपयोगकर्ता की सहमति के बाद सिस्टम उसके पते, वाहन की जानकारी और FASTag से जुड़े विवरण स्वतः सत्यापित कर लेगा। वहीं, जीआईएस आधारित तकनीक से यह भी जांच की जाएगी कि आवेदक का घर टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में है या नहीं। 'मार्ग मित्र' एआई हेल्प सेंटर भी शुरू यात्रियों की सुविधा के लिए NHAI ने ऐप में 'मार्ग मित्र' नाम से एआई आधारित डिजिटल हेल्प सेंटर भी लॉन्च किया है। यह 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा और FASTag रिचार्ज, KYC अपडेट, रिफंड स्टेटस, ब्लैकलिस्टिंग की जानकारी तथा सड़क सुरक्षा या वाहन खराब होने जैसी शिकायतों के समाधान में मदद करेगा। फिलहाल यह सुविधा दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा से शुरू की गई है और आने वाले महीनों में इसे देशभर के सभी टोल प्लाजा पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 24वें दिन में पहुंच गई। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेहत पर लगातार नजर रखना जरूरी है। लंबे समय तक भोजन नहीं करने और शरीर में पानी की कमी के कारण मेडिकल टीम उनकी नियमित जांच कर रही है। क्या है सोनम वांगचुक का ताजा हेल्थ अपडेट? डॉक्टरों के मुताबिक सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ब्लड शुगर सामान्य से कम बना हुआ है, जिससे कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बना हुआ है। जांच में पोटैशियम का स्तर 3.2 mEq/L पाया गया है, जो सामान्य सीमा से कम है। खून की जांच में एनीमिया के लक्षण मिले हैं। सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या भी कम पाई गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे उपवास के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति बनी हुई है, इसलिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। इलाज कैसे चल रहा है? डॉक्टरों की सलाह पर सोनम वांगचुक फिलहाल ORS और पोटैशियम सप्लीमेंट ले रहे हैं। मेडिकल टीम ने उन्हें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी दूर करने के लिए IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने की सलाह दी है, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सफदरजंग अस्पताल और AIIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जरूरत के अनुसार सभी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 28 जून से जारी है भूख हड़ताल सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। 18 जुलाई को बिगड़ी थी तबीयत लगातार तीन सप्ताह तक भूख हड़ताल करने के बाद 18 जुलाई को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने CJP के 'संसद चलो मार्च' में शामिल होने के लिए अस्पताल से डिस्चार्ज करने की भी मांग की थी, लेकिन डॉक्टरों ने स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में ही रहने की सलाह दी। एक नजर में पूरा हेल्थ अपडेट अनशन का आज: 24वां दिन अस्पताल: सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली हालत: फिलहाल स्थिर ब्लड शुगर: सामान्य से कम पोटैशियम: 3.2 mEq/L एनीमिया: जांच में पुष्टि WBC: सामान्य से कम क्या ले रहे हैं: ORS और पोटैशियम की दवा क्या लेने से इनकार किया: IV फ्लूइड और ग्लूकोज इलाज: सफदरजंग और AIIMS के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम की निगरानी में डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल वांगचुक की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय तक जारी भूख हड़ताल के कारण किसी भी तरह की चिकित्सीय जटिलता से बचने के लिए 24 घंटे निगरानी और नियमित मेडिकल जांच बेहद जरूरी है।
CJP Parliament March: दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के बाद राजधानी में पूरे दिन हाईवोल्टेज राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल खाली करा दिया। हालांकि देर शाम प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर लौट आए और सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। इस दौरान पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के लिए बनाया गया मंच भी हटा दिया और धरना स्थल से ट्रैम्पोलिन, गद्दे, कालीन समेत अन्य सामान जब्त कर लिया। संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव सोमवार सुबह हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले। संसद मार्ग के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। जंतर-मंतर से हटाया गया धरना संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल को खाली कराया। पुलिस ने सोनम वांगचुक के अनशन के लिए बनाया गया मंच हटाने के साथ-साथ वहां रखा अन्य सामान भी जब्त कर लिया। हालांकि शाम होते-होते प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत तनावपूर्ण माहौल के बीच केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी की। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई रोकने की मांग रखी। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मांगों पर विचार कर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? प्रदर्शनकारी संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं— सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी प्रतिबंध के रिहा किया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। कथित NEET 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। कई छात्र संगठनों का मिला समर्थन इस आंदोलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) सहित कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, शिक्षक और कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद भड़की झड़प सुबह करीब 11 बजे संसद मार्ग पुलिस थाने के पास प्रदर्शनकारियों ने लगाए गए प्रमुख बैरिकेड को हटाने की कोशिश की। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। पुलिस के अनुसार, कुछ उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी, जिससे कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया। हिरासत, इंटरनेट बंद और धारा 163 लागू अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के बाहर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। एहतियात के तौर पर नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। दोपहर बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर सार्वजनिक सभा और प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई। राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, केंद्रीय सचिवालय सहित पूरे लुटियंस दिल्ली इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात रहीं। दंगा-रोधी उपकरणों से लैस जवानों को संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। विपक्षी नेताओं ने भी जताया समर्थन प्रदर्शन के दौरान नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। पांच मेट्रो स्टेशन रहे बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा। स्थिति सामान्य होने के बाद चरणबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं बहाल कर दी गईं।