रांची। रांची के जेएससीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेली जा रही झारखंड टी-20 क्रिकेट लीग 2026 के लीग चरण का समापन रोमांचक मुकाबलों के साथ हुआ। अंतिम दिन छोटानागपुर रॉयल्स ने जमशेदपुर स्टीलर्स को 85 रन से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली, जबकि संथाल स्ट्राइकर्स ने धनबाद डायमंड्स को 9 विकेट से हराकर अपने अभियान का विजयी अंत किया।
पहले मुकाबले में छोटानागपुर रॉयल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट पर 211 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान विराट सिंह ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 58 गेंदों में नाबाद 106 रन बनाए। उनके अलावा मोहम्मद नाजिम सिद्दीकी ने 54 और श्रेष्ठ सागर ने 25 रन की उपयोगी पारी खेली।
212 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जमशेदपुर स्टीलर्स की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने शुरुआती छह विकेट केवल 38 रन पर गंवा दिए। हर्ष राणा ने 46 रन बनाकर संघर्ष किया, लेकिन पूरी टीम 19.1 ओवर में 126 रन पर सिमट गई। रॉयल्स की ओर से राहुल रजक ने 3 और दीपांशु रावत ने 2 विकेट लिए। शतक लगाने वाले विराट सिंह को 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
दिन के दूसरे मुकाबले में धनबाद डायमंड्स की टीम 18.1 ओवर में 106 रन पर ऑलआउट हो गई। राम रौशन ने 32 और विकास कुमार विशाल ने 26 रन बनाए। संथाल स्ट्राइकर्स के संजीत शर्मा और अनमोल राज ने चार-चार विकेट लेकर विपक्षी बल्लेबाजी को ध्वस्त कर दिया।
107 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए संथाल स्ट्राइकर्स ने केवल एक विकेट खोकर 11.5 ओवर में मुकाबला जीत लिया। कुमार सूरज ने नाबाद 53 और विभोर पांडे ने 32 रन बनाए। शानदार गेंदबाजी के लिए संजीत शर्मा को 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
लीग चरण समाप्त होने के बाद अब टूर्नामेंट नॉकआउट दौर में प्रवेश कर चुका है। 22 जून को पहले सेमीफाइनल में कोयलांचल सुपर किंग्स का मुकाबला जमशेदपुर स्टीलर्स से होगा, जबकि दूसरे सेमीफाइनल में छोटानागपुर रॉयल्स की भिड़ंत रांची टाइटन्स से होगी। दोनों मैचों के विजेता फाइनल में जगह बनाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मिस्र ने इतिहास रचते हुए विश्व कप में अपनी पहली जीत दर्ज कर ली। ग्रुप मुकाबले में न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर मिस्र ने 92 साल और 25 दिनों का लंबा इंतजार खत्म किया। 1934 में पहली बार विश्व कप खेलने वाली मिस्र की टीम इससे पहले सात मुकाबलों में जीत हासिल नहीं कर सकी थी। इस ऐतिहासिक जीत के साथ टीम ने न केवल नया अध्याय लिखा, बल्कि ग्रुप तालिका में भी शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। पहले हाफ में पिछड़ा, दूसरे हाफ में पलटा मैच मैच की शुरुआत न्यूजीलैंड ने शानदार अंदाज में की। 15वें मिनट में फिन सुरमैन ने गोल कर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। विश्व कप इतिहास में यह पहला मौका था जब मिस्र की टीम हाफ-टाइम तक पीछे थी। हालांकि दूसरे हाफ में मिस्र ने जबरदस्त वापसी की। 58वें मिनट में मुस्तफा जिको ने बराबरी का गोल दागा, जबकि 67वें मिनट में कप्तान मोहम्मद सलाह ने टीम को बढ़त दिला दी। 82वें मिनट में ट्रेजेगुएट ने तीसरा गोल कर जीत पक्की कर दी। सलाह ने बनाया नया रिकॉर्ड इस मुकाबले में मोहम्मद सलाह ने कई व्यक्तिगत उपलब्धियां भी हासिल कीं। वह विश्व कप के दो अलग-अलग संस्करणों में गोल करने वाले पहले मिस्री खिलाड़ी बन गए। इससे पहले उन्होंने 2018 विश्व कप में भी गोल किया था। 34 वर्ष और 6 दिन की उम्र में गोल कर सलाह मिस्र के लिए विश्व कप में गोल करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए। उन्होंने 1990 में मैगडी अब्देलघनी द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। भावुक हुए कप्तान मैच के बाद 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुने गए मोहम्मद सलाह ने कहा कि यह जीत मिस्र के फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने देश के करोड़ों प्रशंसकों को गर्व महसूस कराने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। सलाह ने यह भी कहा कि अब टीम का पूरा ध्यान अगले मुकाबले पर है, जहां उसका सामना ईरान से होगा। विश्व कप के 11वें दिन खेले गए अन्य मुकाबलों में स्पेन ने सऊदी अरब को 4-0 से हराया, जबकि उरुग्वे-केप वर्डे और बेल्जियम-ईरान के मैच ड्रॉ रहे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गुरुग्राम में क्रिकेटर विराट कोहली ने अपना ब्रांड 'One8' लॉन्च किया। इसके लिए द्वारका एक्सप्रेसवे स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (यशोभूमि) में इवेंट रखा गया। इसमें मशहूर पंजाबी सिंगर करन औजला भी पहुंचे। कार्यक्रम में करन औजला ने कई गाने गाए। उन्होंने विराट कोहली के लिए अपना हिट सॉन्ग 'विनिंग स्पीच' भी सुनाया। इस दौरान विराट ने गाने की लाइन 'औजला दे कन्ना विच नट्टियां' पर करन औजला के साथ स्टेप किया। इसके बाद वह स्टेज पर बैठकर उनके गाने सुनते नजर आए।
नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में शुक्रवार (19 जून) को कनाडा और कतर के बीच खेले गए मुकाबले के बाद मैदान पर तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। वैंकूवर में खेले गए इस मैच में कनाडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कतर को 6-0 से करारी शिकस्त दी, लेकिन मैच के अंत में खिलाड़ियों के बीच हुई तीखी झड़प ने मुकाबले की चर्चा का रुख बदल दिया। कनाडा की बड़ी जीत के बावजूद टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता मिडफील्डर इस्माइल कोने की चोट रही। एक खतरनाक टक्कर के बाद उन्हें गंभीर चोट लगी और स्ट्रेचर की मदद से मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। इस्माइल कोने की चोट के बाद बढ़ा विवाद मुकाबले के दौरान कतर के खिलाड़ी असीम मदीबो और कनाडा के मिडफील्डर इस्माइल कोने के बीच जोरदार टक्कर हुई। इस चुनौती में कोने बुरी तरह घायल हो गए और मेडिकल टीम को तुरंत मैदान पर बुलाना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाया गया। घटना की VAR समीक्षा के बाद रेफरी ने असीम मदीबो को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया। मैच खत्म होते ही भिड़ गए दोनों टीमों के खिलाड़ी घटना के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया। अंतिम सीटी बजते ही मैदान पर तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि कनाडा के खिलाड़ी पूरे मैच के दौरान कतर की आक्रामक टैकलिंग से नाराज थे और इसी वजह से माहौल और अधिक गर्म हो गया। कोच भी बहस में हुए शामिल स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोनों टीमों के मुख्य कोच भी विवाद का हिस्सा बन गए। कनाडा के कोच जेसी मार्श और कतर के कोच जुलेन लोपेटेगी के बीच भी मैदान पर बहस देखने को मिली। हालांकि, बाद में अधिकारियों और सपोर्ट स्टाफ ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। कनाडा की शानदार जीत विवाद से पहले कनाडा ने पूरे मैच में अपना दबदबा बनाए रखा और कतर को 6-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। हालांकि, इस्माइल कोने की चोट और मैच के बाद हुए हंगामे ने इस जीत की चमक कुछ फीकी कर दी।