ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा हमला सामने आया है। ईरान ने इजरायल के उत्तरी शहर हाइफा पर मिसाइल दागी, जिसमें एक रिहायशी अपार्टमेंट ब्लॉक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को ईरान की ओर से इजरायल पर कुल चार मिसाइलें दागी गईं। इनमें से एक भारी मिसाइल सीधे हाइफा स्थित एक अपार्टमेंट पर गिरी, जिससे इमारत का आधा हिस्सा ढह गया। बचा हुआ हिस्सा भी असंतुलित हो गया, जिससे उसके कभी भी गिरने का खतरा बना रहा और राहत-बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया।
हमले के बाद राहत और बचाव दलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरी रात मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी रखा। सोमवार सुबह तक चले अभियान में दो लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि दो अन्य लोगों की तलाश अब भी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का काम सावधानी से किया जा रहा है, ताकि और नुकसान न हो।
ईरान के नए हमलों के बाद पूरे मध्य इजरायल में हवाई हमले के सायरन लगातार गूंजते रहे, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। इजरायली सेना ने ईरान की ओर से दागी गई अन्य मिसाइलों का भी पता लगाया, जिसके बाद कई इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया।
सोमवार सुबह भी ईरान की ओर से तीन और मिसाइलें दागे जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद मध्य इजरायल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। हालांकि, इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, जबकि कुछ मिसाइलें खाली क्षेत्रों में जाकर गिरीं।
हाइफा इजरायल का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और इसका सामरिक महत्व काफी ज्यादा है। यह शहर भूमध्य सागर के तट पर और माउंट कार्मेल की ढलानों पर स्थित है। यही वजह है कि यह अक्सर दुश्मन देशों के निशाने पर रहता है।
इसके अलावा, हाइफा लेबनान सीमा के काफी करीब है, जहां से हिज़्बुल्लाह के रॉकेट भी इस क्षेत्र को निशाना बना सकते हैं। इस कारण यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील बना हुआ है।
हाइफा में अपार्टमेंट पर मिसाइल गिरने के बाद जब राहत-बचाव कार्य चल रहा था, तभी एक और संभावित मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की गई। इससे बचाव कार्य में लगे दलों और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई। हालांकि, कुछ समय बाद इस अलर्ट को वापस ले लिया गया।
लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते तनाव के बीच इजरायल में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। वहीं, हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सिडनी, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार मामला ड्रिंक-ड्राइविंग से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने खुद पुलिस के सामने यह स्वीकार किया कि गाड़ी चलाने से पहले उन्होंने शराब पी थी। इस खुलासे के बाद मामला और गंभीर हो गया है और अब उनकी 7 मई को कोर्ट में पेशी तय है। पुलिस जांच में हुआ खुलासा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना ईस्टर के दिन सिडनी में हुई, जब पुलिस एक इलाके में रैंडम ब्रेथ टेस्टिंग कर रही थी। इसी दौरान एक वैन चेकपोस्ट से पहले रुक गई, जिससे पुलिस को शक हुआ। जांच के दौरान पता चला कि वाहन चला रहे वॉर्नर ने शराब का सेवन किया हुआ था। ‘तीन ग्लास वाइन’ पीने की बात कबूली पुलिस के मुताबिक, वॉर्नर ने बताया कि वह एक दोस्त के साथ समय बिता रहे थे और उसी दौरान उन्होंने तीन ग्लास वाइन पी थी। बाद में उन्हें मरौब्रा पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां जांच में उनका ब्लड अल्कोहल लेवल 0.104 पाया गया। यह ऑस्ट्रेलिया में तय कानूनी सीमा से काफी अधिक माना जाता है। कोर्ट केस का असर करियर पर भी संभव वॉर्नर पर मिड-रेंज ड्रिंक-ड्राइविंग का आरोप लगाया गया है। यदि कोर्ट उन्हें दोषी ठहराता है, तो इसका असर सिर्फ उनकी कानूनी स्थिति पर ही नहीं, बल्कि ब्रांड इमेज, कमर्शियल डील्स और भविष्य की पेशेवर गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। मैदान पर फॉर्म, बाहर विवाद फिलहाल वॉर्नर PSL 2026 में कराची किंग्स की कप्तानी कर रहे हैं और हाल ही में शानदार अर्धशतक भी जड़ चुके हैं। हालांकि, उनके चमकदार क्रिकेट करियर के साथ विवाद भी लगातार जुड़े रहे हैं। ऐसे में यह नया मामला उनकी छवि पर फिर सवाल खड़े कर रहा है।
मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान पर हमले रोकने और 14 दिन के संघर्षविराम का ऐलान कर दिया। इस फैसले ने जहां वैश्विक स्तर पर राहत दी, वहीं इजरायल के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक झटका साबित हुआ। ट्रंप के फैसले से क्यों चौंका इजरायल? इजरायल लंबे समय से ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में था। लेकिन सीजफायर के ऐलान ने उसकी रणनीति को अचानक रोक दिया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनका सुरक्षा तंत्र इस फैसले से असहज नजर आ रहा है, क्योंकि: इजरायल ईरान को सैन्य रूप से कमजोर करना चाहता था युद्धविराम से उसके अभियान की गति थम गई लेबनान और हिजबुल्लाह को लेकर उसकी चिंताएं बनी हुई हैं ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला? डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि: अमेरिका अपने प्रमुख सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है अब स्थायी शांति समझौते की दिशा में बातचीत जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना प्राथमिक शर्त थी, जिस पर ईरान राजी हो गया यह फैसला शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद लिया गया। ईरान की शर्तें क्या हैं? ईरान ने संघर्षविराम के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा, जिसमें प्रमुख बिंदु शामिल हैं: क्षेत्रीय हमलों को पूरी तरह रोकना ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करना होर्मुज मार्ग को सुरक्षित और खुला रखना परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता ईरान के नेतृत्व, जिसमें मोज्तबा खामेनेई की भूमिका अहम मानी जा रही है, ने इन शर्तों पर सहमति के बाद सीजफायर को मंजूरी दी। इजरायल की सबसे बड़ी चिंता इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि: सीजफायर का असर लेबनान और हिजबुल्लाह पर पड़ सकता है उसकी स्वतंत्र सैन्य रणनीति सीमित हो सकती है हालांकि इजरायल ने औपचारिक रूप से सीजफायर का सम्मान करने की बात कही है, लेकिन अंदरूनी असंतोष साफ नजर आ रहा है। आगे क्या होगा? 14 दिन का यह संघर्षविराम बेहद अहम है पाकिस्तान में आगे शांति वार्ता प्रस्तावित है चीन और अन्य देशों की भूमिका भी बढ़ सकती है यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह अस्थायी शांति स्थायी समाधान का रास्ता खोल पाएगी या फिर क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ेगा।
तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिन से जारी जंग के बाद आखिरकार 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। साथ ही, उन्होंने कहा कि इसके लिए चीन ने ईरान को मनाया। ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी सीजफायर से पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो वह उसकी पूरी सभ्यता खत्म कर देंगे। उन्होंने अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की भी धमकी दी थी। पाकिस्तान और चीन ने की मध्यस्थता न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई। पाकिस्तान ने 2 हफ्ते के सीजफायर का प्रस्ताव रखा था, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया। ये हुए समझौते समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल अपने हमले रोकेंगे। ईरान भी हमले बंद करेगा। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना की मदद से सुनिश्चित की जाएगी। यह सीजफायर लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होगा। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच 10 अप्रैल को औपचारिक बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान का दावा-अमेरिका ने उसकी 10 शर्तें मानी ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को 10 पाइंट का प्लान भेजा है। उन्होंने कहा कि इस पर आगे बातचीत की जा सकती है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसका 10 पॉइंट प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। काउंसिल के मुताबिक यह समझौता ईरान की शर्तों पर हुआ है और इसे देश की जीत बताया है। ईरान की 10 शर्ते 1. हमले पूरी तरह बंद हों ईरान ने अमेरिका और इजराइल से सभी सैन्य हमले खत्म करने की मांग रखी। 2. सभी सैंक्शन हटाए जाएं ईरान ने सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने की शर्त रखी गई। 3. फ्रीज किए गए एसेट्स वापस मिलें ईरान ने अपने सभी फ्रीज फंड और संपत्तियां वापस देने की मांग की। 4. जंग का स्थायी अंत सिर्फ सीजफायर नहीं, बल्कि युद्ध पूरी तरह खत्म करने की शर्त रखी गई। 5. अमेरिकी सेना की वापसी ईरान ने मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से सेना हटाने की मांग की। 6. नुकसान की भरपाई जंग में हुए नुकसान के लिए आर्थिक मुआवजा या पुनर्निर्माण की व्यवस्था मांगी गई। 7. हॉर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की शर्त रखी। 8. सुरक्षित आवाजाही, लेकिन शर्तों के साथ जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, लेकिन यह ईरानी सेना के समन्वय में होगी। 9. प्रति जहाज फीस का प्रस्ताव ईरान ने प्रस्ताव रखा कि हर जहाज से करीब 20 लाख डॉलर फीस ली जाएगी, जिसे ओमान के साथ साझा किया जाएगा। 10. क्षेत्रीय संघर्ष भी खत्म हों लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले समेत क्षेत्रीय तनाव खत्म करने की मांग भी शामिल है।