निष्पक्ष चुनाव पर उठे सवाल
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन पर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
यह जनहित याचिका आदित्य दास नामक याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग से अपील की गई है कि अजय पाल शर्मा को उनके पद से हटाया जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी भूमिका के अनुरूप निष्पक्षता नहीं बरती और मतदाताओं पर प्रभाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने जैसा व्यवहार किया।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें अजय पाल शर्मा को फाल्टा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए देखा गया।
वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और उनके आचरण पर सवाल उठने लगे।
निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठी मांग
याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसे अधिकारियों को हटाया जाए, जिन पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।
हालांकि, इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।
कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें कड़े और सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है और उनकी छवि अक्सर ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘यूपी के सिंघम’ के रूप में देखी जाती है।
वर्तमान में उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है।
इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं टीएमसी की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। मैग्नीशियम शरीर के लिए एक बेहद जरूरी मिनरल है, जो न सिर्फ हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है बल्कि दिमाग और नींद की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालता है। इसकी कमी धीरे-धीरे कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का कारण बन सकती है, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। सिरदर्द और माइग्रेन का बढ़ना मैग्नीशियम की कमी से दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है, जिससे सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। यह मस्तिष्क में ब्लड फ्लो और न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को प्रभावित करता है। नींद न आना और बेचैनी यह मिनरल नींद को नियंत्रित करने वाले हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर को संतुलित रखता है। इसकी कमी से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। मांसपेशियों में ऐंठन और थकान मैग्नीशियम कैल्शियम के संतुलन को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी और लगातार थकान महसूस हो सकती है। चिंता और मानसिक तनाव मैग्नीशियम मस्तिष्क में सेरोटोनिन और GABA जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से तनाव, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। मैग्नीशियम की कमी कैसे पूरी करें पालक, दालें, कद्दू के बीज, बादाम, चिया सीड्स, साबुत अनाज, केले, एवोकाडो और डार्क चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थ मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।
1563 – यहूदियों को चार्ल्स VI के आदेश पर फ्रांस से निकाला गया। 1598 – अमेरिका में पहली बार थियेटर का आयोजन हुआ। 1789 – जॉर्ज वॉशिंगटन प्रथम सर्वसम्मति से अमेरिका के पहले राष्ट्रपति चुने गए। 1863 – ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकार वाली भारतीय नौसेना को ब्रिटिश नौसेना में भेजा गया। 1864 – न्यूयॉर्क अमेरिका का ऐसा राज्य बना जहां शिकार के लिए लाइसेंस फीस लागू किया गया। 1904 – पहली बार आइसक्रीम कोन का डेब्यू हुआ। 1908 – खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुजफ्फरपुर में किंग्सफोर्ड के मजिस्ट्रेट की हत्या करने के लिए बम फेंका। 1945 - जर्मन तानाशाह हिटलर एवं उसकी पत्नी इवा ब्राउन द्वारा आत्महत्या। 1956 – अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति और सीनेटर एल्बेन बार्कली की वर्जीनिया में एक भाषण के दौरान मौत हुई। 1973 – अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने वॉटरगेट कांड की जिम्मेदारी ली थी। 1975 – वियतनाम युद्ध का अंत हुआ। 1985 – अमेरिकी पर्वतारोही रिचर्ड डिक बॉस (55 वर्ष) माउंट एवरेस्ट पर सर्वाधिक उम्र में चढ़ने वाले व्यक्ति बने। 1991 – अंडमान में ज्वालामुखी फटा। 1991 – बांग्लादेश में भीषण चक्रवात में सवा लाख से अधिक लोगों की मौत और 90 लाख लोग बेघर हुए। 1993 – सीईआरएन ने वल्र्ड वाइड वेब (WWW) सॉफ्टवेयर को सार्वजनिक डोमेन में रखा। 1999 - लेविंस्की-क्लिंटन मामले को दुनिया के सामने लाने वाले पत्रकार माइकल इशिकॉफ़ को अंग्रेज़ी साप्ताहिक पत्रिका न्यूज वीक का 'नेशनल मैंगनीज अवार्ड' प्रदान किया गया, हिन्द महासागर के द्वीप कोमोरोस में सेना द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा। 2000 - आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग के आहवान के साथ जी -77 शिखर सम्मेलन हवाना में सम्पन्न। 2001 - फिलीपींस में एरुत्रादा समर्थकों द्वारा तख्ता पलट का प्रयास। 2002 - पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ के अगले 5 वर्षों के कार्यकाल में वृद्धि के लिए जनमत संग्रह सम्पन्न। 2004 - फजुला (ईराक) में हिंसा में 10 अमेरिकी सैनिक मारे गये। शिक्षक समाज हरियाणा चैनल की प्रस्तुति। 2005 - नरेश के असाधारण अधिकार बरकरार रखते हुए नेपाल में इमरजेंसी समाप्त। 2006 - 2011 क्रिकेट विश्वकप की मेजबानी भारतीय उपमहाद्वीप को मिली। 2007 - नेत्रहीन पायलट माइल्स हिल्टन ने विमान से आधी दुनिया का चक्कर लगाकर रिकार्ड बनाया। 2008 - चालक रहित विमान लक्ष्य का उड़ीसा के बालासोर ज़िले के चाँदीपुर समुद्र तट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। 2010 - हिन्दी चलचित्रों के सदाबहार अभिनेता देव आनंद को शुक्रवार को मुंबई में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से तथा प्राण को "फाल्के आइकॉन" से सम्मानित किया गया। 2013 – नीदरलैंड की महारानी बीट्रिक्स ने पद छोड़ा और विलियम अलेक्जेंडर नीदरलैंड के राजा बने। 2017- नेपाल के उच्चतम न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की पर महाभियोग का प्रस्ताव। 2019 - केरल से आईएस आतंकी को गिरफ्तार किया गया। 2020 - विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस पर आज एक आपात बैठक बुलाई। 2020 - राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण धारावाहिक ने सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रम का विश्व रिकॉर्ड बनाया। 2021 - इजराइल में यहूदियों के धार्मिक पूजा सभा के दौरान मची भगदड़ में 44 लोगों की मौत व सैकड़ों घायल हुए। 2021 - किर्गिस्तान - ताजिकिस्तान सीमा पर पानी को लेकर हुई झड़प में 31 की मौत हुई। 2022 - जनरल मनोज पांडे ने जनरल मनोज मुकुंद नरवणे से 29 वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला। 2022 - बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्णिया जिले में मोटे अनाज से संचालित देश के पहले एथेनॉल संयंत्र का उद्घाटन किया गया। 2023 - लुधियाना की रिहायशी इमारत में गैस रिसाव से 2 बच्चे व 5 महिलाओं सहित 11 की मौत हुई , रिसाव के बाद 12 लोग बेहोश हुए। 2023 - जम्मू-कश्मीर में सुबह 5:15 बजे 4.1 की तीव्रता का भूकंप आया। 2023 - युद्धग्रस्त सूडान से 229 और भारतीय स्वदेश पहुंचे। 2024 - छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 7 नक्सली ढेर, 2 महिलाएं शामिल। 30 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति 1870 - दादा साहब फाल्के - भारत के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक एवं पटकथा लेखक। 1896 – आध्यात्मिक गुरू मां आनंदमयी का जन्म हुआ। 1909 - तुकडोजी महाराज भारत के महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध सन्त थे। 1909 - आर. शंकर - वक्ता, शिक्षाविद्, लेखक और संपादक थे जो संविधान सभा के सदस्य भी चुने गए थे तथा केरल के भूतपूर्व मुख्यमंत्री रहे। 1927 - फातिमा बीबी - सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश। 1949 - एंटोनियो गुटेरेस - संयुक्त राष्ट्र संघ के नौवें महासचिव। 1966 - डाॅ. बीसेट्टी वेंकट सत्यवती -आंध्र प्रदेश की महिला राजनीतिज्ञा। 1967 - मीनाक्षी लेखी एक भारतीय राजनीतिज्ञा और वकील। 30 अप्रैल को हुए निधन 1030 – गजनी के सुलतान महमूद का निधन हुआ। 1837 - हरि सिंह नलवा - महाराजा रणजीत सिंह के सेनाध्यक्ष। 2011 - दोरजी खांडू - अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री। 2020 - जाने-माने फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर का मुंबई में निधन। 2020 - भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान चुन्नी गोस्वामी का निधन। 2020 - दिल्ली के प्रतिष्ठित इतिहासकार और इतिवृत्त लेखक रोनाल्ड विवियन स्मिथ का 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 2021 - रोहित सरदाना - एक भारतीय समाचार एंकर जो 2018 के गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार के प्राप्तकर्ता थे। 2021 - सोली जहांगीर सोराबजी - एक भारतीय न्यायविद , जिन्होंने भारत के लिए अटॉर्नी-जनरल के रूप में कार्य किया। 2022 - बांग्लादेश के पूर्व वित्त मंत्री अबुल माल अब्दुल मुहिथ (88) का ढाका में निधन हुआ। 2022 - इटालियन फुटबॉल एजेंट मिनो रायोला (54) का निधन हुआ। 2023 - स्कॉटिश शेफ, टेलीविजन प्रस्तोता और रेस्तरां मालिक जॉक ज़ोनफ्रिलो (46) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी एथलीट राल्फ बोस्टन (83) का स्ट्रोक के बाद निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी गिटार वादक डुआन एडी (86) का निधन हुआ। 30 अप्रैल के णमहत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री मातंगी जयन्ती (बैशाख शुक्ल तृतीया)। महात्मा बसवेश्वर जयंती। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज जयंती। श्री धुन्दीराज गोविंद फाल्के (दादा साहब फाल्के) जयन्ती। श्री आर. शंकर जयन्ती। सरदार हरि सिंह नलवा स्मृति दिवस। श्री दोरजी खांडू स्मृति दिवस। आयुष्मान भारत दिवस। अन्तर्राष्ट्रीय जैज दिवस (International Jazz Day)। राष्ट्रीय ईमानदारी दिवस (National Honesty Day , United States)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आधार कार्ड के डिजाइन में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) आधार कार्ड को और अधिक सुरक्षित और डिजिटल-फर्स्ट बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा बढ़ाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। वर्तमान में आधार कार्ड पर व्यक्ति का नाम, पता और 12 अंकों का आधार नंबर स्पष्ट रूप से छपा होता है। लेकिन नया डिजाइन लागू होने के बाद यह जानकारी सीधे कार्ड पर दिखाई नहीं देगी, जिससे डेटा लीक और दुरुपयोग की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी। नए आधार कार्ड में क्या होगा खास प्रस्तावित नए आधार कार्ड में केवल दो चीजें प्रमुख रूप से दिखाई देंगी—यूजर की फोटो और एक सुरक्षित QR कोड। इस QR कोड में व्यक्ति की सभी जरूरी जानकारियां जैसे नाम, पता, जन्मतिथि और आधार नंबर एन्क्रिप्टेड (कोडेड) रूप में सुरक्षित रहेंगी।इस QR कोड को केवल UIDAI द्वारा अधिकृत स्कैनर या आधिकारिक आधार ऐप के जरिए ही पढ़ा जा सकेगा। यानी अब किसी भी व्यक्ति की जानकारी सामान्य तरीके से कार्ड देखकर एक्सेस नहीं की जा सकेगी। क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव सरकार के अनुसार आधार डेटा के दुरुपयोग और अनधिकृत कॉपी बनाए जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। कई संस्थान आधार की फोटोकॉपी को बिना अनुमति के स्टोर कर लेते हैं, जिससे प्राइवेसी को खतरा बढ़ जाता है।नया सिस्टम इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर सकता है, क्योंकि फिजिकल कार्ड पर संवेदनशील जानकारी दिखाई ही नहीं देगी। इससे धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और डेटा लीक जैसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा UIDAI पहले ही आधार के डिजिटल उपयोग को बढ़ाने के लिए नया ऐप लॉन्च कर चुका है, जिससे लोग अपनी पहचान सुरक्षित तरीके से शेयर कर सकते हैं। अब इस बदलाव के साथ फिजिकल कार्ड की बजाय डिजिटल वेरिफिकेशन को प्राथमिकता दी जाएगी।सरकार की योजना “आधार विजन 2032” के तहत एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई गई है, जो भविष्य की सुरक्षा जरूरतों और डेटा प्रोटेक्शन पर काम कर रही है। यूजर्स को क्या करना होगा फिलहाल आधार कार्ड का पुराना सिस्टम जारी रहेगा। जब नया डिजाइन लागू होगा, तब यूजर्स UIDAI की वेबसाइट या ऐप के जरिए नया आधार कार्ड (संभवतः PVC कार्ड फॉर्मेट में) प्राप्त कर सकेंगे।