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Trump Rejects Iran’s Peace Conditions

ईरान की शर्तों पर भड़के ट्रंप, मुआवजा और होर्मुज कंट्रोल बना बड़ा विवाद

surbhi मई 11, 2026 0
Donald Trump reacts strongly to Iran peace proposal over Hormuz Strait and compensation demands
Trump Rejects Iran Peace Proposal

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की ओर से भेजे गए नए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह “अनएक्सेप्टेबल” यानी अस्वीकार्य करार दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ करीब 10 हफ्तों से जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी थीं, जिनमें युद्ध के नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देना शामिल है।

पाकिस्तान के जरिए भेजा गया प्रस्ताव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया। प्रस्ताव में कहा गया कि अगर अमेरिका युद्ध रोकना चाहता है तो उसे पहले तत्काल संघर्षविराम लागू करना होगा और भविष्य में किसी भी नए हमले की गारंटी देनी होगी।

ईरान ने यह भी मांग की कि युद्ध के दौरान हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई की जाए। इसके साथ ही उसने Strait of Hormuz पर अपनी संप्रभुता को औपचारिक रूप से स्वीकार करने की बात कही।

तेल प्रतिबंध हटाने की मांग

ईरान ने प्रस्ताव में अमेरिकी वित्त विभाग के Office of Foreign Assets Control यानी OFAC द्वारा लगाए गए तेल निर्यात प्रतिबंधों में अस्थायी राहत की मांग भी रखी।

तेहरान चाहता है कि कम से कम 30 दिनों के लिए उसके तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं और समुद्री घेराबंदी समाप्त की जाए, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा

दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका उसकी कुछ शर्तें मान लेता है, तो इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का प्रबंधन उसके नियंत्रण में रहेगा।

हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह कौन-सी शर्तें हैं जिनके बदले वह क्षेत्रीय तनाव कम करने को तैयार होगा।

परमाणु कार्यक्रम पर भी तनातनी

The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि वह सीमित समय के लिए यूरेनियम संवर्धन रोकने को तैयार हो सकता है, लेकिन अमेरिका के 20 साल वाले प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।

तेहरान ने अपने परमाणु ठिकानों को खत्म करने की मांग को भी साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इससे साफ है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी गहरा मतभेद बना हुआ है।

ट्रंप ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान की शर्तें अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। उनका मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को ज्यादा नियंत्रण देना और मुआवजे की मांग मानना अमेरिकी रणनीतिक हितों के खिलाफ होगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित Tribhuvan International Airport पर सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब Turkish Airlines के एक विमान के लैंडिंग के दौरान टायर में आग लग गई। हादसे के समय विमान में 277 यात्री और 11 क्रू मेंबर सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लैंडिंग के दौरान लगी आग अधिकारियों के अनुसार, Turkish Airlines की फ्लाइट TK726 इस्तांबुल से काठमांडू पहुंची थी। सुबह करीब 6:45 बजे विमान जैसे ही रनवे पर उतरा, उसके दाएं लैंडिंग गियर से धुआं और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति गंभीर होते देख एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी किया और फायर ब्रिगेड तथा रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई। इमरजेंसी दरवाजों से निकाले गए यात्री नेपाल सिविल एविएशन अथॉरिटी के सूचना अधिकारी Gyanendra Bhul ने बताया कि आग लगने के तुरंत बाद विमान के इमरजेंसी एग्जिट खोले गए और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। निकासी के दौरान कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं, लेकिन किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है। विमान में कुछ United Nations अधिकारी भी सवार बताए गए हैं। कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ एयरपोर्ट संचालन घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। सुरक्षा जांच और रनवे क्लियर होने के बाद एयरपोर्ट सेवाओं को सामान्य किया गया। 2015 में भी हुआ था बड़ा हादसा यह पहला मौका नहीं है जब Turkish Airlines का विमान काठमांडू एयरपोर्ट पर हादसे का शिकार हुआ हो। साल 2015 में घने कोहरे के बीच एयरलाइन का एक विमान रनवे से फिसल गया था। उस घटना के बाद एयरपोर्ट कई दिनों तक बंद रहा था, हालांकि तब भी कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था।  

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वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को अमेरिका द्वारा खारिज किए जाने के बाद तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सरकारी मीडिया ने अमेरिकी योजना को “ट्रंप के लालच के आगे ईरान के आत्मसमर्पण” जैसा बताया।   ईरान ने अमेरिका पर लगाया दबाव की राजनीति का आरोप ईरान के सरकारी मीडिया संस्थान Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) ने कहा कि अमेरिका का प्रस्ताव पूरी तरह एकतरफा था और इसका उद्देश्य ईरान की संप्रभुता को कमजोर करना था। तेहरान ने साफ कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपने “मौलिक अधिकारों” से समझौता नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि “यहां कोई भी ट्रंप को खुश करने के लिए प्रस्ताव तैयार नहीं करता।   ईरान की प्रमुख मांगें रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने जवाब में कई शर्तें रखीं। इनमें युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई, अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना, ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना और तेल निर्यात की अनुमति शामिल है। इसके अलावा, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करने, लेबनान में युद्धविराम और युद्ध के बाद 30 दिनों की वार्ता का प्रस्ताव भी दिया।   ट्रंप ने बताया “पूरी तरह अस्वीकार्य” राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जवाब को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि ईरान का रुख अमेरिका के लिए “पूरी तरह अस्वीकार्य” है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और दुनिया को केवल “देरी की रणनीति” से गुमराह करता रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब ईरान “और ज्यादा नहीं हंस पाएगा।”

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ईरान का बड़ा आर्थिक वार, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा टोल

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने के लिए एक नया प्राधिकरण बनाने का दावा किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम सिर्फ समुद्री नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा आर्थिक और भू-राजनीतिक संदेश छिपा है. सबसे बड़ा झटका अमेरिका को इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ईरान कथित तौर पर यह टोल अमेरिकी डॉलर की जगह चीन की मुद्रा युआन में लेना चाहता है. क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने “फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण” नाम की एजेंसी बनाई है. यह एजेंसी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ट्रांजिट अनुमति देगी और उनसे शुल्क वसूलेगी. जहाजों को पहले से अपना रूट, बीमा, चालक दल और स्वामित्व की जानकारी देनी होगी. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इसलिए यहां किसी भी तरह का शुल्क या नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. अमेरिका को क्यों लग सकता है झटका? सबसे बड़ा कारण “पेट्रोडॉलर” व्यवस्था है. दशकों से वैश्विक तेल व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता आया है. इससे डॉलर दुनिया की सबसे मजबूत रिजर्व मुद्रा बना रहा. लेकिन अगर ईरान युआन में टोल लेना शुरू करता है, तो: तेल व्यापार में डॉलर की पकड़ कमजोर हो सकती है चीन की मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय बढ़त मिल सकती है अमेरिका के आर्थिक प्रभाव को चुनौती मिल सकती है प्रतिबंधों के बावजूद ईरान को नया वित्तीय रास्ता मिल सकता है ईरान पहले से अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है. ऐसे में डॉलर से हटकर युआन और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेने की रणनीति उसे प्रतिबंधों के असर से कुछ राहत दे सकती है. चीन को क्या फायदा? चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है और ईरान के साथ उसके संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. यदि व्यापार युआन में होता है, तो: चीन की मुद्रा का वैश्विक उपयोग बढ़ेगा एशिया-केंद्रित ऊर्जा व्यापार मॉडल मजबूत होगा चीन को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम पर कम निर्भर रहना पड़ेगा किन देशों पर असर पड़ सकता है? जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देश खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं. यदि टोल बढ़ता है या भुगतान व्यवस्था बदलती है, तो: तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं शिपिंग लागत महंगी हो सकती है आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है क्या सच में खत्म हो जाएगा डॉलर का दबदबा? विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी तुरंत ऐसा होना मुश्किल है, क्योंकि वैश्विक व्यापार और बैंकिंग सिस्टम अब भी बड़े पैमाने पर डॉलर पर आधारित है. लेकिन: BRICS देशों में डी-डॉलराइजेशन की चर्चा बढ़ रही है कई देश सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं चीन और कुछ अन्य देश वैकल्पिक भुगतान सिस्टम विकसित कर रहे हैं ऐसे में ईरान का यह कदम वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत माना जा रहा है.  

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