ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच युद्ध टालने को लेकर बातचीत तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी अटकलें जारी हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने इस संकट को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “निर्णायक मोड़” पर पहुंच चुकी है और अगले कुछ दिन बेहद अहम होंगे।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि तेहरान की ओर से बातचीत के सभी रास्ते अब भी खुले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान ने हमेशा अपने वादों का सम्मान किया है और युद्ध टालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दबाव बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके मुताबिक, समस्या का समाधान केवल सम्मानजनक बातचीत से ही निकल सकता है।
पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत और प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति नहीं बन पाई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अपने प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी शर्तें रखीं, जिन्हें तेहरान ने खारिज कर दिया। इसके बाद ईरान ने पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को 14 बिंदुओं वाला नया प्रस्ताव भेजा। वॉशिंगटन इस प्रस्ताव से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव और अनिश्चितता अभी बनी हुई है।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया है। उनके अनुसार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने बातचीत को मौका देने की अपील की थी।
उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को उम्मीद है कि जल्द कोई समझौता हो सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि किसी भी समझौते की स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका “एक और बड़ा हमला” करने के लिए तैयार है।
ट्रंप के मुताबिक, सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला अगले कुछ दिनों में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार या अगले सप्ताह की शुरुआत तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है। वहीं कई अरब देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर हालात को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अमेरिका के टेक सेक्टर में जारी बड़े पैमाने की छंटनी ने हजारों भारतीय पेशेवरों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। Meta, Amazon और LinkedIn जैसी कंपनियों में लगातार हो रही layoffs का सबसे ज्यादा असर H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स पर पड़ रहा है। नौकरी जाने के बाद इन पेशेवरों के पास अमेरिका में बने रहने के लिए बेहद सीमित समय बचता है। अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, H-1B वीजा धारकों को नई नौकरी ढूंढने के लिए सिर्फ 60 दिनों का समय मिलता है। ऐसा न होने पर उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है। H-1B वीजा धारकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स H-1B वीजा पर काम करते हैं। यह वीजा सीधे कंपनी से जुड़ा होता है। यानी नौकरी खत्म होते ही कर्मचारी का इमिग्रेशन स्टेटस भी प्रभावित होने लगता है। ऐसे में सिर्फ नई नौकरी ढूंढना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि परिवार, बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस और भविष्य की पूरी योजना पर असर पड़ता है। क्या है 60 दिनों का नियम? US Citizenship and Immigration Services (USCIS) के नियमों के अनुसार, नौकरी छूटने के बाद H-1B कर्मचारी को 60 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलता है। यह अवधि कर्मचारी के आखिरी कार्य दिवस से शुरू होती है, न कि अंतिम वेतन मिलने की तारीख से। इस दौरान कर्मचारी: नई कंपनी में नौकरी ढूंढ सकता है H-1B ट्रांसफर करा सकता है किसी अन्य वीजा कैटेगरी के लिए आवेदन कर सकता है या फिर अमेरिका छोड़ने की तैयारी कर सकता है मौजूदा आर्थिक माहौल और धीमी hiring के कारण यह समय बहुत कम साबित हो रहा है। B-2 वीजा विकल्प पर भी बढ़ी सख्ती कई कर्मचारी समय बढ़ाने के लिए अस्थायी रूप से B-2 टूरिस्ट वीजा में स्विच करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी अब ऐसे आवेदनों की ज्यादा सख्ती से जांच कर रहे हैं और अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। सिलिकॉन वैली में तेज हुई छंटनी Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक टेक इंडस्ट्री में 1.1 लाख से ज्यादा कर्मचारी नौकरी गंवा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीयों की है। वित्तीय वर्ष 2025 के अमेरिकी आंकड़े बताते हैं कि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। कंपनियां दे रहीं पैकेज, लेकिन चिंता बरकरार कुछ बड़ी कंपनियां कर्मचारियों को severance package भी दे रही हैं। उदाहरण के तौर पर Meta प्रभावित कर्मचारियों को: 16 सप्ताह का मूल वेतन हर साल की सेवा पर अतिरिक्त दो सप्ताह का वेतन और 18 महीने तक हेल्थकेयर कवरेज दे रही है। लेकिन इसके बावजूद वीजा को लेकर अनिश्चितता और मानसिक दबाव बना हुआ है। बदल रहा है “अमेरिकन ड्रीम” कभी भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका करियर ग्रोथ और स्थिर भविष्य का प्रतीक माना जाता था। लेकिन लगातार छंटनी, सख्त इमिग्रेशन नियम और AI आधारित बदलावों ने अब इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है। हालिया सर्वे के अनुसार, अमेरिका में रह रहे लगभग आधे भारतीय पेशेवर नौकरी जाने की स्थिति में भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग कनाडा और यूरोप जैसे विकल्पों की ओर भी देख रहे हैं। AI से बदल रहा टेक सेक्टर विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अस्थायी मंदी नहीं है, बल्कि टेक इंडस्ट्री के ढांचे में बड़ा बदलाव है। कंपनियां अब पारंपरिक कोडिंग और सपोर्ट रोल्स कम करके AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा निवेश कर रही हैं। Meta अकेले इस साल AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर 100 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर सकती है। इससे कर्मचारियों के बीच यह डर बढ़ रहा है कि आने वाले समय में सामान्य सॉफ्टवेयर और रूटीन इंजीनियरिंग नौकरियां लगातार कम हो सकती हैं।
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर रणनीति पर मतभेद सामने आने की खबर है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत काफी तनावपूर्ण रही और ईरान पर आगे की कार्रवाई को लेकर दोनों की राय अलग-अलग नजर आई। रिपोर्ट के अनुसार, जहां इजराइल ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य अभियान शुरू करने के पक्ष में है, वहीं अमेरिका फिलहाल बातचीत और संभावित समझौते के रास्ते पर जोर देता दिखाई दे रहा है। ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट में बड़ा दावा अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू “बेहद नाराज” थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइली नेतृत्व ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करने तथा उसके अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर दबाव बढ़ाने के पक्ष में है। बताया गया कि नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा हालात में सैन्य दबाव कम करना इजराइल की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। ट्रंप ने टाली हमले की योजना ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान पर प्रस्तावित हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अरब देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि वह अब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना देख रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि बातचीत असफल रहती है तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने के लिए तैयार रहेगा। नया शांति प्रस्ताव तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और कतर सहित कुछ क्षेत्रीय मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से नया शांति प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव का मकसद दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करना और संभावित सैन्य टकराव को टालना है। हालांकि नेतन्याहू इस प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं। “समझौते और युद्ध के बीच खड़ी है दुनिया” ट्रंप ने बुधवार को कनेक्टिकट स्थित कोस्ट गार्ड अकादमी में संबोधन के दौरान कहा कि अमेरिका और ईरान फिलहाल “समझौते और युद्ध के बीच की सीमा” पर खड़े हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “स्थिति बेहद निर्णायक मोड़ पर है। अगर हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिले तो हालात तेजी से बदल सकते हैं। हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं।” क्षेत्रीय तनाव पर बढ़ी वैश्विक नजर ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है। वहीं अरब देशों की कोशिश है कि बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखा जाए।
Narendra Modi और Giorgia Meloni के बीच बढ़ती दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो गई। मेलोनी ने इस खास गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह मुस्कुराते हुए कहती नजर आईं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें “बहुत बढ़िया टॉफी” गिफ्ट की है। इटली दौरे पर पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंचे हैं। यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही है। भारत और इटली इस समय “जॉइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” के तहत अपने संबंधों को नई मजबूती देने पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कोलोसियम में साथ दिखे मोदी और मेलोनी रोम पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी के साथ मशहूर Colosseum का दौरा भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि रोम पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर किया और फिर ऐतिहासिक कोलोसियम घूमने गए। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए। भारत-इटली सहयोग पर होगी अहम बातचीत बुधवार को पीएम मोदी और मेलोनी के बीच औपचारिक वार्ता होने वाली है। इसमें: व्यापार और निवेश रक्षा सहयोग क्लीन एनर्जी इनोवेशन साइंस और टेक्नोलॉजी सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। रोम में दिखी काशी की झलक पीएम मोदी ने अपने दौरे के दौरान यह भी बताया कि इटालियन कलाकार Giampaolo Tomassetti ने उन्हें वाराणसी की एक खूबसूरत पेंटिंग भेंट की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति टोमासेटी का लगाव चार दशक से भी ज्यादा पुराना है। उन्होंने वैदिक संस्कृति और Mahabharata से जुड़ी कई कलाकृतियों पर काम किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘मेलोडी डिप्लोमेसी’ पीएम मोदी द्वारा मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने को सोशल media पर लोग “मेलोडी डिप्लोमेसी” कहकर भी चर्चा कर रहे हैं। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुर्खियां बटोर चुकी है।