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Zanjan Blast Kills 14 IRGC Troops

सीजफायर के बाद भी ईरान में बड़ा हादसा: जंजान में भीषण विस्फोट, IRGC के 14 जवानों की मौत

surbhi मई 2, 2026 0
Iranian Revolutionary Guard personnel at a blast site in Zanjan after a deadly explosion during bomb disposal operations
Zanjan Explosion IRGC Soldiers Killed Iran

युद्धविराम के बावजूद ईरान में खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। उत्तर-पश्चिमी जंजान में शुक्रवार को हुए एक भीषण विस्फोट ने यह साफ कर दिया कि युद्ध के अवशेष कितने घातक हो सकते हैं। इस हादसे में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 जवानों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

बम निष्क्रिय करने के दौरान हुआ हादसा

ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, यह विस्फोट उस समय हुआ जब IRGC की एक विशेष बम निरोधक टीम इलाके में सफाई अभियान चला रही थी।

  • यह टीम हालिया हवाई हमलों के बाद बचे हुए गोला-बारूद को खोजकर निष्क्रिय कर रही थी
  • अचानक एक अज्ञात विस्फोटक सक्रिय हो गया
  • धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई जवान मौके पर ही मारे गए

मारे गए जवान “अंसार अल-महदी” यूनिट के अनुभवी सदस्य थे, जिन्हें ऐसे जोखिम भरे अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

बिना फटे बम बने सबसे बड़ा खतरा

प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि विस्फोट का कारण क्लस्टर बम या बारूदी सुरंग हो सकता है, जो हवाई हमलों के दौरान गिराए गए थे लेकिन फटे नहीं थे।

  • ऐसे बम जमीन में छिपे रहते हैं और लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं
  • इन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन और खतरनाक होता है
  • जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है

युद्ध खत्म होने के बाद भी ये ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ (UXO) वर्षों तक खतरा बने रहते हैं।

सीजफायर के बाद सबसे बड़ी सैन्य क्षति

8 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम के बाद यह IRGC के लिए अब तक की सबसे बड़ी जनहानि बताई जा रही है।
यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि युद्ध के प्रभाव सिर्फ लड़ाई तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उसके बाद भी जानलेवा खतरे बने रहते हैं।

IRGC के मुताबिक:

  • अब तक 15,000 से ज्यादा बिना फटे गोला-बारूद की पहचान की जा चुकी है
  • इनको निष्क्रिय करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है
  • कई इलाके अभी भी ‘हाई रिस्क जोन’ बने हुए हैं

आम नागरिक और खेती भी खतरे में

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह खतरा सिर्फ सैन्य बलों तक सीमित नहीं है।

  • कई बम रिहायशी इलाकों और गांवों के पास पड़े हैं
  • कृषि भूमि में भी भारी मात्रा में विस्फोटक मौजूद हैं

फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, लगभग 1,200 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र अभी भी जोखिम में है, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है और खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

युद्ध की पृष्ठभूमि और बढ़ता वैश्विक तनाव

इस हादसे की पृष्ठभूमि हालिया संघर्ष से जुड़ी है, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने फरवरी में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे।

  • जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए
  • इस संघर्ष में 4000 से अधिक लोगों की जान गई
  • वैश्विक दबाव और बढ़ते नुकसान के बाद 8 अप्रैल को सीजफायर लागू हुआ

होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है।

  • यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है
  • जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला

सीजफायर के बाद भी इस क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।

अमेरिका-ईरान वार्ता में जारी गतिरोध

इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर असंतोष जताया है।

  • उन्होंने कहा कि प्रस्ताव “पर्याप्त नहीं” है
  • परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों में मतभेद बरकरार हैं
  • बातचीत जारी है, लेकिन ठोस समाधान अभी दूर नजर आ रहा है

ईरान ने युद्ध समाप्त करने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत के लिए बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अमेरिकी वायुसेना का B-52 बॉम्बर टेकऑफ के दौरान क्रैश, सभी 8 क्रू मेंबर्स की मौत; बोइंग के दो कर्मचारी भी शामिल

  वॉशिंगटन: अमेरिकी वायुसेना का एक B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर विमान टेकऑफ के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी आठ क्रू मेंबर्स की मौत हो गई। हादसे के बाद अमेरिकी वायुसेना और संबंधित एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतकों में विमान निर्माता कंपनी बोइंग के दो कर्मचारी भी शामिल हैं। अमेरिकी वायुसेना ने अभी तक मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। हादसे के बाद सैन्य और नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों की टीम को घटनास्थल पर भेजा गया है। बोइंग ने की कर्मचारियों की मौत की पुष्टि एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने एक बयान जारी कर पुष्टि की कि दुर्घटना में उसके दो कर्मचारियों की भी जान गई है। कंपनी ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वह जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देगी। अमेरिकी रणनीतिक शक्ति की रीढ़ है B-52 बॉम्बर B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस को अमेरिकी रणनीतिक बॉम्बर फोर्स की रीढ़ माना जाता है। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली और लंबे समय से सेवा में मौजूद सैन्य विमानों में से एक है। लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम यह बॉम्बर पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के हथियार ले जा सकता है। B-52 बॉम्बर की प्रमुख विशेषताएं लगभग 70,000 पाउंड (करीब 31,750 किलोग्राम) तक हथियार ले जाने की क्षमता। क्लस्टर बम, गाइडेड मिसाइलें और परमाणु हथियारों से लैस होने में सक्षम। बिना ईंधन भरे 8,000 मील (करीब 12,875 किलोमीटर) से अधिक दूरी तय कर सकता है। लंबी दूरी के रणनीतिक हमलों और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के लिए अमेरिकी वायुसेना का प्रमुख प्लेटफॉर्म। जांच जारी अमेरिकी वायुसेना ने कहा है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी और परिचालन दोनों पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक दुर्घटना के कारणों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी। इस हादसे ने अमेरिकी सैन्य विमानन सुरक्षा और दुनिया के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले रणनीतिक बॉम्बरों में से एक B-52 की परिचालन सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi receives Slovakia’s highest state honour, the Order of the White Double Cross, from President Peter Pellegrini in Bratislava.

PM Modi Slovakia Honour: पीएम मोदी को मिला स्लोवाकिया का सर्वोच्च सम्मान, किसी देश द्वारा मिला 33वां वैश्विक पुरस्कार

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Israeli leaders oppose the proposed US-Iran peace deal as Donald Trump announces a breakthrough agreement in the Middle East.
US-Iran Peace Deal: अमेरिका-ईरान शांति समझौते से इजरायल नाराज, बोला- हम इसका हिस्सा नहीं; ट्रंप के सामने नई कूटनीतिक चुनौती

  नई दिल्ली/तेल अवीव: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते की घोषणा के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की घोषणा के कुछ घंटों के भीतर ही इजरायल ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज ने समझौते पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए स्पष्ट कर दिया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ कोई भी समझौता इजरायल पर बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "इजरायल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है। हमारी पहली जिम्मेदारी इजरायल के नागरिकों, इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) और यहूदी समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।" 'इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं' बेन-गवीर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में सुरक्षा समझौते किए, तब उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने ओस्लो समझौते, 2006 के लेबनान युद्धविराम और गाजा संघर्ष विराम के उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे समझौतों का परिणाम अक्सर नई हिंसा के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा, "हम अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप का सम्मान करते हैं, लेकिन इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है। देश के सुरक्षा संबंधी फैसले केवल इजरायल के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।" हिज्बुल्लाह के खिलाफ सख्त रुख बेन-गवीर ने मांग की कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को पूरी तरह समाप्त किया जाए और जिन क्षेत्रों को इजरायली सेना ने आतंकवादी गतिविधियों से मुक्त कराया है, वहां से सेना को पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लेबनान से इजरायल की ओर कोई ड्रोन या मिसाइल दागी जाती है तो उसका जवाब दाहिया समेत अन्य ठिकानों पर कड़ी सैन्य कार्रवाई के रूप में दिया जाएगा। विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज ने भी उठाए सवाल इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री और विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज ने भी समझौते पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता जो लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता को सीमित करता हो। गैंट्ज ने कहा, "ईरान के साथ उभरता यह समझौता एक रणनीतिक विफलता साबित हो सकता है। इसके कारण आने वाले वर्षों में इजरायल को कूटनीतिक, सैन्य और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।" ट्रंप ने किया था समझौते का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की घोषणा करते हुए कहा था, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है। सभी को बधाई।" ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए तत्काल प्रभाव से खोला जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। 19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करने, क्षेत्रीय तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर आगे की बातचीत का ढांचा तय किया जाएगा। क्या ट्रंप के लिए बढ़ेगी मुश्किल? विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन इजरायल की खुली नाराजगी ने नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यदि इजरायल समझौते के कुछ प्रावधानों को मानने से इनकार करता है, तो क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना आसान नहीं होगा और अमेरिकी प्रशासन को अपने दो प्रमुख सहयोगियों के बीच संतुलन बनाने की कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and French President Emmanuel Macron meet in Nice after signing agreements on AI, trade, defence and space cooperation.

मोदी-मैक्रों मुलाकात: AI, UPI, रक्षा और अंतरिक्ष समेत 13 बड़े क्षेत्रों में भारत-फ्रांस की ऐतिहासिक डील, रणनीतिक साझेदारी को मिली नई उड़ान

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अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Deepshikha जून 10, 2026 0

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