चेस्टर-ले-स्ट्रीट, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला लगातार बारिश के कारण रद्द हो गया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 189/7 का मजबूत स्कोर बनाया, लेकिन बारिश के चलते इंग्लैंड अपनी पारी का एक भी गेंद नहीं खेल सका। मुकाबला बिना परिणाम (No Result) समाप्त हुआ और सीरीज 0-0 से बराबरी पर है।
भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने 47 गेंदों में 68 रन, जबकि अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 24 गेंदों में 59 रन की विस्फोटक पारी खेली। अंत में शिवम दुबे ने 21 गेंदों पर नाबाद 42 रन की तेज तर्रार पारी खेलकर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। इंग्लैंड के तरफ से साकिब महमूद ने 3 विकेट लिए।
बारिश के कारण दोनों टीमों को एक-एक अंक मिला। अब सीरीज का दूसरा टी20 शनिवार को मैनचेस्टर में खेला जाएगा, जहां दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज में बढ़त बनाने की कोशिश करेंगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 सिर्फ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीमों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि यह प्रवास, पहचान, नागरिकता और पारिवारिक विरासत की भी एक अनोखी कहानी बनकर सामने आया है। इस बार के टूर्नामेंट में बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनका जन्म उस देश में नहीं हुआ है जिसकी राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनकर वे मैदान में उतर रहे हैं। टूर्नामेंट में शामिल कुल 1,248 खिलाड़ियों में से लगभग 290 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो अपनी जन्मभूमि की बजाय अपने माता-पिता, दादा-दादी या पूर्वजों के देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यानी विश्व कप का लगभग हर चौथा खिलाड़ी प्रवासी पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। यह आंकड़ा वैश्विक प्रवास और दोहरी पहचान के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। फ्रांस और नीदरलैंड बने दुनिया के सबसे बड़े 'फुटबॉल एक्सपोर्टर' फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सबसे अधिक खिलाड़ियों को दूसरे देशों की राष्ट्रीय टीमों तक पहुंचाने वाले देशों में फ्रांस और नीदरलैंड सबसे आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार: फ्रांस में जन्मे 75 खिलाड़ी इस विश्व कप में अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। नीदरलैंड में जन्मे 42 खिलाड़ी अलग-अलग राष्ट्रीय टीमों की ओर से खेल रहे हैं। इसके बाद जर्मनी के 23, इंग्लैंड के 21, बेल्जियम के 11, स्पेन के 11 और स्वीडन के 10 खिलाड़ी अन्य देशों की जर्सी पहनकर मैदान में उतर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों की मजबूत फुटबॉल अकादमियां, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और युवा खिलाड़ियों के विकास पर विशेष ध्यान देने की वजह से यहां बड़ी संख्या में प्रतिभाएं तैयार होती हैं। हालांकि राष्ट्रीय टीम में सीमित स्थान होने के कारण कई खिलाड़ी अपने पारिवारिक मूल वाले देशों के लिए खेलने का विकल्प चुनते हैं। क्यूरासाओ और डीआर कांगो की टीमों में प्रवासी खिलाड़ियों का दबदबा इस विश्व कप में क्यूरासाओ और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) प्रवासी खिलाड़ियों के सबसे बड़े उदाहरण बनकर सामने आए हैं। क्यूरासाओ की पूरी टीम ऐसे खिलाड़ियों से बनी है जिनका जन्म नीदरलैंड में हुआ। डीआर कांगो के 20 खिलाड़ी फ्रांस, बेल्जियम, इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में जन्मे हैं। इसके अलावा: मोरक्को के 19 खिलाड़ी हैती के 16 खिलाड़ी अल्जीरिया के 15 खिलाड़ी केप वर्दे के 13 खिलाड़ी भी प्रवासी परिवारों से जुड़े हुए हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने पूर्वजों के देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए इन टीमों को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में नई पहचान दिलाई है। भारतीय मूल के चार खिलाड़ी भी विश्व कप में हालांकि भारतीय फुटबॉल टीम इस बार फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी, लेकिन भारतीय मूल के चार खिलाड़ी अलग-अलग देशों की ओर से टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें शामिल हैं: न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्लै डीआर कांगो के सैमुअल मूटूसामी कतर के तहसीन मोहम्मद जमशीद इन खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की वैश्विक फुटबॉल में बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है। आखिर क्यों बढ़ रही है यह प्रवृत्ति? फीफा के नियम खिलाड़ियों को यह अधिकार देते हैं कि यदि उनके माता-पिता, दादा-दादी या पारिवारिक जड़ें किसी अन्य देश से जुड़ी हैं, तो वे निर्धारित पात्रता पूरी करने पर उस देश की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इतिहास भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फ्रांस और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों का कभी अफ्रीका, कैरेबियन और एशिया के कई क्षेत्रों पर औपनिवेशिक शासन रहा था। बेहतर शिक्षा, रोजगार और जीवन की तलाश में इन देशों के लाखों लोग 20वीं सदी के दौरान यूरोप जाकर बस गए। उनकी अगली पीढ़ी वहीं पैदा हुई, वहीं फुटबॉल सीखी और पेशेवर खिलाड़ी बनी। बाद में उनमें से कई खिलाड़ियों ने अपने जन्म के देश की बजाय अपने पूर्वजों के देश के लिए खेलने का फैसला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फुटबॉल में यह रुझान आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। वैश्वीकरण, दोहरी नागरिकता और अंतरराष्ट्रीय प्रवास ने राष्ट्रीय टीमों की तस्वीर को पहले से कहीं अधिक विविध और बहुसांस्कृतिक बना दिया है।
भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका विस्फोटक बल्लेबाजी प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनका मासूम अंदाज है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें फैंस का प्यार देखकर 15 वर्षीय बल्लेबाज शर्माते हुए अपना चेहरा हूडी से छिपाते नजर आ रहे हैं। मैदान पर बड़े-बड़े गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी करने वाले वैभव का यह सरल और विनम्र अंदाज क्रिकेट प्रशंसकों को खूब पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया पर फैंस इस वीडियो पर जमकर प्यार लुटा रहे हैं। फैंस की आवाज सुनकर मुस्कुराए, फिर छिपा लिया चेहरा वायरल वीडियो कथित तौर पर इंग्लैंड का बताया जा रहा है, जहां भारतीय टीम आगामी पांच मैचों की टी20 सीरीज की तैयारी कर रही है। वीडियो में वैभव भारतीय टीम की ट्रेनिंग किट पहनकर वॉर्म-अप के दौरान मैदान का चक्कर लगा रहे हैं। इसी दौरान स्टैंड में मौजूद फैंस उनका नाम जोर-जोर से पुकारने लगते हैं। जैसे ही वैभव फैंस के करीब पहुंचते हैं, वह हल्की मुस्कान के साथ शर्मा जाते हैं और अपनी हूडी से चेहरा छिपा लेते हैं। उनका यह स्वाभाविक और सादगी भरा रिएक्शन अब इंटरनेट पर वायरल हो चुका है। टीम इंडिया में डेब्यू के लिए करना होगा इंतजार हालांकि वैभव सूर्यवंशी इस समय भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर हैं, लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिलने के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है। पहले टी20 मुकाबले से पहले कप्तान श्रेयस अय्यर ने संकेत दिए कि टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ी को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि टॉप ऑर्डर में पहले से अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं, जिन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे में वैभव को अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के लिए सही अवसर का इंतजार करना होगा। कम उम्र में बना चुके हैं बड़ी पहचान वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आईपीएल 2026 में उन्होंने 16 पारियों में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की। इसके बाद श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज में उन्होंने मात्र 11 गेंदों में अर्धशतक जड़कर लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास की सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। उनके लगातार शानदार प्रदर्शन की वजह से क्रिकेट जगत में उन्हें 'वंडर किड' के नाम से भी पहचान मिलने लगी है। फैंस के बीच लगातार बढ़ रही लोकप्रियता वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी जितनी चर्चा में रहती है, उतनी ही उनकी सादगी भी लोगों को आकर्षित करती है। वायरल वीडियो में उनका शर्मीला अंदाज इस बात का संकेत देता है कि मैदान पर आत्मविश्वास से भरे नजर आने वाले इस युवा खिलाड़ी का स्वभाव निजी जीवन में बेहद विनम्र और शांत है। यही कारण है कि उनकी फैन फॉलोइंग लगातार बढ़ती जा रही है और क्रिकेट प्रेमी उनके अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
चेस्टर-ले-स्ट्रीट, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला आज 1 जुलाई को इंग्लैंड के रिवरसाइड ग्राउंड, चेस्टर-ले-स्ट्रीट में खेला जाएगा। भारतीय समयानुसार मैच रात 10:00 बजे शुरू होगा। टीम इंडिया हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में 0-2 से मिली हार को पीछे छोड़ते हुए नए जोश के साथ मैदान में उतरेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने की चुनौती होगी। दूसरी ओर हैरी ब्रूक की अगुआई वाली इंग्लैंड टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की पूरी कोशिश करेगी। वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर नजर इस मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के संभावित अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर सभी की नजर रहेगी। आयरलैंड दौरे पर टीम में शामिल होने के बावजूद उन्हें दोनों मैचों में खेलने का मौका नहीं मिला था, ऐसे में क्रिकेट प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें आज इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम एकादश में जगह मिल सकती है। पिच रिपोर्ट के अनुसार रिवरसाइड ग्राउंड की सतह बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों के लिए मददगार मानी जाती है। शुरुआती ओवरों में गेंद स्विंग कर सकती है, जबकि बाद में बल्लेबाज बड़े शॉट खेलने में सफल हो सकते हैं। मौसम भी मैच के दौरान अहम भूमिका निभा सकता है।