कोलकाता: Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह विभाग के शीर्ष अधिकारी को उनके पद से हटा दिया।
आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती की जगह दुष्यंत नरियाला को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वहीं संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग का नया प्रधान सचिव बनाया गया है। चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह फैसला निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। चुनावी माहौल के बीच प्रशासनिक स्तर पर इस तरह का फेरबदल राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।
बंगाल में इस बार चुनाव प्रचार कई बड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। इनमें सबसे प्रमुख है ‘बंगाली अस्मिता’ का सवाल। सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा पर लगातार बंगाली पहचान पर हमले का आरोप लगाती रही हैं।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेता अवैध घुसपैठ और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल की रैलियों में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है।
राज्य की लगभग 50 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाला मतुआ समुदाय भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में इस समुदाय के समर्थन से भाजपा को कई सीटों पर फायदा मिला था, जबकि तृणमूल कांग्रेस भी इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटी है।
चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद लगभग 63.66 लाख नाम हटाए जाने की खबर ने भी राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। इससे राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में हुए इन बदलावों से कई क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, जिससे राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से बनानी पड़ रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज
नई दिल्ली, एजेंसियां। सनराइजर्स हैदराबाद के बल्लेबाज अभिषेक शर्मा पर आईपीएल ने बड़ा कार्रवाई किया है। केकेआर के खिलाफ हालिया मुकाबले में अभिषेक ने 48 रनों की धमाकेदार पारी खेली, लेकिन आउट होने के बाद उन्होंने कुछ ऐसा किया, जिसे आईपीएल ने नियमों के खिलाफ माना। इस कारण उन्हें लेवल 1 का अपराध माना गया, जो मैच के दौरान गंदी भाषा का इस्तेमाल करने से जुड़ा है। मैच फीस और डिमेरिट प्वाइंट आईपीएल ने अभिषेक शर्मा पर मैच फीस का 25 फीसदी काटने का फैसला लिया है। इसके अलावा उन्हें एक डिमेरिट प्वाइंट भी दिया गया। इसका मतलब है कि अभिषेक अपनी टीम से मिलने वाली मैच फीस का एक चौथाई हिस्सा नहीं पाएंगे। आईपीएल ने इस मामले में यह नहीं बताया कि अभिषेक ने ठीक क्या कहा, लेकिन उन्होंने आर्टिकल 2.3 के तहत अपराध स्वीकार किया। पारी और साझेदारी का प्रदर्शन केकेआर के खिलाफ अभिषेक ने ओपनिंग करते हुए 21 गेंदों में 48 रन बनाए, जिसमें चार चौके और चार छक्के शामिल थे। उनके साथ ट्रेविस हेड ने भी शानदार साझेदारी निभाई, दोनों ने पहले छह ओवर में ही टीम का स्कोर 80 पार कर दिया। ट्रेविस हेड छठे ओवर में आउट हुए और अभिषेक नौवें ओवर में पवेलियन लौटे, तब टीम का स्कोर 112 था। टीम की बड़ी जीत में योगदान अभिषेक की आक्रामक पारी और साझेदारी की वजह से एसआरएच ने 20 ओवर में 226 रन बनाए। टीम ने अंततः 65 रन से जीत दर्ज की। इसके अलावा अभिषेक ने मैच में एक ओवर भी गेंदबाजी की, जिसमें उन्होंने 15 रन दिए, लेकिन कोई विकेट नहीं लिया।
तिरुवनंतपुरम, एजेंसियां। केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के पवित्र पैंकुनी अरट्टू (Painkuni Arattu) यात्रा के लिए रास्ता बनाने के मकसद से इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं कल गुरुवार शाम के बाद करीब 5 घंटे के लिए रोक दी गईं। ऐसा नहीं है कि पहली बार एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं रोकी गई हैं, यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है। विश्व प्रसिद्ध शोभायात्रा यह विश्व प्रसिद्ध शोभायात्रा मंदिर से शाम करीब 5 बजे शुरू हुई। इसमें त्रावणकोर शाही परिवार के पुरुष सदस्यों के अलावा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु, कई सजे-धजे हाथी, घुड़सवार पुलिस का एक दस्ता और एक पुलिस बैंड भी शामिल था।पूर्व त्रावणकोर शाही परिवार के वर्तमान प्रमुख, श्री मूलम तिरुनल राम वर्मा (Sree Moolam Tirunal Rama Varma), जिन्होंने पारंपरिक हरी रेशमी टोपी और पन्ने का हार पहन रखा था, साथ ही अपने हाथ में औपचारिक तलवार थाम रखी थी, ने मंदिर से लेकर एयरपोर्ट के टरमैक से होते हुए शंकुमुखम समुद्र तट तक इस धार्मिक शोभायात्रा का नेतृत्व किया। टीआईएएल ने इस बारे में क्या कहा? तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (टीआईएएल) ने इस बारे में बताया कि गुरुवार दोपहर को इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं करीब 5 घंटों के लिए रोक दी गईं, जिससे यहां स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के पवित्र ‘पैंकुनी अरट्टू’ उत्सव के लिए रास्ता दिया जा सके। ये उड़ान सेवाएं शाम करीब 4:45 बजे रोक दी गईं और शोभायात्रा के मंदिर लौटने के बाद रात 9 बजे फिर से बहाल हो गईं। साल में 2 बार रोकी जाती है हवाई सेवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पिछले कई दशकों से यहां पर हर साल 2 बार कुछ घंटे के लिए अपनी ऑपरेशनल सेवाएं रोक देता है है, और उड़ान सेवा को फिर से तय करता है, ताकि मंदिर की सदियों पुरानी, साल में दो बार होने वाली औपचारिक शोभायात्रा को रनवे से गुजरने दिया जा सके। समुद्र तट पर स्नान के लिए लाई जाती हैं मूर्तियां इस शोभायात्रा के दौरान उनके साथ पुलिसकर्मियों का एक छोटा सा दस्ता भी चल रहा था. शोभायात्रा टरमैक पर आगे बढ़ी और तुरहियों तथा ढोल की थाप के बीच समुद्र तट पर जा पहुंची. एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश करने के बाद, पद्मनाभ स्वामी, नरसिंह मूर्ति और कृष्ण स्वामी की “उत्सव विग्रह” (मूर्तियों) को कुछ समय के लिए रनवे के पास स्थित “अरट्टू मंडपम” में भी रखा गया, और फिर आगे के अनुष्ठान के लिए उन्हें पास के समुद्र तट पर ले जाया गया. शंकुमुखम समुद्र तट शंकुमुखम समुद्र तट (Shankumugham Beach) के पास समुद्र में डुबकी लगाने के बाद, मूर्तियों को पारंपरिक मशालों की रोशनी में निकाली गई एक शोभायात्रा के जरिए वापस मंदिर ले जाया गया, जिसके साथ ही इस भव्य उत्सव का समापन हो गया. तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने भी सोशल मीडिया Facebook पर इस जुलूस की कई तस्वीरों और वीडियो शेयर किए, जिसमें उसने लिखा, “जब श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का ‘आराट्टू’ जुलूस हमारे रनवे से होते हुए गुजरा, तो वह अपने साथ केरल की विरासत और भक्ति का गहरा जुड़ाव भी ले गया. सदियों से चली आ रही परंपरा एयरपोर्ट पर हम इस पवित्र परंपरा को देखने को लेकर सम्मान महसूस करते हैं। यह एक खूबसूरत याद दिलाता है कि कैसे आस्था समय और स्थान की सीमाओं से परे होती है।” एयरपोर्ट के एक सूत्र ने बताया कि जब शोभायात्रा मंदिर की ओर लौट आया तो रनवे को साफ करने के बाद हवाई उड़ानों के लिए सुरक्षित घोषित कर दिया गया, फिर रात करीब 9 बजे उड़ान सेवाएं फिर से बहाल हो गईं। मंदिर के जुलूस का इस रास्ते से होकर शंकुमुखम बीच तक जाना, ताकि इन मूर्तियों को पवित्र स्नान कराया जा सके- यह परंपरा सदियों पहले शुरू हुई थी और साल 1932 में एयरपोर्ट बनने के बाद भी यह यात्रा जारी रही। इतिहासकारों के अनुसार इतिहासकारों के अनुसार, जब इस खास जगह पर एयरपोर्ट बनाया जा रहा था, तभी त्रावणकोर के तत्कालीन राजा श्री चिथिरा तिरुनल ने यह साफ कर दिया था कि यह एयरपोर्ट साल के 363 दिन आम लोगों के लिए खुली रहेगी, और 2 दिन शाही परिवार के कुलदेवता (भगवान पद्मनाभ) के लिए समर्पित रहेगी। शाही दौर से चली आ रही यह परंपरा अडानी ग्रुप द्वारा एयरपोर्ट का प्रबंधन संभालने के बाद भी निरंतर जारी है। हर साल 2 बार इस एयरपोर्ट के रनवे को बंद कर दिया जाता है. एक अक्टूबर-नवंबर में पड़ने वाले छमाही ‘अल्पासी’ उत्सव और दूसरा मार्च-अप्रैल में पड़ने वाले ‘पैंकुनी’ उत्सव के दौरान एयरपोर्ट एक NOTAM (Notice to Airmen, हवाई यात्रियों के लिए सूचना) जारी करता है.
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों का मौसम भले ही तेज धूप और उमस लेकर आता हो, लेकिन इसी मौसम की सबसे मीठी सौगात है आम। भारत को आमों का देश कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि यहां 1500 से ज्यादा किस्म के आम पाए जाते हैं। इनमें से कई किस्में सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बेहद लोकप्रिय हैं। स्वाद, खुशबू, गूदे की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ के कारण भारतीय आमों की UAE, UK, USA, यूरोप और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों में भारी मांग रहती है। 1. अल्फांसो: आमों का ‘किंग’ अल्फांसो आम को “आम का राजा” कहा जाता है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी और देवगढ़ में उगने वाला यह आम अपनी मीठी खुशबू, मुलायम गूदे और प्रीमियम क्वालिटी के लिए मशहूर है। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। 2. दशहरी दशहरी आम, जो उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद का खास आम है, अपने मीठे स्वाद और बिना रेशे वाले गूदे के लिए पसंद किया जाता है। 3. लंगड़ा: उत्तर भारत के सुपरस्टार वहीं लंगड़ा आम, जो वाराणसी से जुड़ा है, अपने हल्के हरे रंग, तेज खुशबू और अनोखे स्वाद के कारण विदेशों में अलग पहचान रखता है। 4. केसर केसर आम गुजरात के गिर क्षेत्र में उगाया जाता है। इसका केसरिया रंग, मीठापन और रसदार गूदा इसे एक्सपोर्ट का पसंदीदा विकल्प बनाता है। 5. चौसा: रंग और रस का कमाल चौसा आम उत्तर भारत में बेहद लोकप्रिय है। यह इतना रसदार और मीठा होता है कि इसे चूसकर खाने का मजा ही अलग होता है। यह खासकर मिडिल ईस्ट और यूरोप में खूब भेजा जाता है। 6. तोतापुरी तोतापुरी आम अपनी तोते की चोंच जैसी शेप और खट्टे-मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। इसका इस्तेमाल जूस, पल्प और प्रोसेस्ड फूड में खूब होता है। 7. बंगनपल्ली: फूड इंडस्ट्री के पसंदीदा बंगनपल्ली (सफेदा), आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध किस्म है, जो बड़े आकार, बिना रेशे वाले गूदे और हल्की मिठास के लिए पसंद की जाती है। 8. हिमसागर हिमसागर आम पश्चिम बंगाल का प्रीमियम आम है, जिसमें गूदा ज्यादा और बीज छोटा होता है। 9. नीलम नीलम आम दक्षिण भारत में उगाया जाता है और इसकी तेज खुशबू व लंबी शेल्फ लाइफ इसे एक्सपोर्ट के लिए बेहतरीन बनाती है। 10. आम्रपाली: स्वाद में अलग पहचान वहीं आम्रपाली, जो दशहरी और नीलम का हाइब्रिड है, आकार में छोटा लेकिन स्वाद में बेहद गाढ़ा और मीठा होता है।