आईपीएल 2026 के सीजन में एक बार फिर पॉइंट्स टेबल में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। Royal Challengers Bengaluru (RCB) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Lucknow Super Giants को 5 विकेट से हराया और सीधे टेबल के शीर्ष पर पहुंच गई। इस जीत ने टूर्नामेंट के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।
RCB ने अब तक खेले गए 5 मुकाबलों में से 4 में जीत दर्ज की है और सिर्फ 1 मैच गंवाया है। टीम के पास 8 अंक हैं और +1.503 का बेहतरीन नेट रन रेट है, जो उसे अन्य टीमों से आगे रखता है। लगातार दो जीतों ने टीम का आत्मविश्वास और मजबूत किया है।
सीजन की शुरुआत में RCB ने Sunrisers Hyderabad को 6 विकेट से हराया, इसके बाद Chennai Super Kings को 43 रन से मात दी। हालांकि तीसरे मैच में Rajasthan Royals ने 6 विकेट से हराकर RCB को झटका दिया, लेकिन टीम ने वापसी करते हुए Mumbai Indians को 18 रन से हराया और अब लखनऊ के खिलाफ जीत दर्ज कर टॉप पर कब्जा कर लिया।
Rajasthan Royals ने भी 5 मैचों में 4 जीत के साथ 8 अंक हासिल किए हैं, लेकिन नेट रन रेट कम होने के कारण वह दूसरे स्थान पर है। वहीं Kolkata Knight Riders का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है—5 मैच खेलने के बाद भी टीम जीत का खाता नहीं खोल सकी है और सबसे नीचे बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अहमदाबाद: Kagiso Rabada ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही रणनीति और हालात की समझ से मैच का रुख बदला जा सकता है। Gujarat Titans के इस तेज गेंदबाज ने Kolkata Knight Riders के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। पिच ने बदला गेम प्लान मैच के बाद रबाडा ने खुलासा किया कि टीम ने पिच को ध्यान में रखते हुए खास रणनीति बनाई थी। पावरप्ले में ही उन्होंने और Mohammed Siraj ने 3-3 ओवर डाले, जो आमतौर पर कम ही देखने को मिलता है। रबाडा के मुताबिक, पिच में नमी थी और गेंद थोड़ी दो-तरफा व्यवहार कर रही थी, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट नहीं खेल पाए। इसका फायदा गेंदबाजों को मिला और पावरप्ले में ही KKR 37/3 पर सिमट गई। ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ बना ताकत रबाडा ने कहा कि उनके करियर में हमेशा से ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उनका मानना है कि हर गेंदबाज की अपनी खासियत होती है–जहां सिराज लो बाउंस पिच पर खतरनाक साबित होते हैं, वहीं उछाल वाली पिचें रबाडा के लिए ज्यादा फायदेमंद होती हैं। इस मैच में भी पिच पर मौजूद अतिरिक्त उछाल ने उन्हें विकेट लेने में मदद की और उन्होंने 3/29 का शानदार प्रदर्शन किया। डेथ ओवर्स में कसी लगाम गुजरात टाइटंस के गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में बेहतरीन नियंत्रण दिखाया। जहां KKR का स्कोर 200 के पार जाता दिख रहा था, वहीं आखिरी चार ओवरों में सिर्फ 23 रन देकर उन्हें 180 पर रोक दिया गया। जीत सबसे जरूरी, रनरेट बाद में हालांकि GT को 181 रन का लक्ष्य हासिल करने में 19.4 ओवर लग गए, जिससे नेट रनरेट पर सवाल उठे। लेकिन रबाडा का मानना है कि टीम के लिए सबसे अहम जीत होती है, न कि रनरेट। उन्होंने कहा, “सबसे जरूरी जीत है। नेट रनरेट अपने आप बेहतर हो जाएगा। टूर्नामेंट अभी लंबा है और आगे सुधार का पूरा मौका है।” आगे की रणनीति रबाडा ने भरोसा जताया कि टीम के पास तेज रन बनाने की क्षमता है और सही समय पर टीम अपनी गति भी बढ़ाएगी। उनका कहना है कि बल्लेबाजों को अपनी प्राकृतिक खेल शैली पर भरोसा करना चाहिए।
आईपीएल 2026 में Shreyas Iyer का प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मिडिल ऑर्डर के इस बल्लेबाज़ ने अपनी शानदार फॉर्म से न सिर्फ टीम को मजबूती दी है, बल्कि अपनी T20 क्षमता को लेकर चल रही बहस को भी फिर से जिंदा कर दिया है। Punjab Kings (PBKS) के कप्तान अय्यर ने लगातार तीन पारियों में 50, 69* और 66 रन बनाकर टीम को पॉइंट्स टेबल के शीर्ष पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी इस फॉर्म को देखकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान Aaron Finch भी हैरान रह गए। फिंच ने कहा कि अय्यर ने IPL के बीच कोई T20 क्रिकेट नहीं खेला, फिर भी उन्होंने “house on fire” जैसी शुरुआत की। उन्होंने अय्यर की बल्लेबाज़ी की तारीफ करते हुए कहा कि वह बिना ज्यादा जोर लगाए गेंद को शानदार टाइमिंग के साथ खेलते हैं और अब शॉर्ट बॉल के खिलाफ भी पूरी तरह तैयार रहते हैं। आंकड़ों में दमदार प्रदर्शन 2025 से अब तक IPL में 500 से ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में अय्यर का स्ट्राइक रेट तीसरे स्थान पर है। उनसे आगे सिर्फ Abhishek Sharma और उनके ही टीममेट Priyansh Arya हैं। औसत के मामले में भी वह तीसरे नंबर पर हैं, जहां उनसे आगे Virat Kohli और Jos Buttler जैसे बड़े नाम हैं। कोच ने बताया सफलता का मंत्र PBKS के स्पिन-बॉलिंग कोच Sairaj Bahutule के मुताबिक, अय्यर ने अपने खेल को गहराई से समझा है। वह जानते हैं कि किस गेंदबाज को कब टारगेट करना है और कब संयम बरतना है। उनकी ‘स्मार्टनेस’ और ‘एक्जीक्यूशन’ अब पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो गई है। बड़े लक्ष्य का पीछा करने में माहिर PBKS अय्यर की कप्तानी में PBKS ने बड़े लक्ष्य का पीछा करने में भी महारत हासिल की है। टीम ने T20 क्रिकेट में 200+ रन के सबसे ज्यादा सफल चेज (10) पूरे किए हैं। हाल ही में टीम ने Mumbai Indians के खिलाफ 196 रन का लक्ष्य 21 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। क्या टीम इंडिया में वापसी होनी चाहिए? अय्यर ने दिसंबर 2023 के बाद से कोई T20 इंटरनेशनल नहीं खेला है और फिलहाल वह सिर्फ वनडे टीम का हिस्सा हैं। इस पर Piyush Chawla का मानना है कि अय्यर को भारतीय T20 टीम में जगह मिलनी चाहिए। हालांकि, फिंच का कहना है कि भारत की मौजूदा टीम बेहद मजबूत है और हाल ही में लगातार दूसरा T20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम में बदलाव करना आसान नहीं है। आगे का रास्ता अगला ICC Men's T20 World Cup ऑस्ट्रेलिया में होना है, जहां उछाल और अलग परिस्थितियां अय्यर जैसे खिलाड़ियों के लिए मौके खोल सकती हैं।
आईपीएल 2026 में एक बार फिर Virat Kohli का बल्ला जमकर बोल रहा है। Royal Challengers Bengaluru (RCB) के स्टार बल्लेबाज कोहली ने लखनऊ के खिलाफ शानदार पारी खेलते हुए ऑरेंज कैप अपने नाम कर ली है। इम्पैक्ट प्लेयर बनकर भी छाए कोहली Lucknow Super Giants के खिलाफ मुकाबले में कोहली ने 34 गेंदों में 49 रन की अहम पारी खेली और टीम को 147 रन का लक्ष्य हासिल करने में मदद की। यह पहली बार था जब RCB ने उन्हें Impact Player के रूप में इस्तेमाल किया। इस पारी के साथ कोहली के इस सीजन में कुल 228 रन हो गए हैं, जिससे वह रन बनाने वालों की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। खास बात यह है कि कोहली हाल ही में घुटने में दर्द से जूझ रहे थे, फिर भी उन्होंने मैदान पर आकर टीम के लिए अहम योगदान दिया। ऑरेंज कैप की रेस में कड़ी टक्कर कोहली के बाद दूसरे स्थान पर Heinrich Klaasen हैं, जो Sunrisers Hyderabad के लिए खेलते हुए 224 रन बना चुके हैं। तीसरे स्थान पर RCB के कप्तान Rajat Patidar पहुंच गए हैं, जिन्होंने लखनऊ के खिलाफ 13 गेंदों में 27 रन की तेज पारी खेली। इसके अलावा Ishan Kishan और Vaibhav Sooryavanshi भी 200+ रन के आंकड़े को पार कर चुके हैं, जिससे इस सीजन की रन रेस और रोमांचक हो गई है। पर्पल कैप की दौड़ भी दिलचस्प गेंदबाजी में Anshul Kamboj (Chennai Super Kings) और Prasidh Krishna (Gujarat Titans) 10-10 विकेट के साथ टॉप पर बने हुए हैं। उनके पीछे Ravi Bishnoi (Rajasthan Royals) और Prince Yadav (LSG) 9-9 विकेट लेकर दबाव बनाए हुए हैं। वहीं Bhuvneshwar Kumar और Krunal Pandya 7-7 विकेट के साथ रेस में बने हुए हैं। खास बात यह है कि क्रुणाल इस सीजन के टॉप विकेट-टेकर्स में इकलौते फिंगर स्पिनर हैं। सीजन होता जा रहा रोमांचक IPL 2026 में बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। जहां एक तरफ कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ी फॉर्म में लौटे हैं, वहीं युवा खिलाड़ी भी लगातार चुनौती पेश कर रहे हैं। आने वाले मुकाबलों में ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस और भी दिलचस्प होने वाली है।